Crude Oil Price : अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए गंभीर चिंता पैदा कर दी है। दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल परिवहन मार्गों में से एक ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) के कमर्शियल शिपिंग के लिए बंद होने से कच्चे तेल की कीमतों में भारी उछाल आया है। इस तनाव का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय बाजार पर पड़ा है, जहाँ ब्रेंट क्रूड ऑयल (Brent Crude) की कीमतें 85 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गई हैं। वर्तमान में ब्रेंट क्रूड 85.65 डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा है, जबकि डब्ल्यूटीआई (WTI) क्रूड भी बढ़कर 80.42 डॉलर प्रति बैरल के स्तर तक पहुंच गया है।

भारतीय बाजार पर संकट के बादल और गिरावट की आशंका
कच्चे तेल की कीमतों में आई इस तेज तेजी का असर भारतीय शेयर बाजार पर भी स्पष्ट दिखाई दे रहा है। निवेशकों के बीच बढ़ते डर के कारण बिकवाली का माहौल है। भारतीय शेयर बाजार के लिए संकेत माने जाने वाले ‘गिफ्ट निफ्टी’ (Gift Nifty) में 160 अंकों से ज्यादा की भारी गिरावट देखी गई है, जो इस बात का स्पष्ट संकेत है कि आज भारतीय बाजारों में कारोबारी सत्र की शुरुआत दबाव के साथ हो सकती है। कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा जोखिम हैं, क्योंकि भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे चालू खाता घाटे और महंगाई पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

अमेरिकी बाजार में तकनीकी शेयरों पर भारी दबाव
ईरान के साथ शुरू हुए युद्ध का असर अमेरिकी बाजारों पर भी गहरा पड़ा है। वॉल स्ट्रीट में निवेशकों की धारणा नकारात्मक बनी हुई है, विशेषकर तकनीकी शेयरों में भारी बिकवाली देखी जा रही है। ‘डाउ जोन्स फ्यूचर्स’ 116 अंक नीचे कारोबार कर रहा है। इससे पहले, एसएंडपी 500 (S&P 500) में 0.79% और नैस्डैक (Nasdaq) में 1.55% की बड़ी गिरावट दर्ज की गई थी। तकनीकी शेयरों में यह कमजोरी वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता और युद्ध के कारण आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) के बाधित होने के डर को दर्शाती है।
एशियाई बाजारों का मिला-जुला रुख और विदेशी निवेश
एशियाई बाजारों में भी आज अनिश्चितता का माहौल है। जापानी बेंचमार्क ‘निक्केई 225’ में हल्की कमजोरी देखी गई, जबकि हैंग सेंग, ताइवान वेटेड और स्ट्रेट्स टाइम्स जैसे प्रमुख इंडेक्स भारी गिरावट के साथ कारोबार करते नजर आए। वहीं, दक्षिण कोरिया के ‘कोस्पी’ (KOSPI) में मामूली तेजी दर्ज की गई। इस बीच, डॉलर इंडेक्स 101.24 पर सपाट बना हुआ है। डॉलर की मजबूती उभरते बाजारों (emerging markets) के लिए चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि यह विदेशी निवेशकों को इन बाजारों से पैसा निकालने के लिए प्रेरित कर सकता है।
सुरक्षित निवेश के रूप में सोने की स्थिति
तनावपूर्ण वैश्विक माहौल के बावजूद सोने की कीमतों में फिलहाल कोई बड़ी हलचल नहीं देखी गई है। सोना 4,000.97 डॉलर पर बेहद मामूली गिरावट के साथ कारोबार कर रहा है। आमतौर पर युद्ध की स्थिति में सोना एक सुरक्षित निवेश (safe haven) माना जाता है, लेकिन फिलहाल बाजार का ध्यान पूरी तरह से कच्चे तेल की कीमतों और भू-राजनीतिक मोर्चे पर बनी स्थिति पर टिका हुआ है।












