Congress Meeting : संसद के आगामी मानसून सत्र को लेकर कांग्रेस ने अपनी चुनावी और विधायी रणनीति को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया है। पार्टी की संसदीय रणनीति समिति (Parliamentary Strategy Committee) की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद महासचिव जयराम रमेश और सांसद नासिर हुसैन ने प्रेसवार्ता में सरकार के प्रस्तावित एजेंडे के खिलाफ कड़े रुख के संकेत दिए हैं। कांग्रेस ने साफ किया है कि सरकार जिन प्रमुख विधेयकों को लाने की तैयारी में है, पार्टी सदन के भीतर और बाहर उनका पुरजोर विरोध करेगी। इसमें परिसीमन, ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ और खाद्य सुरक्षा अधिनियम जैसे संवेदनशील मुद्दे शामिल हैं, जिन पर कांग्रेस ने अपनी असहमति दर्ज कराई है।

विधेयकों पर सरकार की चुप्पी और सर्वदलीय बैठक पर सवाल
कांग्रेस का आरोप है कि सरकार ने अब तक इस बात का औपचारिक खुलासा नहीं किया है कि मानसून सत्र में कौन-कौन से विधेयक पेश किए जाएंगे। जयराम रमेश ने कहा कि अस्पष्टता के कारण पार्टी ने संभावित विधेयकों पर विस्तार से चर्चा की है। उन्होंने कहा कि 19 जुलाई को प्रस्तावित सर्वदलीय बैठक में सरकार से इन विधेयकों की सूची मांगी जाएगी। साथ ही, कांग्रेस ने सर्वदलीय बैठक की प्रक्रिया पर भी गहरा असंतोष व्यक्त किया। रमेश के अनुसार, ये बैठकें अब केवल एक औपचारिकता बनकर रह गई हैं, जहाँ विपक्ष की बातों को सुना तो जाता है, लेकिन उनके सुझावों को गंभीरता से नहीं लिया जाता।

परिसीमन और संविधान संशोधन का कड़ा विरोध
कांग्रेस ने परिसीमन (Delimitation) और संविधान संशोधन से जुड़े किसी भी प्रस्ताव को लेकर आक्रामक रणनीति अपनाई है। पार्टी का मानना है कि भाजपा लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत प्राप्त करने के लिए राजनीतिक दलों को तोड़ने जैसी अनैतिक कोशिशें कर रही है। कांग्रेस ने चेताया है कि संविधान की मूल भावना के खिलाफ किसी भी कदम का पार्टी डटकर मुकाबला करेगी। इस मुद्दे पर कांग्रेस समान विचारधारा वाले विपक्षी दलों को एकजुट करने की कोशिश में जुटी है ताकि सदन में एक संयुक्त और प्रभावी रणनीति के साथ सरकार को घेरा जा सके।
‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ सहित अन्य कानूनों पर आपत्ति
बैठक में ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ के प्रस्ताव और उस पर गठित संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की रिपोर्ट पर भी विस्तृत चर्चा हुई। कांग्रेस ने स्पष्ट किया है कि वह इस अवधारणा का पूरी तरह विरोध करेगी, क्योंकि यह संघीय ढांचे के खिलाफ है। इसके साथ ही पार्टी एफसीआरए (FCRA) संशोधन और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम, 2013 में बदलाव का भी कड़ा विरोध करेगी। कांग्रेस का तर्क है कि प्रधानमंत्री अन्न योजना इसी अधिनियम का हिस्सा है और इसमें किसी भी प्रकार का संशोधन जनहित के अनुकूल नहीं होगा। पार्टी ने अन्य विपक्षी दलों से भी संपर्क साधना शुरू कर दिया है ताकि इन विधेयकों के खिलाफ सदन में एक मजबूत मोर्चा बनाया जा सके।
Read More : Fake Call Scam : तीन करोड़ दो मंत्री बनो, प्रियंका गांधी का नाम लेकर ठगी की कोशिश












