PoK Violence: संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार प्रमुख वोल्कर तुर्क ने पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में पिछले कुछ समय से जारी तनाव, हिंसा और अशांति पर गहरा संज्ञान लिया है। क्षेत्र में बिगड़ते हालातों को देखते हुए उन्होंने सभी संबंधित पक्षों से शांति बनाए रखने की अपील की है। जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि आगामी क्षेत्रीय विधानसभा चुनावों के मद्देनजर PoK के हालात अत्यधिक संवेदनशील और तनावपूर्ण बने हुए हैं। जून माह से अब तक दर्जनों लोगों की जान जाने की खबरें प्राप्त हुई हैं, जिससे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चिंता का माहौल है।
मौतों की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच की आवश्यकता
संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त वोल्कर तुर्क ने इस हिंसा में मारे गए प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाबलों के जवानों की मौतों की तुरंत, निष्पक्ष और गहन जांच की मांग की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि न्याय सुनिश्चित करने के लिए पूरी पारदर्शिता आवश्यक है। ज्ञात हो कि इन विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) द्वारा किया जा रहा है, जिसमें समाज के विभिन्न वर्गों जैसे व्यापारी, ट्रांसपोर्टर, छात्र, वकील और सामाजिक कार्यकर्ता शामिल हैं। इन प्रदर्शनों के दौरान हुई जनहानि ने मानवाधिकार के गंभीर उल्लंघन की ओर इशारा किया है, जिसे लेकर संयुक्त राष्ट्र ने कड़ा रुख अपनाया है।
JAAC पर प्रतिबंध और नागरिक अधिकारों का हनन
पाकिस्तान सरकार द्वारा JAAC को सार्वजनिक व्यवस्था के लिए खतरा बताते हुए आतंकवाद-रोधी कानूनों के तहत प्रतिबंधित करना और उसके नेताओं की धरपकड़ करना संयुक्त राष्ट्र के लिए बड़ी चिंता का विषय है। मानवाधिकार प्रमुख ने चेतावनी दी है कि किसी नागरिक संगठन को अपराधी घोषित करना और शांतिपूर्ण विरोध को दबाना अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, शांतिपूर्ण सभाओं और संगठन बनाने के मूलभूत अधिकारों का सीधा उल्लंघन है। उन्होंने गिरफ्तार किए गए नेताओं के कानूनी अधिकारों की रक्षा, उन्हें वकील तक पहुंच और उचित न्यायिक प्रक्रिया उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया है। PoK से लगातार सामने आ रही पाकिस्तानी सेना के दमन की खबरें इस स्थिति को और अधिक जटिल बना रही हैं।
इंटरनेट सेवाओं पर पाबंदी और सूचना के अधिकार का संकट
वोल्कर तुर्क ने PoK में इंटरनेट सेवाओं पर लगाए गए प्रतिबंधों की भी कड़ी निंदा की है। उन्होंने कहा कि तनावपूर्ण माहौल में इंटरनेट बंद करना लोगों के सूचना पाने, अपनी बात रखने और सूचनाओं को साझा करने के अधिकार को बुरी तरह प्रभावित करता है। इससे न केवल आम नागरिकों का दैनिक जीवन अस्त-व्यस्त होता है, बल्कि पारदर्शिता भी समाप्त हो जाती है। अधिकारियों से यह अपील की गई है कि वे पूरे क्षेत्र में तुरंत इंटरनेट सेवाएं बहाल करें ताकि स्थिति सामान्य हो सके और लोगों को अपने अधिकारों का उपयोग करने की स्वतंत्रता मिले।
बातचीत के माध्यम से ही संभव है स्थायी शांति
अंत में, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख ने इस बात पर जोर दिया कि शक्ति प्रदर्शन या दमन से समाधान नहीं निकलेगा। उन्होंने सभी पक्षों का आह्वान किया है कि वे स्थानीय लोगों की शिकायतों और समस्याओं को सुनने के लिए सार्थक और समावेशी राजनीतिक संवाद शुरू करें। उनका मानना है कि बातचीत का रास्ता ही क्षेत्र में स्थायी शांति और सामान्य स्थिति बहाल करने का एकमात्र जरिया है। संयुक्त राष्ट्र का यह हस्तक्षेप PoK में मानवाधिकारों की रक्षा और लोकतांत्रिक मूल्यों की बहाली के लिए एक महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय दबाव के रूप में देखा जा रहा है।
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