Puri Rath Yatra: उत्तराखंड के प्रसिद्ध बद्रीनाथ धाम में दान-चढ़ावे में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं के मामले में पुलिस की एसआईटी (SIT) ने एक बड़ी कामयाबी हासिल की है। एसआईटी ने बद्रीनाथ-केदारनाथ मंदिर समिति (BKTC) के पूर्व टेंपल अधिकारी राजेंद्र सिंह चौहान को गिरफ्तार कर लिया है। यह कार्रवाई तब हुई जब आरोपी अपने सेवानिवृत्ति (रिटायरमेंट) के महज 18 दिन बाद ही सरकारी दायित्वों से मुक्त हुआ था। इस गिरफ्तारी ने मंदिर प्रशासन और समिति के भीतर चल रहे वित्तीय कुप्रबंधन के एक बड़े रैकेट की परतें खोल दी हैं, जिससे स्थानीय स्तर पर सनसनी फैल गई है।

सीसीटीवी फुटेज ने खोला राज
एसआईटी की जांच में सबसे महत्वपूर्ण कड़ी मंदिर का सीसीटीवी फुटेज साबित हुआ। जांच के दौरान सामने आया कि पूर्व टेंपल अधिकारी राजेंद्र सिंह चौहान को मंदिर के ‘गणना कक्ष’ (Counting Room) से नकदी निकालते हुए रंगे हाथों सीसीटीवी में कैद किया गया था। इस फुटेज के सार्वजनिक और पुख्ता होने के बाद एसआईटी ने तुरंत कार्रवाई करते हुए चौहान को हिरासत में लिया। उनसे करीब चार घंटे तक गहन पूछताछ की गई, जिसमें वे अपने कार्यों का कोई संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके। संतोषजनक जवाब न मिलने और सबूतों के आधार पर एसआईटी ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।

वित्तीय गड़बड़ी का बड़ा रैकेट
यह गिरफ्तारी कोई छोटी-मोटी घटना नहीं है, बल्कि यह मंदिर समिति में लंबे समय से चल रही वित्तीय गड़बड़ी के एक बड़े रैकेट की ओर इशारा करती है। प्रशासन और पुलिस का मानना है कि दान के पैसे की चोरी का यह सिलसिला केवल एक व्यक्ति तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें कई अन्य लोग भी शामिल हो सकते हैं। इस घटना के बाद मंदिर समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। प्रशासन ने अब इस मामले में अत्यंत सख्त रुख अपना लिया है और यह संकेत दिया है कि गड़बड़ी में शामिल किसी भी व्यक्ति को बख्शा नहीं जाएगा।
अदालत में पेशी और आगे की जांच
गिरफ्तारी के बाद, आरोपी राजेंद्र सिंह चौहान को कानूनी प्रक्रिया के तहत स्थानीय अदालत में पेश किया जा रहा है। एसआईटी का उद्देश्य अब यह पता लगाना है कि इस घोटाले की जड़ें कितनी गहरी हैं और इस पूरे रैकेट में और कौन-कौन से अधिकारी या कर्मचारी शामिल हो सकते हैं। मंदिर की दान राशि करोड़ों में होती है, ऐसे में इस तरह की धांधली का सामने आना श्रद्धालुओं की आस्था के साथ खिलवाड़ जैसा है। पुलिस अब मामले की कड़ी से कड़ी जोड़कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि यह गड़बड़ी कितने वर्षों से चल रही थी और इसमें कितनी राशि का हेरफेर हुआ है।
श्रद्धालुओं की आस्था और प्रशासन की सख्ती
बद्रीनाथ धाम करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और वहां चढ़ाए जाने वाले दान का उपयोग मंदिर की व्यवस्था और धार्मिक कार्यों के लिए किया जाता है। इस तरह के वित्तीय घोटालों से न केवल मंदिर की गरिमा प्रभावित होती है, बल्कि दानदाताओं का भरोसा भी कम होता है। सरकार और मंदिर प्रशासन अब इस मामले की व्यापक जांच के लिए प्रतिबद्ध हैं। एसआईटी की इस सक्रियता ने यह संदेश दिया है कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता और वित्तीय पारदर्शिता बनाए रखने के लिए सरकार किसी भी हद तक जाने को तैयार है। भविष्य में मंदिर समिति में और भी प्रशासनिक बदलाव देखने को मिल सकते हैं।
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