जंतर-मंतर पर अनशन के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक महिला ने अभिजीत दीपके पर अचानक स्याही फेंक दी। घटना के बाद समर्थकों और पुलिस के बीच भारी हंगामा हुआ। आखिर महिला कौन थी, उसने ऐसा कदम क्यों उठाया और मौके पर आगे क्या हुआ, जानिए पूरी कहानी।
जंतर-मंतर पर अनशन के दौरान उस समय अफरा-तफरी मच गई जब एक महिला ने अभिजीत दीपके पर अचानक स्याही फेंक दी। घटना के बाद समर्थकों और पुलिस के बीच भारी हंगामा हुआ। आखिर महिला कौन थी, उसने ऐसा कदम क्यों उठाया और मौके पर आगे क्या हुआ, जानिए पूरी कहानी।

CJP Protest : देश की राजधानी दिल्ली का ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर शनिवार को एक बार फिर तनाव और हंगामे का केंद्र बन गया। यहां चल रहे छात्र आंदोलन के बीच उस समय अफरा-तफरी मच गई जब ‘कॉकरोच जनता पार्टी’ (CJP) के संस्थापक और अध्यक्ष अभिजीत दीपके पर एक अज्ञात महिला ने अचानक स्याही फेंक दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, घटना उस वक्त हुई जब दीपके अपने समर्थकों और वहां मौजूद छात्रों को संबोधित कर रहे थे। भीड़ का फायदा उठाकर आई महिला ने तेजी से उन पर स्याही उड़ेल दी, जिससे उनके चेहरे और कपड़े पूरी तरह से भीग गए। इस अप्रत्याशित हमले ने वहां मौजूद लोगों को चौंका दिया और प्रदर्शन स्थल पर स्थिति कुछ देर के लिए काफी तनावपूर्ण हो गई।


यह स्याही हमला एक बेहद संवेदनशील समय पर हुआ है। घटना से कुछ ही घंटे पहले, प्रसिद्ध शिक्षा सुधारक सोनम वांगचुक को पुलिस ने स्वास्थ्य कारणों से सफदरजंग अस्पताल में शिफ्ट किया था। उनके अस्पताल जाने के तुरंत बाद, अभिजीत दीपके ने जंतर-मंतर पर अपनी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शुरू करने का ऐलान किया था। NEET परीक्षा में कथित धांधली और पेपर लीक के खिलाफ शुरू हुए इस आंदोलन के दौरान हुआ यह ‘इंक अटैक’ प्रशासन और पुलिस की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवालिया निशान लगाता है। एक संवेदनशील धरना स्थल पर इस तरह की सुरक्षा चूक ने आंदोलनकारियों की सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।

जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन अब एक विकट मोड़ पर पहुंच गया है। शनिवार को लगातार 21वें दिन भूख हड़ताल कर रहे तीन छात्र कार्यकर्ताओं की तबीयत बिगड़ने से माहौल और अधिक गंभीर हो गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि स्वास्थ्य खराब होने के बावजूद दिल्ली पुलिस ने नेहा, आमीन और मनीष नामक तीन कार्यकर्ताओं को प्रदर्शन स्थल से जबरन हिरासत में लेने की कोशिश की। यह आंदोलन राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की कार्यप्रणाली में व्याप्त अनियमितताओं और पेपर लीक के विरोध में किया जा रहा है। प्रदर्शनकारियों की मुख्य मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा है। इस आंदोलन में सोनम वांगचुक के साथ जुड़े छात्र लगातार अपनी मांगों पर अड़े हुए हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं में धांधली का मुद्दा युवाओं के भविष्य से जुड़ा है, जिसे लेकर देश भर में आक्रोश देखा जा रहा है। जंतर-मंतर पर जमा हुए छात्रों का कहना है कि वे तब तक पीछे नहीं हटेंगे जब तक सरकार उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं लेती। अभिजीत दीपके पर हुए हमले को भी इसी आंदोलन को दबाने की एक कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। छात्रों का आरोप है कि पुलिस और प्रशासन उन्हें डराने-धमकाने का काम कर रहे हैं। फिलहाल, जंतर-मंतर पर सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और प्रदर्शनकारी अपने साथी कार्यकर्ताओं की गिरफ्तारी के विरोध में और अधिक उग्र होने की चेतावनी दे रहे हैं। आने वाले दिनों में यह आंदोलन और भी व्यापक रूप ले सकता है।
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