Kangana Ranaut on CJP Protest: भारतीय जनता पार्टी की सांसद और प्रसिद्ध अभिनेत्री कंगना रनौत ने सोमवार को बड़ा बयान देते हुए कहा है कि विपक्ष सरकार पर यह तय करने के लिए अनुचित दबाव नहीं डाल सकता कि कौन सा मंत्री अपने पद पर बना रहेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि संसद ही देश के गंभीर और सार्वजनिक मुद्दों पर बहस करने और सरकार की जवाबदेही तय करने का एकमात्र सही मंच है। उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है जब कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) और विपक्षी दल नीट-यूजी 2026 विवाद को लेकर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर लगातार आक्रामक विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

संसद में परीक्षा विवाद और राम मंदिर दान पर हंगामे के चलते कार्यवाही स्थगित
दूसरी ओर, संसद के मानसून सत्र के पहले दिन लोकसभा के भीतर नीट परीक्षा में कथित अनियमितताओं और अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को मिले दान में कथित हेराफेरी के मामलों पर चर्चा की मांग को लेकर विपक्षी सांसदों ने जमकर नारेबाजी की। इस भारी हंगामे और विरोध-प्रदर्शन के कारण लोकसभा की कार्यवाही को शुरुआती दौर में ही कुछ समय के लिए स्थगित करना पड़ा। विपक्ष लगातार इन संवेदनशील मुद्दों पर सरकार को घेरने और स्थगन प्रस्ताव के माध्यम से चर्चा की मांग पर अड़ा रहा, जिससे सदन में लगातार गतिरोध की स्थिति बनी रही।

संसद ही सवाल उठाने और बहस करने का सही मंच है- कंगना रनौत
कंगना रनौत ने मीडिया से बातचीत करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि संसद का मुख्य उद्देश्य ही यह सुनिश्चित करना है कि सभी महत्वपूर्ण मुद्दों पर विस्तार से चर्चा हो सके और सरकार को हर नीति व निर्णय के लिए जवाबदेह ठहराया जाए। उन्होंने मॉनसून सत्र के दौरान बाहर और अंदर हो रहे हंगामे की आलोचना करते हुए कहा कि वे चाहते हैं कि संसद सुचारू रूप से चले और विपक्ष अपने सभी सवाल सदन के भीतर उठाए। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि सदन के अंदर हंगामा और अफरा-तफरी मचाना किसी भी तरह से उचित नहीं है, क्योंकि इससे जनता के जरूरी काम बाधित होते हैं।
सरकार कैसे चलानी है, यह तय करना जनता द्वारा चुनी गई सरकार का हक
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को पूरी तरह खारिज करते हुए बीजेपी सांसद ने कहा कि आप सरकार पर इस तरह का दबाव नहीं बना सकते कि किसे मंत्रिमंडल में रखना है और किसे हटाना है। उन्होंने दो टूक कहा कि इस तरह का राजनीतिक दबाव डालना पूरी तरह गलत और अलोकतांत्रिक है। रनौत ने विपक्ष को चुनौती देते हुए कहा कि सरकार को किस प्रकार से चलाना है और नीतियां कैसे तय करनी हैं, यह पूरी तरह से देश की जनता द्वारा चुनी गई सरकार का अधिकार है। यदि विपक्ष को इतनी ही आपत्ति है, तो उन्हें खुद मैदान में आकर चुनाव लड़ना चाहिए।
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की अपील के बावजूद सदन में जारी रहा भारी हंगामा
इससे पहले दिन की कार्यवाही की शुरुआत करते हुए लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने सदन के छह दिवंगत पूर्व सांसदों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। श्रद्धांजलि के तुरंत बाद विपक्षी सांसदों ने अपनी सीटों पर खड़े होकर नारेबाजी शुरू कर दी और नीट परीक्षा की कथित गड़बड़ियों तथा राम मंदिर चंदे में हेराफेरी पर तत्काल चर्चा की मांग पर अड़ गए। अध्यक्ष ओम बिरला ने बार-बार सदस्यों से अपनी सीटों पर बैठने और सदन की गरिमा बनाए रखने की अपील की, लेकिन विपक्षी सांसदों का हंगामा थमता नहीं दिखा, जिसके बाद सदन की कार्यवाही को दोपहर 12 बजे तक के लिए स्थगित करना पड़ा।
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