Rinmukteshwar Mahadev: भारत भर में भगवान शिव के अनगिनत प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर मौजूद हैं, जहाँ शिव भक्त बड़ी संख्या में उनके दर्शन और पूजन के लिए श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं। जब भी हम महादेव की पूजा करते हैं, तो अमूमन शिवलिंग पर जल, कच्चा दूध, बेलपत्र, शहद और गंगाजल जैसी पवित्र चीजें अर्पित करते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि हमारे देश में एक ऐसा अनूठा शिव मंदिर भी है, जहां इन सामान्य चीजों के अलावा भगवान शिव को विशेष रूप से दाल चढ़ाई जाती है? यह अनोखा मंदिर मध्य प्रदेश की प्रसिद्ध तीर्थ नगरी ओंकारेश्वर में स्थित है।

ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर और दाल चढ़ाने की परंपरा
ओंकारेश्वर अपने अद्वितीय धार्मिक महत्व और आध्यात्मिक आस्था के लिए पूरी दुनिया में विख्यात है, क्योंकि यहाँ भगवान शिव साक्षात ज्योतिर्लिंग के रूप में विराजमान हैं। यहाँ महादेव का एक ऐसा मंदिर है जो अन्य सभी शिव मंदिरों से काफी अलग है, और इसका नाम ‘ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर’ है। इस मंदिर का इतिहास बहुत प्राचीन है और इसका संबंध सीधे महाभारत काल से जुड़ा हुआ माना जाता है। इस मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहाँ शिवलिंग पर दूध, बेलपत्र और गंगाजल के साथ-साथ चने की दाल अर्पित करने की अनोखी परंपरा है।

कर्ज मुक्ति और सुख-समृद्धि की गहरी मान्यता
ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर के बारे में मान्यता है कि जो भी भक्त सच्ची श्रद्धा और विश्वास के साथ यहाँ आकर महादेव को दाल चढ़ाता है, उसे जीवन के सभी प्रकार के कर्जों से मुक्ति मिल जाती है। इसके साथ ही, उसके जीवन में सुख-समृद्धि और वैभव का आशीर्वाद भी प्राप्त होता है। भगवान शिव को दाल अर्पित किए जाने के पीछे एक पौराणिक मान्यता यह भी जुड़ी है कि इस मंदिर परिसर में देवताओं के गुरु बृहस्पति का निवास स्थान माना जाता है। कहा जाता है कि भगवान शिव ने सभी देवताओं को अलग-अलग स्थान दिए थे, जिसमें गुरु बृहस्पति को ऋणमुक्तेश्वर मंदिर में विशेष स्थान प्राप्त हुआ था।
नर्मदा नदी के तट पर स्थित है यह प्राचीन मंदिर
यह धार्मिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण मंदिर पवित्र नर्मदा नदी के पावन तट पर बसा हुआ है। इस प्राचीन और ऐतिहासिक मंदिर में प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन और पूजन के लिए आते हैं। विशेष तौर पर सोमवार के दिन, महाशिवरात्रि के पावन पर्व और अन्य प्रमुख धार्मिक उत्सवों के अवसरों पर ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर में भक्तों का तांता लगा रहता है और भारी भीड़ उमड़ती है। मंदिर में प्रवेश करने और दर्शन करने से पहले श्रद्धालु पवित्र नर्मदा नदी में आस्था की डुबकी लगाते हैं और फिर मंदिर में जाकर चने की दाल चढ़ाते हैं।
पांडवों द्वारा की गई थी इस ऐतिहासिक मंदिर की स्थापना
भगवान शिव के इस चमत्कारी ऋणमुक्तेश्वर मंदिर का इतिहास महाभारत कालीन पांडवों से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, अपने अज्ञातवास के कठिन काल के दौरान पांडवों ने कर्ज और संकटों से मुक्ति पाने के उद्देश्य से भगवान श्रीकृष्ण के मार्गदर्शन में इस ऋणमुक्तेश्वर महादेव मंदिर की स्थापना की थी। इसके बाद जब उनका अज्ञातवास सफलतापूर्वक समाप्त हो गया, तब वे यहाँ दोबारा आए और महादेव का आभार व्यक्त किया। आज भी इस मंदिर में आने वाले देश-विदेश के भक्त उसी प्राचीन परंपरा का पूरी निष्ठा के साथ पालन करते हैं और शिवलिंग पर चने की दाल अर्पित कर आशीर्वाद मांगते हैं।
Read More : CJP Parliament March: संसद मार्च में बवाल, 50 पुलिसकर्मी घायल होने का दावा; दिल्ली पुलिस दर्ज करेगी FIR












