Shiv Sena UBT : महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से भारी गर्माहट देखने को मिल रही है, क्योंकि शिवसेना (यूबीटी) ने पार्टी के छह बागी सांसदों के खिलाफ पूरी ताकत के साथ मोर्चा खोल दिया है। शिवसेना (यूबीटी) ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के उस विवादास्पद फैसले को सीधे तौर पर सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है, जिसके तहत उन्होंने पार्टी के इन बागी सांसदों के एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना में आधिकारिक विलय को अपनी मंजूरी प्रदान कर दी थी। पार्टी के अधिकृत वकील देवदत्त कामत ने भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली विशेष बेंच के समक्ष इस पूरे मामले की जल्द से जल्द सुनवाई किए जाने की पुरजोर मांग की है।

संसद में पार्टी का कामकाज हुआ ठप, घटकर सिर्फ 3 बचे सांसद
अदालत में मामले की पैरवी कर रहे वकील देवदत्त कामत ने मुख्य न्यायाधीश के सामने दलील देते हुए कहा कि संसद के भीतर एक राजनीतिक दल के रूप में उनकी पार्टी का कामकाज पूरी तरह से ठप हो गया है, क्योंकि उनके छह सांसद अब पार्टी के साथ नहीं हैं। लोकसभा अध्यक्ष द्वारा इन बागी सांसदों के दूसरी पार्टी में विलय को मान्यता दिए जाने के बाद, संसद के निचले सदन यानी लोकसभा में शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों की कुल संख्या भारी गिरावट के बाद अब घटकर केवल 3 ही रह गई है। मुख्य न्यायाधीश ने वकील की इस गंभीर मांग पर संज्ञान लेते हुए मामले की जल्द सुनवाई किए जाने का ठोस भरोसा दिया है। संसद के आगामी मानसून सत्र से ठीक पहले लोकसभा अध्यक्ष द्वारा दिए गए इस फैसले से सियासी पारा काफी चढ़ गया है।

संविधान की दसवीं अनुसूची और ददल-बदल कानून पर आमने-सामने नेता
इस पूरे घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता अंबादास दानवे ने शनिवार को कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला द्वारा पार्टी के छह सांसदों के एकनाथ शिंदे गुट में किए गए विलय को मंजूरी देने का निर्णय पूरी तरह से गैर-कानूनी है और इसी वजह से पार्टी इसे न्याय के लिए अदालत में ले गई है। दानवे ने संविधान की दसवीं अनुसूची का हवाला देते हुए तर्क दिया कि कानून के अनुसार केवल एक पूरी पार्टी का ही दूसरी पार्टी में विधिवत विलय हो सकता है, लेकिन चुने हुए विधायकों या सांसदों का कोई भी छोटा समूह अपनी मर्जी से ऐसा नहीं कर सकता। इसके विपरीत, शिंदे गुट के नेता और पूर्व सांसद संजय निरुपम ने बचाव करते हुए कहा कि यह पूरा विलय दल-बदल विरोधी कानून के प्रावधानों के पूरी तरह अनुकूल है और सभी छह सांसदों ने संवैधानिक प्रक्रिया का पालन किया है।
संजय राउत का तीखा हमला, लोकतंत्र की हत्या करार दिया
शिवसेना (यूबीटी) के फायरब्रांड नेता संजय राउत ने इस पूरे राजनीतिक घटनाक्रम पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए रविवार को तीखे शब्दों में कहा कि यह कदम देश के लोकतंत्र का ‘बलात्कार और हत्या’ करने के समान है। राउत ने किसी का सीधा नाम लिए बिना आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के ‘जलती हुई मशाल’ चुनाव चिह्न पर जनता द्वारा चुने गए सांसदों को पैसों के बल पर खरीद लिया गया है, जो कि एक बेहद गंभीर और अक्षम्य अपराध है। उन्होंने कड़े शब्दों में सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश के संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत किसी गुट के इस तरह अलग होने या विलय की स्पष्ट अनुमति ही नहीं है, तो आखिर किस आधार पर लोकसभा अध्यक्ष ने इस गैर-कानूनी कृत्य की अनुमति दी।
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