Ground Reality : स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल द्वारा विधानसभा में स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से जारी संलग्नीकरण (अटैचमेंट) व्यवस्था समाप्त करने की घोषणा के कई महीने बाद भी सरगुजा जिले में इसका असर धरातल पर दिखाई नहीं दे रहा है। जिला मुख्यालय में कर्मचारी अब भी संलग्न हैं, जबकि उदयपुर, सलका, चलगली, केशमा, दरिमा समेत कई ग्रामीण आयुष संस्थान चिकित्सकों और कर्मचारियों की कमी से जूझ रहे हैं। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित हो रही हैं और मरीजों को उपचार के लिए भटकना पड़ रहा है।

सरगुजा में आदेश जारी, लेकिन अमल अधूरा

जिला आयुष अधिकारी कार्यालय अंबिकापुर की ओर से जारी कार्यादेश में 12 चिकित्सकों एवं कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल अथवा नए कार्यस्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए थे। बावजूद इसके, विभागीय सूत्रों के अनुसार अधिकांश कर्मचारी अब भी जिला आयुर्वेद चिकित्सालय अंबिकापुर और शहर के अन्य संस्थानों में ही सेवाएं दे रहे हैं।

ग्रामीण अस्पतालों में स्टाफ का गंभीर अभाव
उदयपुर, सलका, चलगली, केशमा, दरिमा सहित जिले के कई आयुष स्वास्थ्य केंद्र लंबे समय से चिकित्सकों और कर्मचारियों की कमी का सामना कर रहे हैं। कई जगहों पर नियमित चिकित्सक उपलब्ध नहीं होने से मरीजों को या तो सीमित उपचार मिल रहा है या फिर जिला मुख्यालय का रुख करना पड़ रहा है।
विधानसभा में हुई थी घोषणा
फरवरी में विधानसभा सत्र के दौरान स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल ने स्पष्ट रूप से कहा था कि स्वास्थ्य विभाग में वर्षों से चल रही संलग्नीकरण व्यवस्था को समाप्त किया जाएगा और सभी अधिकारियों-कर्मचारियों को उनकी मूल पदस्थापना पर भेजा जाएगा, ताकि स्वास्थ्य संस्थानों में उपलब्ध मानव संसाधन का संतुलित उपयोग हो सके।
सवालों के घेरे में व्यवस्था
“मंत्री की घोषणा और विभागीय आदेश के बावजूद यदि कर्मचारी अब भी मूल पदस्थापना पर नहीं लौटे हैं, तो इससे आदेशों के क्रियान्वयन पर सवाल उठ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जब तक ग्रामीण अस्पतालों में पर्याप्त चिकित्सक और कर्मचारी तैनात नहीं होंगे, तब तक दूर-दराज के मरीजों को गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध नहीं हो पाएंगी। “











