Nepal Coin : पड़ोसी देश नेपाल ने एक और दो रुपये के नए सिक्कों के डिजाइन को मंजूरी दी है। इन नए सिक्कों में सबसे अधिक चर्चा एक रुपये के सिक्के को लेकर हो रही है, क्योंकि इसमें पहले अंकित विवादित राजनीतिक नक्शे को हटा दिया गया है। यह वही नक्शा था जिसे पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली सरकार ने जारी किया था और जिसमें भारतीय क्षेत्र लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया था। इस बदलाव को भारत-नेपाल संबंधों के संदर्भ में एक महत्वपूर्ण घटनाक्रम माना जा रहा है। हालांकि नेपाल सरकार का कहना है कि यह पूरी तरह तकनीकी और डिजाइन से जुड़ा फैसला है, लेकिन कई विशेषज्ञ इसे दोनों देशों के रिश्तों में सकारात्मक संकेत के रूप में देख रहे हैं।

विवादित नक्शे को हटाने पर बढ़ी चर्चाएं
नेपाल सरकार का कहना है कि समय-समय पर सिक्कों और नोटों के डिजाइन में बदलाव करना एक सामान्य प्रक्रिया है। अधिकारियों के अनुसार, नए सिक्के का आकार छोटा किया गया है, इसलिए पहले वाला विस्तृत राजनीतिक नक्शा स्पष्ट रूप से अंकित करना संभव नहीं था। इसके बावजूद राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बदलाव ऐसे समय हुआ है जब भारत और नेपाल व्यापार, ऊर्जा, सीमा-पार कनेक्टिविटी और बुनियादी ढांचा परियोजनाओं में सहयोग बढ़ाने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। ऐसे में विवादित नक्शे को हटाना दोनों देशों के बीच विश्वास बहाली की दिशा में सकारात्मक संकेत माना जा रहा है।

सीमा विवाद पर नेपाल का आधिकारिक रुख कायम
हालांकि नए सिक्के से विवादित नक्शा हटाया गया है, लेकिन नेपाल ने सीमा विवाद पर अपना आधिकारिक रुख नहीं बदला है। नेपाल अब भी लिम्पियाधुरा, लिपुलेख और कालापानी को लेकर अपने दावे पर कायम है। भारत पहले भी स्पष्ट कर चुका है कि केवल नक्शे में बदलाव करने से वास्तविक सीमा की स्थिति नहीं बदलती। विदेश मंत्रालय ने उस समय भी कहा था कि एकतरफा मानचित्र जारी करने से ऐतिहासिक और कानूनी तथ्य नहीं बदलते। इसलिए सिक्के के डिजाइन में बदलाव को सीमा विवाद के समाधान के रूप में नहीं देखा जा रहा, बल्कि इसे प्रतीकात्मक और व्यावहारिक निर्णय माना जा रहा है।
घर गुम्बा मठ की तस्वीर बनेगी नई पहचान
नए एक रुपये के सिक्के की सबसे बड़ी विशेषता यह होगी कि उसके पिछले हिस्से पर अब नेपाल के प्रसिद्ध बौद्ध धरोहर स्थल लो घ्याकर मठ (घर गुम्बा) की तस्वीर अंकित की जाएगी। यह ऐतिहासिक मठ नेपाल के मुस्टांग जिले के मरांग गांव में स्थित है और इसे देश के सबसे प्राचीन बौद्ध मठों में गिना जाता है। माना जाता है कि इसका निर्माण आठवीं या नौवीं शताब्दी में हुआ था। धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यह मठ नेपाल की महत्वपूर्ण विरासत का हिस्सा है। सरकार का मानना है कि इस तरह के सांस्कृतिक प्रतीकों को सिक्कों पर स्थान देने से देश की ऐतिहासिक पहचान को बढ़ावा मिलेगा।
नेपाल राष्ट्र बैंक ने बताई बदलाव की वजह
नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) के अनुसार, सिक्कों के नए डिजाइन का उद्देश्य उन्हें आधुनिक बनाना और उत्पादन प्रक्रिया को अधिक प्रभावी बनाना है। केंद्रीय बैंक के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने बताया कि सिक्कों का आकार छोटा और वजन कम किया जा रहा है ताकि उनकी निर्माण लागत घटे और उन्हें लंबे समय तक उपयोग में लाया जा सके। बैंक का कहना है कि यह निर्णय पूरी तरह तकनीकी आवश्यकताओं पर आधारित है और इसका राजनीतिक विवादों से कोई सीधा संबंध नहीं है।
सिक्कों का वजन, आकार और धातु भी बदली जाएगी
नए मानकों के अनुसार एक रुपये के सिक्के का वजन 4 ग्राम से घटाकर 3.2 ग्राम किया जाएगा, जबकि दो रुपये के सिक्के का वजन 5 ग्राम से कम होकर 3.8 ग्राम रह जाएगा। इसके अलावा अब ये सिक्के पहले की मिश्रित धातु के बजाय स्टील से बनाए जाएंगे। इससे उनका रंग पीलेपन की जगह स्टील जैसा सफेद दिखाई देगा। अधिकारियों का कहना है कि छोटे आकार के कारण विस्तृत राजनीतिक नक्शा उकेरना तकनीकी रूप से संभव नहीं था, इसलिए डिजाइन में बदलाव करना आवश्यक हो गया।
नई बालेन शाह सरकार का विकास पर फोकस
नेपाल में इस वर्ष हुए आम चुनाव के बाद 36 वर्षीय बलेन्द्र ‘बालेन’ शाह ने प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली। उनकी पार्टी राष्ट्रीय स्वतन्त्र पार्टी ने चुनाव में जीत हासिल कर सरकार बनाई। सत्ता संभालने के बाद बालेन शाह ने स्पष्ट किया कि उनकी सरकार विदेश नीति में अनावश्यक टकराव से बचते हुए आर्थिक विकास, निवेश और रोजगार सृजन को प्राथमिकता देगी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय हितों की रक्षा करते हुए पड़ोसी देशों के साथ व्यावहारिक और संतुलित संबंध बनाए रखना सरकार का लक्ष्य है।
भारत-नेपाल संबंधों में नई संभावनाएं
विश्लेषकों का मानना है कि नई सरकार भारत के साथ रिश्तों को अधिक व्यावहारिक आधार पर आगे बढ़ाना चाहती है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी उन पहले वैश्विक नेताओं में शामिल थे जिन्होंने बालेन शाह को प्रधानमंत्री बनने पर बधाई दी थी। इसे दोनों देशों के बीच सकारात्मक संवाद का संकेत माना गया। वर्तमान में दोनों देश ऊर्जा व्यापार, जलविद्युत परियोजनाओं, सड़क और रेल कनेक्टिविटी, सीमा-पार बुनियादी ढांचे और निवेश जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर काम कर रहे हैं। ऐसे माहौल में नए सिक्के से विवादित नक्शा हटाया जाना भले ही तकनीकी कारणों से बताया जा रहा हो, लेकिन इसे भारत-नेपाल संबंधों में भरोसा मजबूत करने वाले एक सकारात्मक संकेत के रूप में भी देखा जा रहा है।












