Parliament Session : संसद भवन में सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों के बीच चला आ रहा गतिरोध लगातार चौथे दिन भी पूरी तरह बरकरार रहा। शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की जिद पर अड़े विपक्ष ने गुरुवार को संसद की कार्यवाही शुरू होते ही लोकसभा और राज्यसभा, दोनों ही सदनों में जोरदार हंगामा और शोर-शराबा शुरू कर दिया। सदन के भीतर मचे इस भारी बवाल और हंगामे के कारण दोनों सदनों की कार्यवाही को पहले दोपहर 12 बजे तक और स्थिति नियंत्रित न होने पर दोपहर 2 बजे तक के लिए बार-बार स्थगित करना पड़ा।

किरेन रिजिजू का बयान, विपक्ष लगा रहा है जानबूझकर शर्तें
संसद परिसर में मीडिया से मुखातिब होते हुए केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष के रवैये पर तीखी नाराजगी जताई। उन्होंने दो टूक शब्दों में कहा कि सरकार नीट (NEET) के संवेदनशील मुद्दे पर दोनों सदनों में विस्तार से चर्चा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है, लेकिन विपक्ष अनुचित पूर्व शर्तें थोपकर इस महत्वपूर्ण चर्चा को जानबूझकर बाधित कर रहा है। रिजिजू ने कहा कि देशहित और छात्रहित से जुड़े मामलों पर राजनीति नहीं होनी चाहिए, बल्कि सदन में खुलकर बात होनी चाहिए।

विपक्ष के साथ बातचीत की उम्मीद और फास्ट ट्रैक कोर्ट की पहल
संसदीय कार्य मंत्री ने आगे बताया कि मल्लिकार्जुन खड़गे और अन्य विपक्षी नेताओं के साथ हुई कल की बैठक के बाद सरकार को पूरी उम्मीद जगी थी कि आज सदन में सुचारू रूप से चर्चा हो सकेगी, लेकिन कांग्रेस पार्टी ने अचानक नई शर्त सामने रख दी। उन्होंने स्पष्ट किया कि चर्चा का समय और रूपरेखा आपसी सहमति से तय हो सकती है, मगर पूर्व शर्त लगाना कतई स्वीकार्य नहीं है। इस बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक मामलों के त्वरित निस्तारण के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट के गठन का बड़ा ऐलान किया है।
मल्लिकार्जुन खरगे का पलटवार, पीएम के बयान को बताया उकसाने वाला
दूसरी तरफ, राज्यसभा में विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा दिए गए बयान पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। खरगे ने पीएम के इस बयान को सीधे तौर पर ‘उकसाने वाला बयान’ करार दिया और मांग की कि सरकार को इस पूरे परीक्षा घोटाले की नैतिक जिम्मेदारी खुद लेनी चाहिए। उन्होंने कड़े शब्दों में दोहराया कि जब तक केंद्रीय शिक्षा मंत्री अपने पद से इस्तीफा नहीं दे देते, तब तक विपक्षी दल संसद के भीतर किसी भी स्थिति में चर्चा के लिए तैयार नहीं होंगे।
प्रियंका गांधी ने सरकार पर उठाए गंभीर सवाल और मांगा नेतृत्व
संसद भवन के बाहर मीडिया से बातचीत के दौरान कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा ने सरकार के कामकाज और कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री देश के सर्वोच्च नेता हैं और संकट की इस घड़ी में उन्हें आगे आकर वास्तविक नेतृत्व क्षमता दिखानी चाहिए। आज देश का युवा और छात्र सड़कों पर उतरने को मजबूर है क्योंकि उनका मौजूदा परीक्षा प्रणाली से पूरी तरह भरोसा उठ चुका है। समाधान तभी संभव है जब सरकार छात्रों की मांगों को माने।
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