NEET Paper Leak : नीट पेपर लीक मामले में जांच और कानूनी कार्रवाई को तेज करने के लिए केंद्र सरकार महत्वपूर्ण कदम उठाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों के अनुसार, सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत दर्ज मामलों की शीघ्र सुनवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से चार राज्यों में विशेष फास्ट ट्रैक अदालतें स्थापित करने का प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है। इस पहल का उद्देश्य परीक्षा से जुड़े गंभीर अपराधों में न्यायिक प्रक्रिया को तेज करना और दोषियों के खिलाफ समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करना है।

विशेष अदालतों में होगी त्वरित सुनवाई
जानकारी के अनुसार, केंद्र सरकार जल्द ही संबंधित राज्य सरकारों और उच्च न्यायालयों से विशेष अदालतों के गठन पर विचार करने का अनुरोध कर सकती है। प्रस्तावित फास्ट ट्रैक अदालतों में सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत दर्ज मामलों की नियमित और प्राथमिकता के आधार पर सुनवाई की जाएगी। माना जा रहा है कि इन अदालतों में मामलों की दैनिक सुनवाई होने से लंबित मामलों का निपटारा अपेक्षाकृत कम समय में संभव हो सकेगा।

चार हाईकोर्ट क्षेत्रों में बन सकती हैं अदालतें
सूत्रों के मुताबिक, प्रस्तावित विशेष अदालतें बॉम्बे हाईकोर्ट, कलकत्ता हाईकोर्ट, दिल्ली हाईकोर्ट और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र में स्थापित की जा सकती हैं। इन क्षेत्रों का चयन इसलिए किया गया है क्योंकि वर्तमान में सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम के तहत दर्ज प्रमुख मामलों का संबंध इन्हीं न्यायिक क्षेत्रों से बताया जा रहा है। हालांकि, अदालतों के गठन को लेकर अंतिम निर्णय संबंधित प्रक्रियाओं के पूरा होने के बाद ही लिया जाएगा।
मौजूदा मामलों की स्थिति
सूत्रों के अनुसार, नीट पेपर लीक से जुड़े वर्तमान मामलों में सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत कुल चार मामले दर्ज किए गए हैं। इनमें से दो मामले बॉम्बे हाईकोर्ट के अधिकार क्षेत्र से संबंधित हैं, जबकि शेष मामले दिल्ली, कलकत्ता और मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के न्यायिक क्षेत्रों में आते हैं। इन मामलों की जांच संबंधित एजेंसियां कर रही हैं और कानूनी प्रक्रिया जारी है।
क्या है सार्वजनिक परीक्षा अधिनियम, 2024?
सार्वजनिक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 को 21 जून 2024 से लागू किया गया था। इस कानून का उद्देश्य भर्ती और प्रवेश परीक्षाओं में होने वाली अनियमितताओं पर रोक लगाना है। इसमें पेपर लीक, प्रश्नपत्रों की अवैध बिक्री, नकल, संगठित परीक्षा धोखाधड़ी तथा अन्य अनुचित गतिविधियों के खिलाफ सख्त कानूनी प्रावधान किए गए हैं। सरकार का उद्देश्य परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता को मजबूत करना है।
किन परीक्षाओं पर लागू होता है यह कानून?
यह अधिनियम केंद्र सरकार और उसकी विभिन्न एजेंसियों द्वारा आयोजित कई प्रमुख परीक्षाओं पर लागू होता है। इनमें संघ लोक सेवा आयोग (UPSC), कर्मचारी चयन आयोग (SSC), रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), बैंकिंग कार्मिक चयन संस्थान (IBPS), राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) तथा केंद्र सरकार के मंत्रालयों, विभागों और अधिसूचित संस्थानों द्वारा आयोजित भर्ती एवं प्रवेश परीक्षाएं शामिल हैं। इन सभी परीक्षाओं में किसी भी प्रकार की अनुचित गतिविधि पाए जाने पर इसी कानून के तहत कार्रवाई की जा सकती है।
NEET परीक्षा भी अधिनियम के दायरे में
राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) द्वारा आयोजित NEET जैसी प्रवेश परीक्षाएं भी इस अधिनियम के अंतर्गत आती हैं। इसलिए यदि इन परीक्षाओं में पेपर लीक, नकल या अन्य अनियमितताओं के मामले सामने आते हैं, तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ इसी कानून के प्रावधानों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि विशेष फास्ट ट्रैक अदालतों का गठन होता है, तो परीक्षा घोटालों से जुड़े मामलों की सुनवाई में तेजी आएगी और दोषियों के खिलाफ कानूनी प्रक्रिया अधिक प्रभावी तथा समयबद्ध तरीके से पूरी की जा सकेगी।
CWG 2026: ओपनिंग सेरेमनी से पहले भारत का पहला पदक पक्का, लवलीना बोरगोहेन ने रचा इतिहास











