CG Child Labour: छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले में बाल मजदूरी का एक गंभीर मामला सामने आया है। रामानुजनगर विकासखंड के रामानुजनगर और नमदगिरी चौक क्षेत्र में स्कूल जाने की उम्र के बच्चों से धान की रोपाई का काम कराया जा रहा था। मामले की जानकारी चाइल्ड हेल्पलाइन के टोल-फ्री नंबर पर शिकायत मिलने के बाद प्रशासन तक पहुंची। सूचना मिलते ही जिला बाल संरक्षण इकाई, श्रम विभाग और अन्य संबंधित विभागों की संयुक्त टीम ने मौके पर पहुंचकर कार्रवाई की। अभियान के दौरान खेतों में काम कर रहे बच्चों को वहां से सुरक्षित बाहर निकालकर बाल संरक्षण की प्रक्रिया शुरू की गई।

संयुक्त अभियान में 23 बच्चों का किया गया रेस्क्यू
अधिकारियों के अनुसार, पिछले दो दिनों में चलाए गए विशेष अभियान के दौरान कुल 23 बच्चों को बाल मजदूरी से मुक्त कराया गया। प्रारंभिक जांच में पता चला कि इन बच्चों को अलग-अलग गांवों से पिकअप वाहनों में बैठाकर खेतों तक लाया जा रहा था, जहां उनसे धान की रोपाई कराई जा रही थी। शिकायत मिलने के बाद टीम ने तत्काल मौके पर पहुंचकर बच्चों को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया और उन्हें जिला बाल संरक्षण कार्यालय पहुंचाया, जहां आगे की कानूनी और सामाजिक प्रक्रिया पूरी की गई।

स्कूल जाने वाले बच्चे कर रहे थे खेतों में मजदूरी
जांच के दौरान यह तथ्य सामने आया कि रेस्क्यू किए गए अधिकांश बच्चे छठवीं से नौवीं कक्षा तक के विद्यार्थी हैं। यानी वे ऐसी उम्र में हैं, जब उन्हें नियमित रूप से विद्यालय जाकर शिक्षा प्राप्त करनी चाहिए। इसके बावजूद उनसे खेतों में मजदूरी कराई जा रही थी। अधिकारियों ने इसे गंभीर मामला बताते हुए कहा कि बच्चों से इस प्रकार श्रम कराना न केवल उनके शिक्षा के अधिकार का उल्लंघन है, बल्कि बाल संरक्षण संबंधी कानूनों के भी विपरीत है।
बाल कल्याण समिति के समक्ष पेश किए गए बच्चे
रेस्क्यू के बाद सभी बच्चों को बाल कल्याण समिति (सीडब्ल्यूसी) के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति द्वारा प्रत्येक बच्चे की पारिवारिक और सामाजिक स्थिति का आकलन किया जा रहा है, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि भविष्य में उन्हें दोबारा बाल मजदूरी का शिकार न होना पड़े। संबंधित विभाग बच्चों की शिक्षा, सुरक्षा और पुनर्वास से जुड़े आवश्यक कदम भी उठा रहे हैं, जिससे वे सामान्य जीवन और पढ़ाई की ओर लौट सकें।
परिजनों को दी गई शिक्षा का महत्व समझाने की सलाह
जिला प्रशासन ने बच्चों के अभिभावकों और परिजनों को बुलाकर उन्हें जागरूक किया। अधिकारियों ने समझाया कि बच्चों को मजदूरी में लगाने के बजाय नियमित रूप से स्कूल भेजना उनकी जिम्मेदारी है। प्रशासन ने कहा कि शिक्षा ही बच्चों के उज्ज्वल भविष्य की सबसे मजबूत नींव है और कम उम्र में मजदूरी कराने से उनका शारीरिक, मानसिक और शैक्षणिक विकास प्रभावित होता है। परिजनों से यह भी अपील की गई कि वे भविष्य में बच्चों को किसी भी प्रकार के श्रम में शामिल न करें।
रोपा सीजन में बढ़ाई गई प्रशासन की निगरानी
जिला बाल संरक्षण इकाई के अधिकारियों ने बताया कि धान रोपाई के मौसम में दूसरे गांवों से बच्चों को खेतों में काम कराने की शिकायतें लगातार मिल रही हैं। इसी कारण प्रशासन ने इस अवधि में विशेष निगरानी अभियान शुरू किया है। जहां भी बाल मजदूरी की सूचना प्राप्त होती है, वहां तत्काल संयुक्त टीम भेजकर कार्रवाई की जा रही है। अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के मामलों पर लगातार नजर रखी जाएगी ताकि बच्चों के अधिकारों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
बाल मजदूरी के खिलाफ अभियान रहेगा जारी
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि जिले में बाल मजदूरी के खिलाफ अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा। इसके साथ ही गांवों और समुदायों में जागरूकता कार्यक्रम भी चलाए जाएंगे, ताकि लोग बाल श्रम के दुष्परिणामों को समझ सकें। अधिकारियों ने दोहराया कि बच्चों का स्थान खेतों, फैक्ट्रियों या अन्य कार्यस्थलों पर नहीं, बल्कि स्कूलों में है। शिक्षा के माध्यम से ही बच्चों का सर्वांगीण विकास संभव है और उन्हें बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर किया जा सकता है। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से भी अपील की है कि यदि कहीं बाल मजदूरी होती दिखाई दे, तो उसकी सूचना तुरंत संबंधित विभाग या चाइल्ड हेल्पलाइन को दें, ताकि समय पर प्रभावी कार्रवाई की जा सके।
Read More : Bhupesh Baghel Warning: भूपेश बघेल बोले, बीजेपी कुछ महीनों की मेहमान, पुलिस अधिकारी सावधानी से काम करें











