Jashpur News: छत्तीसगढ़ के जशपुरनगर में शुक्रवार को नगर पालिका परिषद के मुख्य नगर पालिका अधिकारी (सीएमओ) के कार्यालय को कुछ समय के लिए सील किए जाने की कार्रवाई चर्चा का विषय बन गई। जिला प्रशासन की टीम ने तहसीलदार, नायब तहसीलदार और राजस्व विभाग के अधिकारियों की मौजूदगी में सीएमओ योगेश्वर उपाध्याय के चेंबर के मुख्य प्रवेश द्वार पर सील लगाकर नोटिस चस्पा किया। इस अचानक हुई कार्रवाई से नगर पालिका कर्मचारियों और स्थानीय लोगों के बीच विभिन्न तरह की चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होने के बाद कुछ ही देर में कार्यालय को दोबारा खोल दिया गया।

विकास कार्यों के निरीक्षण का पहले से तय था कार्यक्रम
जानकारी के अनुसार, जिला कलेक्टर रोहित व्यास के साथ शहर में चल रहे विभिन्न विकास कार्यों का निरीक्षण शुक्रवार को प्रस्तावित था। प्रशासनिक सूत्रों के मुताबिक, इस निरीक्षण का कार्यक्रम लगभग एक सप्ताह पहले ही निर्धारित कर दिया गया था। तय समय पर जनप्रतिनिधि और संबंधित विभागों के अधिकारी निरीक्षण स्थल पर पहुंच गए, लेकिन मुख्य नगर पालिका अधिकारी मौके पर उपस्थित नहीं थे। उनकी अनुपस्थिति को लेकर मौके पर मौजूद अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के बीच चर्चा शुरू हो गई।

नगर पालिका अध्यक्ष ने कलेक्टर के समक्ष जताई नाराजगी
निरीक्षण के दौरान नगर पालिका परिषद के अध्यक्ष अरविन्द भगत ने सीएमओ की अनुपस्थिति पर नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने कलेक्टर को बताया कि शहर में करोड़ों रुपये की लागत से कई विकास परियोजनाएं चल रही हैं और ऐसे महत्वपूर्ण निरीक्षण में संबंधित अधिकारी का मौजूद रहना आवश्यक था। उनका कहना था कि विकास कार्यों की प्रगति की समीक्षा के दौरान जिम्मेदार अधिकारी की अनुपस्थिति गंभीर विषय है।
कलेक्टर ने फोन पर मांगा स्पष्टीकरण
सीएमओ की अनुपस्थिति की जानकारी मिलने के बाद कलेक्टर रोहित व्यास ने तत्काल मोबाइल फोन के माध्यम से उनसे संपर्क किया और अनुपस्थित रहने का कारण पूछा। इस पर योगेश्वर उपाध्याय ने बताया कि वह पिछले दो दिनों से बिलासपुर में एक न्यायालयीन मामले के सिलसिले में गए हुए थे। उन्होंने यह भी बताया कि शुक्रवार को वे अंबिकापुर स्थित संयुक्त संचालक कार्यालय में आयोजित विभागीय बैठक में शामिल होने पहुंचे हैं और उसी कारण निरीक्षण कार्यक्रम में उपस्थित नहीं हो सके।
सीएमओ ने बताया अपना पक्ष
मुख्य नगर पालिका अधिकारी योगेश्वर उपाध्याय ने स्पष्ट किया कि उनकी अनुपस्थिति पूर्व निर्धारित शासकीय और न्यायालयीन कार्यों के कारण थी। उनके अनुसार, पहले उन्हें हाईकोर्ट से जुड़े एक मामले में बिलासपुर जाना पड़ा और इसके बाद विभागीय बैठक में भाग लेने के लिए अंबिकापुर पहुंचना आवश्यक था। उन्होंने यह भी कहा कि सभी निर्धारित कार्य पूरे करने के बाद वह उसी दिन शाम तक जशपुर लौटने वाले थे।
प्रशासन ने कुछ समय के लिए सील किया कार्यालय
बताया जा रहा है कि कलेक्टर सीएमओ द्वारा दिए गए स्पष्टीकरण से पूरी तरह संतुष्ट नहीं हुए। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारियों को सीएमओ कार्यालय पर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए। निर्देश मिलते ही राजस्व विभाग की टीम नगर पालिका कार्यालय पहुंची और सीएमओ के चेंबर को औपचारिक रूप से सील कर दिया। हालांकि, यह कार्रवाई अल्प समय के लिए रही और आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद सील हटाकर कार्यालय को पुनः खोल दिया गया।
नगर पालिका अध्यक्ष ने विकास कार्यों पर दिया जोर
नगर पालिका अध्यक्ष अरविन्द भगत ने कहा कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में जशपुर शहर के विकास के लिए पिछले ढाई वर्षों में करोड़ों रुपये की विभिन्न योजनाएं स्वीकृत हुई हैं। उनका कहना है कि इन परियोजनाओं को निर्धारित समय सीमा और गुणवत्ता के साथ पूरा कराना नगर पालिका प्रशासन की जिम्मेदारी है। उन्होंने उम्मीद जताई कि प्रशासन की सख्ती के बाद विकास कार्यों की गति और निगरानी दोनों में सुधार देखने को मिलेगा।
जिम्मेदारियों के प्रति गंभीरता बढ़ाने पर प्रशासन का फोकस
इस पूरे घटनाक्रम के बाद प्रशासनिक हलकों में जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही को लेकर चर्चा तेज हो गई है। जिला प्रशासन का उद्देश्य विकास कार्यों की नियमित निगरानी सुनिश्चित करना और अधिकारियों की जिम्मेदारियों के प्रति गंभीरता बनाए रखना है। अधिकारियों का मानना है कि समयबद्ध निरीक्षण, बेहतर समन्वय और जवाबदेही के माध्यम से शहर में चल रही विकास परियोजनाओं को अधिक प्रभावी ढंग से पूरा किया जा सकेगा।
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