SAARC Revival: मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू ने दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) को फिर से सक्रिय करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि उनका देश इस दिशा में हरसंभव सहयोग देने के लिए तैयार है। रविवार को मालदीव के 61वें स्वतंत्रता दिवस समारोह को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि पिछले कई वर्षों से निष्क्रिय पड़े इस क्षेत्रीय संगठन को दोबारा प्रभावी बनाने का समय आ गया है। उनके अनुसार दक्षिण एशिया में शांति, स्थिरता और विकास के लिए सदस्य देशों के बीच नियमित संवाद और सहयोग बेहद आवश्यक है।

सार्क को बताया महत्वपूर्ण क्षेत्रीय मंच
अपने संबोधन में राष्ट्रपति मुइज्जू ने सार्क को दक्षिण एशिया का एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन बताया। उन्होंने कहा कि इस मंच ने सदस्य देशों के बीच सहयोग बढ़ाने में अहम भूमिका निभाई है, लेकिन पिछले लगभग नौ वर्षों से इसकी गतिविधियां लगभग ठप पड़ी हुई हैं। उन्होंने चिंता जताई कि क्षेत्रीय स्तर पर संवाद रुकने से सहयोग की संभावनाओं पर भी असर पड़ा है। मुइज्जू ने कहा कि अब समय आ गया है कि सभी सदस्य देश मतभेदों को पीछे छोड़कर साझा हितों पर आगे बढ़ें।

2014 के बाद नहीं हुआ कोई शिखर सम्मेलन
राष्ट्रपति ने याद दिलाया कि सार्क का 18वां शिखर सम्मेलन 26 और 27 नवंबर 2014 को नेपाल की राजधानी काठमांडू में आयोजित हुआ था। उसके बाद से संगठन का कोई शिखर सम्मेलन आयोजित नहीं हो सका। लगातार बैठकों के अभाव में संगठन की गतिविधियां प्रभावित हुई हैं और कई क्षेत्रीय पहलें आगे नहीं बढ़ पाईं। उन्होंने कहा कि नियमित संवाद किसी भी क्षेत्रीय संगठन की मजबूती के लिए आवश्यक होता है।
2016 का सम्मेलन क्यों नहीं हो पाया
विदेश मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2016 में पाकिस्तान की मेजबानी में प्रस्तावित 19वां सार्क शिखर सम्मेलन आयोजित नहीं हो सका। सदस्य देशों के बीच सहमति नहीं बनने और सीमा-पार आतंकवाद से जुड़ी चिंताओं के कारण सम्मेलन स्थगित हो गया। इसके बाद से सार्क स्तर पर उच्चस्तरीय बैठकों का सिलसिला भी रुक गया। यही कारण है कि संगठन लंबे समय से निष्क्रिय स्थिति में बना हुआ है।
शांतिपूर्ण संवाद की वकालत
मोहम्मद मुइज्जू ने कहा कि मालदीव हमेशा विवादों के शांतिपूर्ण समाधान और बातचीत के माध्यम से समस्याओं को सुलझाने का समर्थक रहा है। उनके अनुसार किसी भी क्षेत्र में स्थायी शांति तभी संभव है जब सभी पक्ष आपसी सम्मान और विश्वास के साथ संवाद करें। उन्होंने कहा कि दक्षिण एशिया के देशों के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए सार्क को दोबारा सक्रिय करना बेहद जरूरी है।
मध्यस्थ की भूमिका निभाने की पेशकश
राष्ट्रपति मुइज्जू ने कहा कि यदि सदस्य देशों के बीच बातचीत शुरू करने में किसी प्रकार की कठिनाई आती है, तो मालदीव मध्यस्थ की भूमिका निभाने के लिए तैयार है। उन्होंने सभी देशों से क्षेत्रीय विकास, स्थिरता और सहयोग को प्राथमिकता देने की अपील की। उनका कहना था कि मालदीव सकारात्मक पहल करते हुए संवाद की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में योगदान देना चाहता है, ताकि क्षेत्रीय सहयोग को नई गति मिल सके।
सार्क का इतिहास और उद्देश्य
दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संगठन (सार्क) की स्थापना 8 दिसंबर 1985 को बांग्लादेश की राजधानी ढाका में सार्क चार्टर पर हस्ताक्षर के साथ हुई थी। इसके बाद 17 जनवरी 1987 को नेपाल की राजधानी काठमांडू में संगठन के स्थायी सचिवालय की स्थापना की गई। इस संगठन में भारत, पाकिस्तान, बांग्लादेश, नेपाल, भूटान, श्रीलंका, मालदीव और अफगानिस्तान सदस्य देश हैं। सार्क का मूल उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना है।
दक्षिण एशिया के लिए सार्क का महत्व
सार्क दुनिया के सबसे अधिक आबादी वाले क्षेत्रीय संगठनों में से एक है। इसके सदस्य देशों में लगभग 1.9 अरब लोग निवास करते हैं, जो विश्व की कुल आबादी का लगभग 24 प्रतिशत हिस्सा हैं। इसके अलावा सदस्य देशों की संयुक्त अर्थव्यवस्था का आकार लगभग पांच हजार अरब डॉलर के आसपास माना जाता है। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सार्क फिर से सक्रिय होता है और नियमित बैठकों का सिलसिला शुरू होता है, तो क्षेत्रीय व्यापार, आर्थिक विकास, संपर्क, शिक्षा, स्वास्थ्य और आपसी सहयोग को नई दिशा मिल सकती है।
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