PoK Election Violence: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में तथाकथित विधानसभा चुनाव के पहले चरण के लिए सोमवार, 27 जुलाई को मतदान कराया गया। मतदान के दौरान कई क्षेत्रों से हिंसा, झड़पों, चुनावी अनियमितताओं और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठने की खबरें सामने आईं। विभिन्न राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच टकराव हुआ, जबकि कुछ स्थानों पर सुरक्षा बलों पर प्रदर्शनकारियों के खिलाफ बल प्रयोग के आरोप भी लगे। इन घटनाओं ने चुनाव प्रक्रिया की निष्पक्षता और सुरक्षा को लेकर नई बहस छेड़ दी है।

रावलाकोट में बहिष्कार और फायरिंग के आरोप
सूत्रों के अनुसार रावलाकोट क्षेत्र में बड़ी संख्या में लोगों ने चुनाव का बहिष्कार किया। इसी दौरान सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच तनाव बढ़ गया। आरोप है कि पाक रेंजर्स की फायरिंग में 19 प्रदर्शनकारियों की मौत हुई, जबकि कई दर्जन लोग घायल हुए। हालांकि इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। स्थानीय स्तर पर यह घटना चुनाव के दौरान सबसे गंभीर घटनाओं में गिनी जा रही है। इसके बाद चुनावी माहौल और अधिक तनावपूर्ण हो गया।

करीब 38 लाख मतदाता, तीन चरणों में चुनाव
पीओके की तथाकथित विधानसभा के चुनाव में लगभग 38 लाख मतदाता मतदान के पात्र बताए जा रहे हैं। इस बार पहली बार पूरे चुनाव को एक दिन में कराने के बजाय तीन चरणों में आयोजित किया जा रहा है। पिछले कुछ सप्ताह से जारी विरोध प्रदर्शन, राजनीतिक तनाव और हिंसक घटनाओं के कारण प्रशासन ने सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किया था। पहले चरण का मतदान मुख्य रूप से मीरपुर डिवीजन में कड़ी सुरक्षा के बीच संपन्न कराया गया।
भींबर में मतपेटी जलाने का मामला
भींबर जिले में चुनाव के दौरान सबसे चर्चित घटना सामने आई। यहां एक मतदान केंद्र पर विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ताओं के बीच विवाद हिंसक झड़प में बदल गया। पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार एक मतपेटी कथित रूप से छीन ली गई और बाद में उसमें आग लगा दी गई, जिससे उसके भीतर मौजूद मतपत्र जल गए। चुनाव अधिकारियों ने कहा कि पूरे मामले की जांच की जाएगी और जांच रिपोर्ट के आधार पर यह निर्णय लिया जाएगा कि संबंधित मतदान केंद्र पर दोबारा मतदान कराया जाएगा या नहीं।
कोटली में पीपीपी कार्यकर्ता की मौत पर विवाद
कोटली जिले के नकयाल क्षेत्र से भी हिंसा की खबर सामने आई। पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी (पीपीपी) ने दावा किया कि उसके कार्यकर्ता मुख्तार यूनुस की झड़प के दौरान मौत हो गई। पार्टी ने इस घटना के लिए अपने राजनीतिक विरोधियों को जिम्मेदार ठहराया, जबकि दूसरी ओर से इन आरोपों को खारिज कर दिया गया। पीपीपी ने चुनाव आयोग में शिकायत दर्ज कराते हुए आरोप लगाया कि एलए-1 मीरपुर सीट पर हथियारबंद लोगों ने मतगणना प्रक्रिया में हस्तक्षेप किया और चुनाव को प्रभावित करने की कोशिश की।
मतगणना में हस्तक्षेप के आरोप
पीपीपी का कहना है कि यूनियन काउंसिल ओनाह के कई मतदान केंद्रों पर हथियारबंद लोग जबरन घुस गए और मतगणना में बाधा डाली। पार्टी ने चुनाव आयोग से तत्काल कार्रवाई करने, चुनाव सामग्री की सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती की मांग की। इन आरोपों के बाद चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर भी सवाल उठने लगे हैं।
जेएएसी ने सुरक्षा बलों पर लगाए गंभीर आरोप
जम्मू-कश्मीर जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) ने आरोप लगाया कि रावलाकोट में सुरक्षा बलों ने प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर गोलीबारी की। संगठन का कहना है कि लोग मुजफ्फराबाद की ओर प्रस्तावित “मुजफ्फराबाद चलो” मार्च की तैयारी कर रहे थे, तभी बल प्रयोग किया गया। संगठन ने सवाल उठाया कि हिंसा और तनावपूर्ण हालात के बीच चुनाव को लोकतांत्रिक प्रक्रिया कैसे माना जा सकता है।
दो महीने से जारी विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि
पीओके में पिछले करीब दो महीनों से शासन व्यवस्था, आर्थिक समस्याओं और राजनीतिक सुधारों को लेकर लगातार विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। इन आंदोलनों का नेतृत्व जेएएसी कर रहा था। संगठन की प्रमुख मांगों में 1947 के बाद पीओके में बसाए गए शरणार्थियों के लिए विधानसभा में आरक्षित 12 सीटों को समाप्त करना शामिल था। हाल ही में बढ़ती अशांति के बाद पाकिस्तान सरकार ने इस संगठन पर प्रतिबंध लगा दिया था।
भारत ने दोहराया अपना रुख
भारत लगातार यह स्पष्ट करता रहा है कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख का पूरा क्षेत्र उसका अभिन्न और अविभाज्य हिस्सा है तथा पाकिस्तान का कब्जा अवैध है। हाल के घटनाक्रम पर भारत ने कहा था कि पीओके में चल रहे विरोध प्रदर्शन वहां लंबे समय से जारी प्रशासनिक दमन और व्यवस्थित शोषण का परिणाम हैं। भारत ने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कथित पुलिस कार्रवाई और बल प्रयोग की खबरों पर भी चिंता जताई थी। मौजूदा घटनाओं ने एक बार फिर पीओके की स्थिति और वहां की राजनीतिक परिस्थितियों को अंतरराष्ट्रीय चर्चा का विषय बना दिया है।
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