Ganesh Chaturthi 2026: बप्पा को तुलसी क्यों नहीं चढ़ती? जानें गणेश-तुलसी की पौराणिक कथा

गणेश चतुर्थी पर बप्पा की पूजा में कई चीजों का विशेष महत्व माना जाता है, लेकिन तुलसी दल चढ़ाने की मनाही बताई जाती है। इसके पीछे भगवान गणेश और माता तुलसी से जुड़ी एक प्रसिद्ध पौराणिक कथा है। आखिर तुलसी ने गणेश जी को कौन सा श्राप दिया था और यह परंपरा कैसे बनी?

Ganesh Chaturthi 2026 : गणेश चतुर्थी का पर्व भगवान गणेश को समर्पित प्रमुख हिंदू त्योहारों में शामिल है। साल 2026 में गणेश चतुर्थी का शुभारंभ 14 सितंबर से होगा। इस अवसर पर भक्त भगवान गणेश की प्रतिमा स्थापित कर विधि-विधान से पूजा-अर्चना करते हैं। गणपति को दूर्वा, मोदक और अन्य प्रिय वस्तुएं अर्पित करने की परंपरा है। हालांकि, एक ऐसी पवित्र वस्तु भी है जिसका इस्तेमाल गणेश पूजा में सामान्य तौर पर नहीं किया जाता और वह है तुलसी।

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तुलसी को गणेश पूजा में क्यों नहीं चढ़ाते

हिंदू धर्म में तुलसी के पौधे को बेहद पवित्र माना गया है। भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी दल का विशेष महत्व है। इसके बावजूद भगवान गणेश को तुलसी अर्पित नहीं की जाती। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसके पीछे भगवान गणेश और माता तुलसी से जुड़ी एक प्राचीन पौराणिक कथा बताई जाती है। इसी कथा के कारण गणेश पूजा में तुलसी का प्रयोग वर्जित माना जाता है।

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गणेश जी के सामने तुलसी ने रखा था विवाह प्रस्ताव

पौराणिक कथा के अनुसार, एक समय भगवान गणेश गंगा नदी के किनारे तपस्या कर रहे थे। उसी दौरान वहां से माता तुलसी का गुजरना हुआ। भगवान गणेश को तपस्या में लीन देखकर तुलसी उनसे प्रभावित हो गईं। उनके मन में गणेश जी से विवाह करने की इच्छा उत्पन्न हुई और उन्होंने भगवान गणेश के सामने विवाह का प्रस्ताव रख दिया।

विवाह से इनकार पर तुलसी ने दिया श्राप

कथा के अनुसार, भगवान गणेश ने तुलसी के प्रस्ताव को स्वीकार नहीं किया। उन्होंने बताया कि वह ब्रह्मचर्य का पालन कर रहे हैं और विवाह करने की इच्छा नहीं रखते। भगवान गणेश के इनकार से तुलसी देवी नाराज हो गईं। मान्यता है कि क्रोधित होकर उन्होंने गणेश जी को श्राप दिया कि उन्हें विवाह करना ही पड़ेगा। बाद में धार्मिक परंपराओं में गणेश जी के रिद्धि और सिद्धि के साथ विवाह का उल्लेख मिलता है।

गणेश जी ने भी तुलसी को दिया था श्राप

तुलसी के श्राप से भगवान गणेश भी अप्रसन्न हुए। कथा के अनुसार उन्होंने तुलसी को श्राप दिया कि उनका विवाह एक असुर से होगा। इस श्राप के बाद तुलसी को अपनी गलती का एहसास हुआ और उन्होंने भगवान गणेश से क्षमा मांगी। इसके बाद गणेश जी ने उन्हें एक विशेष वरदान प्रदान किया।

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भगवान विष्णु की प्रिय बनने का मिला वरदान

मान्यता के अनुसार, भगवान गणेश ने तुलसी को वरदान दिया कि वह भगवान विष्णु की प्रिय होंगी और संसार में एक पवित्र पौधे के रूप में पूजी जाएंगी। इसी कारण तुलसी का संबंध भगवान विष्णु की उपासना से विशेष रूप से जोड़ा जाता है। आज भी विष्णु और श्रीकृष्ण की पूजा में तुलसी दल चढ़ाने की परंपरा व्यापक रूप से प्रचलित है।

क्या हर गणेश पूजा में तुलसी पूरी तरह वर्जित है

लोकप्रिय धार्मिक परंपरा में भगवान गणेश को तुलसी अर्पित नहीं करने की मान्यता काफी प्रचलित है। ब्रह्मवैवर्त पुराण के गणेश खंड में तुलसी और गणेश से संबंधित श्राप की कथा का उल्लेख बताया जाता है। हालांकि, अलग-अलग धार्मिक परंपराओं में गणेश जी के विभिन्न स्वरूपों और पूजा विधियों को लेकर कुछ मतभेद भी मिलते हैं। सामान्य पूजा में तुलसी के बजाय दूर्वा को विशेष महत्व दिया जाता है।

गलती से तुलसी चढ़ जाए तो घबराने की जरूरत नहीं

यदि गणेश पूजा के दौरान भूलवश तुलसी भगवान गणेश को अर्पित हो जाए, तो इसे लेकर घबराने की आवश्यकता नहीं मानी जाती। धार्मिक मान्यता के अनुसार भक्त श्रद्धापूर्वक तुलसी को हटा सकते हैं और भगवान गणेश से क्षमा प्रार्थना कर सकते हैं। पूजा में भाव और श्रद्धा को महत्वपूर्ण माना गया है। इसलिए अनजाने में हुई ऐसी गलती को लेकर भयभीत होने के बजाय शांत मन से गणपति की आराधना करना उचित माना जाता है।

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Chandan Das

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