Amit Shah Case: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से संबंधित एक कथित आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के मामले में लद्दाख पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए जीरो एफआईआर दर्ज की है। पुलिस के अनुसार यह मामला सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर योगेश परमार के खिलाफ लेह पुलिस स्टेशन में दर्ज किया गया। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने प्रारंभिक जांच शुरू की और आवश्यक कानूनी प्रक्रिया अपनाई। अधिकारियों का कहना है कि मामले की आगे की जांच संबंधित क्षेत्राधिकार वाली पुलिस करेगी।

फेसबुक पर वीडियो लिंक साझा करने का आरोप
पुलिस शिकायत के अनुसार आरोपी पर आरोप है कि उसने अपने फेसबुक अकाउंट के माध्यम से एक वीडियो लिंक साझा किया। शिकायतकर्ता का दावा है कि वीडियो में गृह मंत्री अमित शाह के संबंध में कथित रूप से अपमानजनक और आपत्तिजनक टिप्पणियां की गई थीं। आरोप है कि वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से प्रसारित होने लगा, जिसके बाद संबंधित लोगों ने पुलिस से शिकायत कर कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने शिकायत को गंभीरता से लेते हुए तत्काल मामला दर्ज किया।

शिकायत में शांति और सौहार्द प्रभावित होने की आशंका
शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि इस प्रकार की सामग्री सार्वजनिक रूप से साझा किए जाने से समाज में तनाव और असंतोष की स्थिति उत्पन्न हो सकती है। शिकायत में कहा गया है कि ऐसे वीडियो विभिन्न वर्गों के बीच वैमनस्य बढ़ा सकते हैं और कानून-व्यवस्था पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकते हैं। साथ ही यह भी कहा गया कि इस तरह की सामग्री सामाजिक और सांप्रदायिक सौहार्द को नुकसान पहुंचा सकती है। इन्हीं आधारों पर मामले में कानूनी कार्रवाई की मांग की गई।
भारतीय न्याय संहिता की कई धाराओं में दर्ज हुआ मामला
पुलिस ने इस प्रकरण में भारतीय न्याय संहिता (BNS) की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया है। एफआईआर में धारा 197(1)(डी), धारा 352 और धारा 353(1) सहित अन्य प्रासंगिक प्रावधान शामिल किए गए हैं। पुलिस का कहना है कि इन धाराओं के तहत जांच के दौरान उपलब्ध साक्ष्यों और तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। किसी भी आरोपी की कानूनी जिम्मेदारी का अंतिम निर्धारण न्यायिक प्रक्रिया के बाद ही होगा।
देवराजा थाना भेजा गया जांच का जिम्मा
प्रारंभिक जांच के दौरान यह सामने आया कि कथित घटना का क्षेत्राधिकार कर्नाटक के मैसूर से जुड़ा हुआ है। इसी कारण जीरो एफआईआर दर्ज करने के बाद मामले को आगे की जांच के लिए कर्नाटक के देवराजा पुलिस थाने को स्थानांतरित कर दिया गया है। जीरो एफआईआर की व्यवस्था ऐसे मामलों में अपनाई जाती है, जहां शिकायत किसी भी पुलिस स्टेशन में दर्ज कर तत्काल कार्रवाई शुरू की जा सकती है और बाद में संबंधित क्षेत्राधिकार वाले थाने को जांच सौंपी जाती है।

पुलिस जुटा रही है डिजिटल साक्ष्य
अधिकारियों के अनुसार अब जांच एजेंसियां सोशल मीडिया पर साझा किए गए वीडियो, उसके स्रोत, शेयरिंग पैटर्न और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच करेंगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि वीडियो मूल रूप से किसने तैयार किया और उसे किन-किन माध्यमों से प्रसारित किया गया। जांच पूरी होने के बाद उपलब्ध तथ्यों और साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
पहले भी दर्ज हो चुके हैं जीरो एफआईआर के मामले
यह पहला अवसर नहीं है जब किसी सोशल मीडिया पोस्ट या वीडियो को लेकर जीरो एफआईआर दर्ज की गई हो। इससे पहले भी सार्वजनिक पदों पर आसीन नेताओं से जुड़े सोशल मीडिया मामलों में विभिन्न राज्यों की पुलिस ने इसी प्रक्रिया का पालन किया है। ऐसे मामलों में यदि शिकायत किसी दूसरे राज्य या जिले से संबंधित होती है, तो पहले जीरो एफआईआर दर्ज कर उसे संबंधित पुलिस थाने को भेज दिया जाता है ताकि जांच में देरी न हो।
सोशल मीडिया पर जिम्मेदार व्यवहार की जरूरत
यह मामला एक बार फिर सोशल मीडिया पर साझा की जाने वाली सामग्री की जिम्मेदारी और कानूनी दायित्वों को लेकर चर्चा में है। विशेषज्ञों का मानना है कि डिजिटल प्लेटफॉर्म पर कोई भी सामग्री साझा करने से पहले उसकी सत्यता, भाषा और संभावित प्रभाव पर ध्यान देना आवश्यक है। वहीं, इस मामले में पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच निष्पक्ष तरीके से की जाएगी और अंतिम निष्कर्ष जांच तथा न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही सामने आएगा।
Read More : Love Marriage Crime: पति ने गला रेतकर पत्नी को नदी में फेंका, राहगीरों ने बचाई जान












