Taslima Nasreen Statement: प्रसिद्ध बांग्लादेशी लेखिका तस्लीमा नसरीन ने कोलकाता में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान बांग्लादेश की मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियों, अल्पसंख्यकों की सुरक्षा और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर गंभीर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि अपने विचारों के कारण उन्हें वर्षों पहले बांग्लादेश छोड़ना पड़ा था, जबकि भारत ने उन्हें रहने और अपने विचार रखने का अवसर दिया। उन्होंने भारत में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की सराहना करते हुए कहा कि यहां उन्हें खुलकर अपनी बात रखने का अवसर मिला। कार्यक्रम के दौरान सुरक्षा व्यवस्था उपलब्ध कराने के लिए उन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा में विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी का भी आभार व्यक्त किया।

अल्पसंख्यकों की स्थिति पर जताई गहरी चिंता
तस्लीमा नसरीन ने कहा कि बांग्लादेश में अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदू समुदाय की स्थिति लगातार चिंता का विषय बनी हुई है। उनके अनुसार वर्तमान अंतरिम प्रशासन के कार्यकाल में हिंदू समुदाय के खिलाफ हिंसा और उत्पीड़न की घटनाओं में वृद्धि देखने को मिली है। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ धार्मिक संस्थानों में हिंदुओं के प्रति नफरत फैलाने का माहौल बनाया जा रहा है, जिससे सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक देश में सभी नागरिकों को समान सुरक्षा और अधिकार मिलना आवश्यक है, चाहे उनका धर्म या समुदाय कोई भी हो।

इस्कॉन संत की गिरफ्तारी पर उठाए सवाल
अपने संबोधन के दौरान तस्लीमा नसरीन ने चिन्मय कृष्ण दास प्रभु की गिरफ्तारी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार संत को इसलिए गिरफ्तार किया गया क्योंकि वे हिंदू समाज को संगठित करने का प्रयास कर रहे थे। उन्होंने इस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि किसी भी व्यक्ति के साथ कानून के अनुसार निष्पक्ष व्यवहार होना चाहिए और धार्मिक पहचान के आधार पर कार्रवाई नहीं होनी चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि ऐसे मामलों में पारदर्शिता और निष्पक्ष न्यायिक प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है।
समान नागरिक संहिता के समर्थन में रखा अपना पक्ष
तस्लीमा नसरीन ने समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का समर्थन करते हुए कहा कि वे पिछले लगभग चार दशकों से इस विषय पर अपनी राय सार्वजनिक रूप से रखती रही हैं। उनका कहना था कि किसी भी आधुनिक और लोकतांत्रिक समाज में सभी नागरिकों के लिए समान कानून होना महत्वपूर्ण है। उन्होंने यह भी कहा कि धार्मिक व्यक्तिगत कानूनों का प्रभाव विशेष रूप से महिलाओं के अधिकारों पर पड़ता है। उनके अनुसार महिलाओं, खासकर अल्पसंख्यक समुदाय की महिलाओं को समान अधिकार और कानूनी सुरक्षा मिलनी चाहिए, ताकि वे किसी भी प्रकार के भेदभाव और उत्पीड़न से सुरक्षित रह सकें।
कट्टरपंथ और लोकतंत्र पर व्यक्त की चिंता
बांग्लादेश की राजनीतिक स्थिति पर टिप्पणी करते हुए तस्लीमा नसरीन ने कहा कि देश में बढ़ते कट्टरपंथ को गंभीरता से लेने की आवश्यकता है। उन्होंने आशंका जताई कि यदि चरमपंथी विचारधाराओं का प्रभाव बढ़ता है, तो इसका असर लोकतांत्रिक संस्थाओं और सामाजिक सौहार्द दोनों पर पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि किसी भी देश में कानून का शासन और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए, ताकि सभी नागरिक सुरक्षित और स्वतंत्र वातावरण में जीवन जी सकें।

छात्र आंदोलन और राजनीतिक घटनाक्रम पर भी रखी राय
तस्लीमा नसरीन ने बांग्लादेश में हुए छात्र आंदोलन और हालिया राजनीतिक घटनाक्रम पर भी अपनी व्यक्तिगत राय साझा की। उन्होंने कहा कि उनके अनुसार आंदोलन के पीछे कुछ कट्टरपंथी तत्व सक्रिय थे, जिन्होंने लोगों को प्रभावित करने की कोशिश की। साथ ही उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के देश छोड़ने और उनकी पार्टी आवामी लीग पर लगाए गए प्रतिबंध को लोकतांत्रिक व्यवस्था के लिए चिंताजनक बताया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी राजनीतिक दलों को संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया के तहत काम करने का अवसर मिलना चाहिए। उनके अनुसार बांग्लादेश को स्थिर, समावेशी और लोकतांत्रिक दिशा में आगे बढ़ाने के लिए संवाद, कानून का पालन और सभी समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना आवश्यक है।
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