Red Sea Crisis: हूती हमलों से 12% व्यापार पर संकट, ईरान की चाल से महंगा हो सकता है पेट्रोल

Red Sea Crisis:  यमन के ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने इस सप्ताह कई हमलों की जिम्मेदारी ली है। इन घटनाओं में नागरिकों और सैनिकों के हताहत होने की खबर सामने आई है। हूतियों ने लाल सागर से बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के रास्ते अदन की खाड़ी की ओर जाने वाले तेल टैंकरों और सैन्य ठिकानों को निशाना बनाने का दावा किया है। लगातार सामने आ रही इन घटनाओं ने क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ-साथ समुद्री व्यापार को लेकर भी चिंता बढ़ा दी है।

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सैन्य ठिकानों और जहाजों को बनाया निशाना

रिपोर्ट के मुताबिक, हालिया हमलों में एक घटना के दौरान 11 नागरिक घायल हुए, जबकि पूर्वी यमन में सैन्य शिविरों पर हुए हमलों में कम से कम 17 सैनिकों के मारे जाने की जानकारी सामने आई। हूती प्रवक्ता नस्रुद्दीन आमेर ने कहा है कि जब तक यमन पर लगाई गई सऊदी अरब की कथित नाकेबंदी खत्म नहीं होती, तब तक संगठन संबंधित ठिकानों और क्षेत्रों को निशाना बनाता रहेगा। इससे संघर्ष के और बढ़ने की आशंका पैदा हो गई है।

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बाब अल-मंदेब क्यों है इतना महत्वपूर्ण?

बाब अल-मंदेब दुनिया के प्रमुख समुद्री व्यापार मार्गों में शामिल है। यह जलडमरूमध्य लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है और स्वेज नहर के जरिए यूरोप तथा एशिया के बीच होने वाले व्यापार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। इस मार्ग से वैश्विक व्यापार का बड़ा हिस्सा गुजरता है। ऐसे में यहां जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने पर इसका असर सिर्फ मध्य पूर्व तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय सप्लाई चेन पर भी पड़ सकता है।

टैंकरों की आवाजाही में आई गिरावट

विश्लेषणात्मक फर्म केपलर के आंकड़ों के अनुसार, हालिया हमलों के बाद बाब अल-मंदेब से गुजरने वाले टैंकरों की संख्या में उल्लेखनीय कमी दर्ज की गई है। यदि हमले लगातार जारी रहते हैं तो जहाजों के लिए सुरक्षा जोखिम बढ़ सकता है। इसके साथ ही बीमा कंपनियां जोखिम के अनुसार प्रीमियम बढ़ा सकती हैं, जिससे समुद्री परिवहन की लागत भी बढ़ने की संभावना है।

दो अहम समुद्री रास्तों पर संकट का खतरा

स्थिति और गंभीर तब हो सकती है जब बाब अल-मंदेब के साथ स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में भी तनाव बना रहे। ये दोनों समुद्री मार्ग वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माने जाते हैं। अगर दोनों रास्तों से जहाजों की आवाजाही लंबे समय तक बाधित होती है, तो तेल और अन्य जरूरी वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय आपूर्ति प्रभावित हो सकती है। इससे बाजारों में कीमतों और महंगाई पर दबाव बढ़ सकता है।

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जहाजों को लेना पड़ सकता है लंबा रास्ता

बाब अल-मंदेब मार्ग असुरक्षित होने की स्थिति में समुद्री कंपनियां वैकल्पिक रास्ते का इस्तेमाल कर सकती हैं। ऐसे में जहाजों को अफ्रीका के दक्षिणी हिस्से से होते हुए केप ऑफ गुड होप का लंबा रास्ता अपनाना पड़ सकता है। इससे यात्रा का समय और ईंधन खर्च दोनों बढ़ेंगे। परिवहन लागत बढ़ने का सीधा असर वैश्विक व्यापार और तेल की कीमतों पर पड़ने की आशंका जताई जा रही है।

ईरान और क्षेत्रीय राजनीति का क्या कनेक्शन?

यमन मामलों की शोधकर्ता आफराह नासिर और इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के वरिष्ठ विश्लेषक अहमद नागी के अनुसार, हूतियों की गतिविधियों को व्यापक क्षेत्रीय तनाव के संदर्भ में देखा जा सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान और उसके क्षेत्रीय सहयोगियों के बीच रणनीतिक संबंधों के कारण यमन का संघर्ष मध्य पूर्व की बड़ी भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा से जुड़ जाता है।

अमेरिका और सऊदी अरब पर दबाव की रणनीति

विश्लेषकों के मुताबिक, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई और क्षेत्रीय तनाव के बीच हूती हमले दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा हो सकते हैं। समुद्री चोक-पॉइंट पर खतरा पैदा होने से अंतरराष्ट्रीय शक्तियों और क्षेत्रीय देशों पर अतिरिक्त दबाव बनता है। इसी कारण बाब अल-मंदेब में होने वाली गतिविधियों पर अमेरिका, सऊदी अरब और अन्य देशों की नजर बनी हुई है।

यमन में फिर भड़क सकता है गृहयुद्ध

यमन का गृहयुद्ध वर्ष 2014 में उस समय तेज हुआ था, जब हूती विद्रोहियों ने राजधानी साना और उत्तरी यमन के बड़े हिस्से पर नियंत्रण स्थापित कर लिया था। इसके बाद सऊदी अरब के नेतृत्व वाले गठबंधन ने हूतियों के खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया और यमन पर हवाई तथा समुद्री प्रतिबंध लगाए गए। लंबे संघर्ष ने देश को गंभीर मानवीय संकट में भी धकेला।

जवाबी कार्रवाई बढ़ने का खतरा

हूतियों का कहना है कि उनके हमले कथित नाकेबंदी को खत्म कराने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं। हालांकि, लगातार हमलों से सऊदी नेतृत्व वाले गठबंधन या अन्य पक्षों की जवाबी कार्रवाई का खतरा बढ़ सकता है। यदि ऐसा हुआ तो वर्षों से संघर्ष झेल रहे यमन में हिंसा फिर व्यापक रूप ले सकती है। इसके साथ ही लाल सागर और बाब अल-मंदेब की अस्थिरता वैश्विक व्यापार के लिए भी बड़ी चुनौती बन सकती है।

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Chandan Das

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