Pitru Paksha 2026: मुख्य द्वार के ये Vastu Upay, पितरों के आशीर्वाद से जुड़ी हैं खास मान्यताएं

पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और तर्पण का महत्वपूर्ण समय माना जाता है। वास्तु मान्यताओं में घर के मुख्य द्वार को भी विशेष महत्व दिया गया है। इस दौरान मुख्य द्वार से जुड़े कुछ उपाय करने की परंपरा बताई जाती है। आखिर कौन-से उपाय किए जाते हैं और उनका धार्मिक महत्व क्या है, जानिए।

Pitru Paksha 2026 : हिंदू धर्म में पितृ पक्ष को पूर्वजों के स्मरण और उनके प्रति श्रद्धा व्यक्त करने का महत्वपूर्ण समय माना जाता है। इस दौरान लोग अपने पितरों के लिए तर्पण, श्राद्ध और पिंडदान करते हैं। धार्मिक मान्यताओं के साथ वास्तु शास्त्र में भी इस अवधि से जुड़े कुछ नियम बताए गए हैं। मान्यता है कि घर का मुख्य द्वार सकारात्मक ऊर्जा के प्रवेश का प्रमुख स्थान होता है, इसलिए पितृ पक्ष में इसे साफ-सुथरा और व्यवस्थित रखना विशेष महत्व रखता है।

ads

मुख्य द्वार के आसपास गंदगी और जाले बिल्कुल न रहने दें

पितृ पक्ष की शुरुआत से पहले घर के मुख्य द्वार की अच्छी तरह सफाई करने की सलाह दी जाती है। दरवाजे के आसपास धूल, मिट्टी, कचरा और जाले जमा नहीं होने देने चाहिए। यदि प्रवेश द्वार के आसपास लंबे समय से सफाई नहीं हुई है, तो पहले उसे व्यवस्थित कर लेना चाहिए। वास्तु मान्यताओं में साफ प्रवेश द्वार को घर के लिए शुभ माना जाता है।

Adst

दरवाजे के पास कबाड़ रखने से बचें

मुख्य द्वार के आसपास पुराने डिब्बे, टूटे सामान, खराब उपकरण या अनावश्यक वस्तुएं जमा करने से बचने की परंपरा है। माना जाता है कि प्रवेश स्थान जितना व्यवस्थित और साफ रहेगा, घर का वातावरण उतना ही सकारात्मक बना रहेगा। पितृ पक्ष के दौरान विशेष रूप से घर के प्रवेश क्षेत्र को अव्यवस्था से मुक्त रखने पर जोर दिया जाता है।

जूते-चप्पल मुख्य द्वार पर बिखरे न छोड़ें

घर के मुख्य द्वार के सामने जूते-चप्पल बिखरे रहने से प्रवेश स्थान अव्यवस्थित दिखाई देता है। इसलिए इन्हें किसी निर्धारित स्थान पर व्यवस्थित तरीके से रखना चाहिए। वास्तु मान्यताओं के अनुसार जूते-चप्पल रखने के लिए दक्षिण या पश्चिम दिशा को उपयुक्त माना जाता है। पितृ पक्ष में भी मुख्य द्वार के आसपास साफ-सफाई और व्यवस्था बनाए रखने की सलाह दी जाती है।

तोरण और रंगोली से सजा सकते हैं प्रवेश द्वार

कुछ धार्मिक मान्यताओं में पितृ पक्ष को केवल शोक की अवधि न मानकर पूर्वजों के सम्मान और स्मरण का समय माना जाता है। इसी वजह से घर के मुख्य द्वार को स्वच्छ रखने के साथ पारंपरिक तरीके से सजाने की बात भी कही जाती है। आम या अशोक के पत्तों और गेंदे के फूलों से बना तोरण लगाया जा सकता है। साफ स्थान पर छोटी रंगोली भी बनाई जा सकती है।

Adst

मुख्य दरवाजा खोलते समय तेज आवाज से बचें

पितृ पक्ष के दौरान घर का वातावरण शांत और व्यवस्थित रखने पर भी जोर दिया जाता है। यदि मुख्य दरवाजा खोलने या बंद करने पर तेज अथवा कर्कश आवाज आती है, तो समय रहते उसकी मरम्मत करा लेनी चाहिए। दरवाजे के कब्जों में तेल डालकर आवाज को कम किया जा सकता है। वास्तु मान्यताओं में शांत वातावरण को सकारात्मक माना गया है।

शाम को मुख्य द्वार पर पर्याप्त रोशनी रखें

पितृ पक्ष के दौरान शाम के समय मुख्य द्वार पर पर्याप्त रोशनी रखने की परंपरा भी बताई जाती है। इसके लिए प्रवेश द्वार के पास दीपक या अन्य रोशनी का प्रबंध किया जा सकता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार प्रकाश सकारात्मकता का प्रतीक माना जाता है और इससे मुख्य द्वार भी साफ तथा व्यवस्थित दिखाई देता है।

दहलीज और चौखट की सफाई पर दें विशेष ध्यान

मुख्य द्वार की दहलीज यानी चौखट को भी पितृ पक्ष में महत्वपूर्ण माना जाता है। पारंपरिक घरों में इस दौरान दहलीज की सफाई और लीपने की परंपरा रही है। यदि चौखट टूटी हुई है तो उसकी मरम्मत पहले ही करा लेना बेहतर माना जाता है। जहां पितरों की स्थापना की गई हो, वहां धार्मिक परंपराओं के अनुसार दहलीज को लेकर विशेष सावधानी बरती जाती है।

तुलसी, अशोक और शमी के पौधे लगाने की मान्यता

पितृ पक्ष में मुख्य द्वार के आसपास कुछ शुभ पौधे लगाने की भी वास्तु मान्यता बताई जाती है। तुलसी, अशोक और शमी के पौधों को धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण माना गया है। इन्हें उचित स्थान पर लगाने से घर के प्रवेश क्षेत्र की सुंदरता भी बढ़ती है। हालांकि पौधे लगाते समय उनकी देखभाल और पर्याप्त जगह का ध्यान रखना जरूरी है।

श्रद्धा और स्वच्छता को दें सबसे अधिक महत्व

पितृ पक्ष से जुड़ी परंपराओं में सबसे महत्वपूर्ण भाव पूर्वजों के प्रति श्रद्धा और सम्मान का है। मुख्य द्वार की सफाई, दीपक, सजावट या पौधों से जुड़े उपाय अलग-अलग परिवारों और परंपराओं में अलग हो सकते हैं। इसलिए इन्हें धार्मिक मान्यताओं के रूप में अपनाया जाता है, जबकि पितरों के लिए किए जाने वाले श्राद्ध, तर्पण और दान में श्रद्धा को प्रमुख माना जाता है।

Read More  :  Pitru Paksha 2026: कौआ श्राद्ध का भोजन न खाए तो क्या करें? जानें पितरों को प्रसन्न करने के उपाय

Chandan Das

Chandan Das

Writer & Blogger

All Posts
पिछले पोस्ट
अगला पोस्ट

ताज़ा खबरे

  • All Posts
  • FIFA World Cup 2026
  • Thetarget365
  • अंतरराष्ट्रीय
  • अन्य
  • अपराध
  • कारोबार
  • कृषि
  • खेल
  • छत्तीसगढ़
  • टेक
  • ट्रेंड
  • ताज़ा खबर
  • धर्म
  • पशु-पक्षी
  • मनोरंजन
  • मौसम
  • राजनीति
  • राष्ट्रीय
  • विचार/लेख
  • शिक्षा और नौकरी
  • साहित्य/मीडिया
  • सेहत-फिटनेस
    •   Back
    • मध्य प्रदेश
    • पश्चिम बंगाल
    • उत्तर प्रदेश
    • बिहार
    • महाराष्ट्र
    • झारखंड
    • राजस्थान
    • ओडिशा

© 2026 | All Rights Reserved | Thetarget365.com | Made By Top News Portal Development Company

Contacts

Call Us At – +91-:9406130006
WhatsApp – +91 62665 68872
Mail Us At – thetargetweb@gmail.com
Meet Us At – Shitla Ward, Ambikapur Dist. Surguja Chhattisgarh.497001.

Adst