Keralam Bill : केरल का आधिकारिक नाम बदलकर ‘केरलम’ करने से जुड़ा विधेयक मंगलवार को लोकसभा में पारित हो गया। लंबे समय से राज्य के नाम को लेकर चली आ रही मांग को अब संसद के निचले सदन से भी मंजूरी मिल गई है। विधेयक के पारित होने के बाद केरल के नाम में आधिकारिक बदलाव की प्रक्रिया एक महत्वपूर्ण चरण आगे बढ़ गई है।

सोमवार को लोकसभा में पेश किया गया था बिल
केरल का नाम बदलने से संबंधित विधेयक केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने सोमवार को लोकसभा में पेश किया था। इसके बाद इस पर सदन में चर्चा हुई और मंगलवार को विधेयक को पारित कर दिया गया। सरकार की ओर से विधेयक को राज्य के नाम से जुड़े संवैधानिक और प्रशासनिक बदलाव की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

केरल विधानसभा ने भेजा था प्रस्ताव
केरल का नाम बदलकर ‘केरलम’ करने की प्रक्रिया राज्य विधानसभा से शुरू हुई थी। जून 2024 में केरल विधानसभा ने राज्य का नाम बदलने का प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार को भेजा था। राज्य सरकार की ओर से केंद्र से अनुरोध किया गया था कि संविधान और अन्य आधिकारिक दस्तावेजों में ‘केरल’ के स्थान पर ‘केरलम’ नाम किया जाए।
राष्ट्रपति ने विधानसभा से मांगी थी राय
राज्य सरकार की ओर से प्रस्ताव भेजे जाने के बाद मामले में संवैधानिक प्रक्रिया आगे बढ़ी। राष्ट्रपति ने नाम परिवर्तन से जुड़े विधेयक पर केरल विधानसभा की राय मांगी थी। इसके बाद राज्य विधानसभा ने इस विषय पर विचार करते हुए दोबारा प्रस्ताव पारित किया और ‘केरलम’ नाम किए जाने का समर्थन किया।
सर्वसम्मति से नाम बदलने के पक्ष में प्रस्ताव
केरल विधानसभा में राज्य का नाम बदलने के समर्थन में प्रस्ताव सर्वसम्मति से पारित किया गया था। इसका मतलब है कि विधानसभा में मौजूद राजनीतिक दलों ने इस मांग को व्यापक समर्थन दिया। राज्य सरकार का मानना रहा है कि ‘केरलम’ नाम राज्य की भाषाई और सांस्कृतिक पहचान से अधिक जुड़ा हुआ है।

अब आगे क्या होगी प्रक्रिया?
लोकसभा से विधेयक पारित होने के बाद नाम परिवर्तन की संवैधानिक प्रक्रिया का अगला चरण पूरा किया जाएगा। इसके लिए संसद के दोनों सदनों से विधेयक को मंजूरी मिलना जरूरी होगा। इसके बाद संवैधानिक प्रावधानों के तहत आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने पर केरल का आधिकारिक नाम ‘केरलम’ किए जाने का रास्ता साफ हो सकता है।
नाम बदलने से जुड़ेगा प्रशासनिक बदलाव
यदि विधेयक कानून का रूप लेता है, तो राज्य के आधिकारिक नाम का इस्तेमाल सरकारी दस्तावेजों, संस्थानों और अन्य संवैधानिक संदर्भों में किया जाएगा। हालांकि, नाम परिवर्तन के साथ कई प्रशासनिक रिकॉर्ड और दस्तावेजों में भी आवश्यक बदलाव करने पड़ सकते हैं। इसके लिए केंद्र और राज्य सरकार के स्तर पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
‘केरलम’ नाम को लेकर पुरानी मांग
केरल का नाम ‘केरलम’ करने की मांग नई नहीं है। राज्य के नाम को स्थानीय भाषा और सांस्कृतिक पहचान से जोड़ने की मांग समय-समय पर उठती रही है। विधानसभा से प्रस्ताव पारित होने और अब लोकसभा की मंजूरी मिलने के बाद इस मांग को संवैधानिक स्तर पर आगे बढ़ने का अवसर मिला है।
लोकसभा की मंजूरी के बाद बढ़ी राजनीतिक हलचल
लोकसभा में विधेयक पारित होने के बाद अब सभी की नजरें आगे की संसदीय और संवैधानिक प्रक्रिया पर टिकी हैं। यदि पूरी प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी होती है तो आधिकारिक तौर पर ‘केरल’ का नाम बदलकर ‘केरलम’ किया जा सकेगा। राज्य सरकार की लंबे समय से चली आ रही मांग के लिए लोकसभा की मंजूरी को महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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