Shillong Violence : मेघालय की राजधानी शिलॉन्ग में खासी स्टूडेंट्स यूनियन (KSU) की ओर से निकाली गई बाइक रैली के दौरान हिंसा भड़क गई। रैली के दौरान कुछ उपद्रवियों ने कई वाहनों को नुकसान पहुंचाया और कम से कम दो सरकारी वाहनों को आग के हवाले कर दिया। घटना के बाद शहर के कई संवेदनशील इलाकों में तनाव की स्थिति बन गई। प्रशासन ने हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती बढ़ा दी है।
स्वामी विवेकानंद और नेताजी की मूर्तियों को नुकसान
रैली के दौरान महापुरुषों की रिलीफ एंड रिहैबिलिटेशन कॉलोनी में लगी स्वामी विवेकानंद और नेताजी सुभाष चंद्र बोस की मूर्तियों में भी तोड़फोड़ की गई। यह कॉलोनी 1960 के दशक में तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान से आए शरणार्थियों के लिए बनाई गई थी। मूर्तियों को नुकसान पहुंचाए जाने की घटना के बाद इलाके में लोगों के बीच नाराजगी देखी गई। सोशल मीडिया पर घटना से जुड़े कई वीडियो भी सामने आए हैं।
कई वाहनों में तोड़फोड़ और आगजनी
जानकारी के अनुसार KSU की बाइक रैली शिलॉन्ग के अलग-अलग इलाकों से होकर गुजर रही थी। इसी दौरान कुछ स्थानों पर प्रदर्शनकारियों और उपद्रवियों ने वाहनों को निशाना बनाया। कम से कम दो सरकारी वाहनों में आग लगा दी गई। अचानक हुई हिंसा से स्थानीय लोगों में भी अफरा-तफरी का माहौल बन गया। पुलिस ने स्थिति को संभालने के लिए संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त बल तैनात किया।
सचिवालय के मुख्य द्वार तक पहुंचे प्रदर्शनकारी
प्रदर्शनकारियों का समूह मेघालय सचिवालय के मुख्य द्वार तक भी पहुंच गया। वहां प्रदर्शनकारियों ने अपने संगठन के झंडे लगा दिए। बाद में पुलिस ने इन झंडों को हटा दिया। प्रशासन की ओर से स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है, ताकि हिंसा को और फैलने से रोका जा सके।
पांच प्रमुख मांगों को लेकर KSU का आंदोलन
KSU लंबे समय से अपनी पांच प्रमुख मांगों को लेकर आंदोलन कर रहा है। संगठन की पहली मांग मेघालय निवासी सुरक्षा और संरक्षा कानून यानी MRSSA को तत्काल लागू करना है। संगठन का कहना है कि राज्य के स्थानीय लोगों के हितों और अधिकारों की सुरक्षा के लिए इस कानून को जल्द लागू किया जाना चाहिए।
भर्ती प्रक्रिया में सुधार की मांग
KSU ने मेघालय लोक सेवा आयोग (MPSC) और जिला चयन समितियों (DSCs) की भर्ती प्रक्रिया में सुधार की भी मांग रखी है। संगठन का आरोप है कि भर्ती व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता है। इसके अलावा राज्य में बाहर से आने वाले प्रवासी मजदूरों के लिए भी कड़े नियम बनाए जाने की मांग की जा रही है।
NEIGRIHMS भर्ती और खनन परियोजना पर विरोध
संगठन ने NEIGRIHMS अस्पताल में नर्सों की भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की मांग भी उठाई है। इसके अलावा ईस्ट जयंतिया हिल्स के लम सिरमन क्षेत्र में श्री सीमेंट की प्रस्तावित खदान को लेकर हुई जनसुनवाई को रद्द करने की मांग की गई है। इन मुद्दों को लेकर KSU ने सरकार पर दबाव बढ़ाने का फैसला किया।
15 दिन का अल्टीमेटम देने के बाद रैली
KSU ने अपनी मांगों को पूरा करने के लिए सरकार को 15 दिनों का समय दिया था। निर्धारित अवधि में मांगों पर अपेक्षित कार्रवाई नहीं होने के बाद संगठन ने शिलॉन्ग में ‘ब्लैक-फ्लैग बाइक रैली’ निकालने का निर्णय लिया। हालांकि, रैली के दौरान हुई हिंसा और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने की घटनाओं ने आंदोलन को गंभीर रूप दे दिया।
संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा बढ़ाई गई
घटना के बाद प्रशासन ने शिलॉन्ग के संवेदनशील क्षेत्रों में पुलिस और सुरक्षा बलों की तैनाती कर दी है। अधिकारियों की कोशिश है कि किसी भी तरह की नई हिंसा या तनाव को फैलने से रोका जाए। फिलहाल प्रशासन स्थिति पर नजर बनाए हुए है। रैली के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और आगजनी की घटनाओं को लेकर आगे की कार्रवाई की संभावना है।
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