Childhood Cancer : कैंसर को गंभीर बीमारियों में गिना जाता है और यह केवल वयस्कों तक सीमित नहीं है। बच्चों में भी कैंसर के कुछ प्रकार सामने आते हैं, जिनमें ल्यूकेमिया यानी ब्लड कैंसर सबसे आम माना जाता है। बच्चों में कैंसर को लेकर माता-पिता के मन में अक्सर कई सवाल होते हैं कि यह बीमारी क्यों होती है, इसके शुरुआती संकेत क्या हैं और इससे बचाव कैसे किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में कैंसर के कारण वयस्कों से काफी अलग हो सकते हैं।
DNA में बदलाव हो सकते हैं कैंसर की बड़ी वजह
हेमेटोलॉजिस्ट और बोन मैरो ट्रांसप्लांट विशेषज्ञ डॉ. नरेंद्र अग्रवाल के अनुसार, बच्चों में कैंसर की प्रमुख वजह शरीर की कोशिकाओं के DNA में होने वाले आनुवंशिक बदलाव यानी म्यूटेशन हो सकते हैं। बच्चों का शरीर लगातार विकास करता है और इस दौरान नई कोशिकाएं तेजी से बनती हैं। कोशिकाओं के बनने और विभाजित होने की प्रक्रिया में कभी-कभी DNA की कॉपी तैयार करते समय बदलाव हो सकते हैं।
ज्यादातर मामलों में माता-पिता जिम्मेदार नहीं
सामान्य स्थिति में शरीर की DNA रिपेयर प्रणाली और प्रतिरक्षा तंत्र ऐसी गड़बड़ियों को ठीक करने का काम करते हैं। लेकिन कुछ बदलाव अगर ठीक नहीं हो पाते तो कोशिकाओं की सामान्य वृद्धि और नियंत्रण प्रभावित हो सकता है। हालांकि, ज्यादातर बच्चों में कैंसर का कोई एक निश्चित कारण पता नहीं चल पाता। कुछ दुर्लभ आनुवंशिक स्थितियां जोखिम बढ़ा सकती हैं। इसलिए बच्चे को कैंसर होने पर माता-पिता को खुद को दोषी नहीं मानना चाहिए।
बच्चों में ल्यूकेमिया क्यों अधिक देखा जाता है?
ल्यूकेमिया बच्चों में पाया जाने वाला प्रमुख कैंसर है। इसका संबंध बोन मैरो से है, जहां शरीर में रक्त की नई कोशिकाएं बनती हैं। बचपन में शरीर तेजी से बढ़ता है, इसलिए बोन मैरो में कोशिकाओं के बनने और विभाजित होने की प्रक्रिया भी काफी सक्रिय रहती है। इसी दौरान कुछ कोशिकाओं के DNA में ऐसे बदलाव हो सकते हैं, जो उनकी सामान्य वृद्धि और परिपक्व होने की प्रक्रिया को प्रभावित कर दें।
असामान्य रक्त कोशिकाओं की बढ़ोतरी बन सकती है वजह
अगर DNA में हुए बदलाव उन जीन को प्रभावित करते हैं, जो कोशिकाओं की वृद्धि को नियंत्रित करते हैं, तो असामान्य सफेद रक्त कोशिकाएं तेजी से बढ़ सकती हैं। यही स्थिति आगे चलकर ल्यूकेमिया का रूप ले सकती है। विशेषज्ञों के अनुसार, किसी एक खाद्य पदार्थ, संक्रमण या माता-पिता की किसी गलती को बच्चों में ल्यूकेमिया का सीधा कारण नहीं माना जा सकता।
ल्यूकेमिया के लक्षणों को न करें नजरअंदाज
बच्चों में ल्यूकेमिया होने पर लंबे समय तक या बार-बार बुखार, अत्यधिक कमजोरी, एनीमिया, बार-बार संक्रमण, बिना चोट के शरीर पर नीले निशान और नाक या मसूड़ों से खून आने जैसे संकेत दिख सकते हैं। इसके अलावा हड्डियों और जोड़ों में लगातार दर्द भी एक संभावित लक्षण हो सकता है। हालांकि, ये लक्षण दूसरी सामान्य बीमारियों में भी दिखाई दे सकते हैं।
विल्म्स ट्यूमर में पेट में गांठ हो सकती है
विल्म्स ट्यूमर बच्चों में होने वाला किडनी कैंसर है। इसका एक प्रमुख संकेत पेट में बिना दर्द के गांठ महसूस होना हो सकता है। कुछ बच्चों में पेट दर्द, बुखार या पेशाब में खून आने जैसी समस्या भी दिखाई दे सकती है। यदि बच्चे के पेट में असामान्य गांठ महसूस हो तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय बाल रोग विशेषज्ञ से जांच करानी चाहिए।
आंख में सफेद चमक हो सकती है रेटिनोब्लास्टोमा का संकेत
रेटिनोब्लास्टोमा आंख से जुड़ा कैंसर है। इसकी पहचान में फ्लैश वाली तस्वीर में आंख की पुतली के भीतर सफेद चमक दिखाई देना महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है। इसके अलावा बच्चे में अचानक भेंगापन या नजर कमजोर होने जैसी समस्या भी नजर आ सकती है। ऐसे संकेत मिलने पर तुरंत विशेषज्ञ की सलाह लेना जरूरी है।
हर लक्षण कैंसर नहीं होता, लेकिन जांच जरूरी
बच्चों में ऊपर बताए गए लक्षण दिखाई देने का मतलब यह नहीं है कि उन्हें कैंसर ही है। कई सामान्य बीमारियों में भी ऐसे संकेत नजर आ सकते हैं। लेकिन अगर कोई लक्षण लंबे समय तक बना रहे, बार-बार लौटे या लगातार बढ़ता जाए, तो चिकित्सकीय जांच में देरी नहीं करनी चाहिए। समय पर बीमारी की पहचान उपचार को बेहतर बनाने में मदद कर सकती है।
बच्चों में कैंसर की पूरी रोकथाम हमेशा संभव नहीं
विशेषज्ञों के अनुसार, बच्चों में होने वाले अधिकांश कैंसर को पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, क्योंकि उनका संबंध अक्सर कोशिकाओं में होने वाले आनुवंशिक बदलावों से होता है। हालांकि, शुरुआती पहचान बेहद महत्वपूर्ण है। लंबे समय तक बुखार, बार-बार संक्रमण, बिना कारण खून आना, लगातार हड्डियों में दर्द, आंख में सफेद चमक या शरीर में असामान्य गांठ जैसे संकेत मिलने पर डॉक्टर से तुरंत संपर्क करना चाहिए।
स्वस्थ जीवनशैली और नियमित देखभाल भी जरूरी
बच्चों को संतुलित और पौष्टिक आहार देना, सभी जरूरी टीके समय पर लगवाना, स्वच्छ वातावरण उपलब्ध कराना और संक्रमण से बचाव करना उनके बेहतर स्वास्थ्य के लिए महत्वपूर्ण है। सबसे जरूरी बात यह है कि माता-पिता बच्चे में नजर आने वाले असामान्य और लगातार बने रहने वाले लक्षणों को नजरअंदाज न करें। समय पर विशेषज्ञ की सलाह और उचित जांच ही किसी गंभीर बीमारी की पहचान में सबसे अहम भूमिका निभाती है।
Read More : Helicopter Viral Video : सड़क के बेहद करीब आया हेलीकॉप्टर, हवा से उड़ने लगे लोग; वीडियो हुआ वायरल