Sugar Crisis : त्योहारों का मौसम करीब आते ही देश में चीनी की बढ़ती कीमतों और घटते भंडार को लेकर राजनीतिक बहस तेज हो गई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल उठाते हुए दावा किया है कि देश में चीनी का स्टॉक करीब नौ साल के निचले स्तर पर पहुंच गया है। उनका कहना है कि घरेलू उपलब्धता को बनाए रखने के लिए सरकार को 10 लाख टन चीनी का शुल्क-मुक्त आयात करने की जरूरत पड़ रही है। ऐसे समय में त्योहारों के दौरान आम लोगों पर बढ़ती कीमतों का अतिरिक्त बोझ पड़ने की आशंका जताई जा रही है।
नौ साल के निचले स्तर पर पहुंचा चीनी भंडार?
मल्लिकार्जुन खरगे ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक पोस्ट के जरिए केंद्र सरकार से कई सवाल किए। उन्होंने दावा किया कि दुनिया के प्रमुख चीनी उत्पादक और निर्यातक देशों में शामिल भारत में चीनी का भंडार नौ साल के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। कांग्रेस अध्यक्ष ने पूछा कि आखिर ऐसी स्थिति क्यों बनी कि देश को पहले चीनी के निर्यात पर रोक लगाने और अब बड़ी मात्रा में शुल्क-मुक्त आयात की जरूरत पड़ रही है।
10 लाख टन चीनी आयात करने की जरूरत पर सवाल
खरगे के मुताबिक, सरकार को घरेलू बाजार में उपलब्धता बनाए रखने के लिए करीब 10 लाख टन चीनी शुल्क-मुक्त आयात करने की स्थिति का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने इसे सरकार की नीतियों और चीनी उत्पादन से जुड़े फैसलों पर सवाल उठाने का आधार बनाया। कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि जब देश में चीनी की उपलब्धता को लेकर चिंता पैदा हो रही है, तब सरकार को इस संकट के कारणों पर स्पष्ट जवाब देना चाहिए।
तीन महीने में करीब 40 प्रतिशत महंगी हुई चीनी
कांग्रेस अध्यक्ष ने चीनी की कीमतों में कथित तेज बढ़ोतरी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने दावा किया कि पिछले तीन महीनों में चीनी करीब 40 प्रतिशत तक महंगी हो गई है। खरगे ने कहा कि त्योहारों से ठीक पहले कीमतों में इस तरह की वृद्धि का सीधा असर आम परिवारों के बजट पर पड़ सकता है। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि महंगाई की इस स्थिति के लिए जिम्मेदारी किसकी है और जनता को राहत देने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं।
E20 नीति को लेकर भी केंद्र पर निशाना
चीनी संकट के बीच खरगे ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण यानी E20 नीति को लेकर भी सवाल उठाया। उन्होंने पूछा कि जब देश को चीनी की कमी के बीच विदेशों से चीनी मंगाने की जरूरत पड़ रही है, तब गन्ने और अनाज का इस्तेमाल एथेनॉल उत्पादन में करने की मौजूदा नीति की समीक्षा क्यों नहीं की जा रही है। कांग्रेस अध्यक्ष ने सरकार से इस नीति के प्रभावों को लेकर जवाब मांगा।
गन्ने और एथेनॉल के इस्तेमाल पर उठे सवाल
खरगे ने अपने बयान में चीनी उत्पादन, भंडारण और एथेनॉल नीति को एक-दूसरे से जोड़ते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा। उनका तर्क है कि पहले चीनी उत्पादन में कमी आई, फिर भंडार निचले स्तर पर पहुंचा और अब विदेशों से चीनी आयात करनी पड़ रही है। दूसरी ओर, गन्ने और अनाज का एक हिस्सा एथेनॉल उत्पादन के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। उन्होंने सरकार से इस पूरी नीति की समीक्षा करने की मांग की।
त्योहारों में आम लोगों की बढ़ सकती है परेशानी
त्योहारों के दौरान मिठाइयों और अन्य खाद्य पदार्थों में चीनी की मांग सामान्य दिनों की तुलना में बढ़ जाती है। ऐसे में कीमतों में बढ़ोतरी का असर सीधे उपभोक्ताओं और मिठाई कारोबार से जुड़े लोगों पर पड़ सकता है। कांग्रेस का आरोप है कि यदि समय रहते चीनी की उपलब्धता और कीमतों को नियंत्रित करने के उपाय नहीं किए गए, तो त्योहारों के मौसम में आम लोगों को महंगाई का अतिरिक्त सामना करना पड़ सकता है।
सरकार की नीतियों पर कांग्रेस ने मांगा जवाब
मल्लिकार्जुन खरगे ने चीनी की कीमत, स्टॉक और एथेनॉल नीति को लेकर केंद्र सरकार से स्पष्टीकरण मांगा है। उन्होंने इन मुद्दों के जरिए सरकार की कृषि और ऊर्जा नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि, चीनी की उपलब्धता, कीमतों और एथेनॉल नीति से जुड़े आंकड़ों की स्वतंत्र पुष्टि तथा सरकार का पक्ष इस दावे को समझने के लिए महत्वपूर्ण होगा। फिलहाल त्योहारों से पहले चीनी की कीमतों और घरेलू भंडार को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
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