कांग्रेस नेता परवेज आलम गांधी ने पशु चिकित्सा विभाग में नियम विरुद्ध संलग्नीकरण और शासन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए जांच व कार्रवाई की मांग की।
कांग्रेस नेता परवेज आलम गांधी ने पशु चिकित्सा विभाग में नियम विरुद्ध संलग्नीकरण और शासन को गुमराह करने का आरोप लगाते हुए जांच व कार्रवाई की मांग की।

Ambikapur News : पशु चिकित्सा सेवाएं विभाग, अंबिकापुर में कथित नियम विरुद्ध संलग्नीकरण और शासन को गलत जानकारी देकर गुमराह करने के आरोपों ने विभागीय व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं। कांग्रेस नेता परवेज आलम गांधी ने मामले को लेकर संचालक, पशु चिकित्सा सेवाएं, छत्तीसगढ़ नवा रायपुर को शिकायत और दस्तावेज सौंपते हुए नियम विरुद्ध किए गए सभी संलग्नीकरण तत्काल समाप्त करने तथा उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं, अंबिकापुर के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।


परवेज आलम गांधी का आरोप है कि विभाग में नियम विरुद्ध संलग्नीकरण को लेकर पहले शिकायत की गई थी। शिकायत के जवाब में उपसंचालक कार्यालय की ओर से जो जानकारी दी गई, वह शिकायत के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों और मौके की वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाती। उनका दावा है कि विभागीय जवाब के माध्यम से शासन को तथ्यहीन एवं गलत जानकारी देकर वास्तविक स्थिति छिपाने का प्रयास किया गया।

उन्होंने कहा कि विभागीय जवाब में उल्लेख किया गया कि शिकायतकर्ता से मामले से संबंधित प्रमाण प्रस्तुत करने के लिए पत्राचार किया गया था, जबकि उनके अनुसार ऐसा कोई पत्र उन्हें प्राप्त नहीं हुआ। इसी तरह शिकायत में उल्लेखित परिचारक नीरज सिन्हा का नाम भी विभागीय जवाब से गायब होने का आरोप लगाया गया है।
परवेज के अनुसार शिकायत में जिन अधिकारी-कर्मचारियों के नियम विरुद्ध संलग्नीकरण का उल्लेख किया गया था, उनमें से कई अब भी अपने मूल पदस्थापना स्थल से विधिवत कार्यमुक्त हुए बिना अन्य स्थानों पर कार्य कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वास्तविक स्थिति की पुष्टि संबंधित कर्मचारियों की उपस्थिति पंजी से आसानी से की जा सकती है।
उन्होंने नीरज सिन्हा, ममता जायसवाल, सलिमा मिंज (AVFO) तथा डॉ. सलिमा मिंज के संलग्नीकरण और पदस्थापना को लेकर भी सवाल उठाए हैं। उनका विशेष आरोप डॉ. सलिमा मिंज को मैनपाट से जिला पशु चिकित्सालय अंबिकापुर में संलग्न किए जाने को लेकर है।

परवेज आलम गांधी का कहना है कि जिला पशु चिकित्सालय अंबिकापुर में पशु चिकित्सकों के दो स्वीकृत पद हैं और दोनों पद पहले से भरे हुए हैं। ऐसे में मैनपाट से करीब 60 किलोमीटर दूर अंबिकापुर में अतिरिक्त रूप से संलग्नीकरण किए जाने की आवश्यकता और नियमसंगतता पर सवाल उठता है। उन्होंने दावा किया कि उपसंचालक कार्यालय परिसर, डीआई लैब, मोबाइल यूनिट, कृत्रिम गर्भाधान केंद्र और केंद्रीय वीर्य संग्रहालय सहित विभाग की विभिन्न इकाइयों में पहले से पर्याप्त संख्या में पशु चिकित्सक कार्यरत हैं।
कांग्रेस नेता ने दावा किया कि छत्तीसगढ़ शासन एवं संचालनालय की ओर से संलग्नीकरण समाप्त करने के स्पष्ट निर्देश जारी किए जा चुके हैं। इसके बावजूद यदि अधिकारियों द्वारा नियमों की अनदेखी कर संलग्नीकरण जारी रखा जाता है और विभागीय जवाब में वास्तविक स्थिति से अलग जानकारी प्रस्तुत की जाती है, तो यह प्रशासनिक पारदर्शिता और शासन के निर्देशों के पालन को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है।
उन्होंने संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं से मांग की है कि शिकायत के साथ प्रस्तुत दस्तावेजों और साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच कराई जाए। सभी नियम विरुद्ध संलग्नीकरण तत्काल समाप्त कर संबंधित अधिकारी-कर्मचारियों को उनके मूल पदस्थापना स्थल के लिए कार्यमुक्त किया जाए।
साथ ही उन्होंने उपसंचालक पशु चिकित्सा सेवाएं, अंबिकापुर में पदस्थ डॉ. आर.पी. शुक्ला के विरुद्ध शासन को कथित रूप से गलत जानकारी देने और गुमराह करने के आरोपों की जांच कर नियमानुसार कठोर अनुशासनात्मक कार्रवाई की मांग की है।
फिलहाल शिकायत में लगाए गए आरोपों पर विभाग की ओर से विस्तृत प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। ऐसे में मामले की निष्पक्ष जांच के बाद ही नियम विरुद्ध संलग्नीकरण और शासन को गलत जानकारी दिए जाने संबंधी आरोपों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।


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