Giriraj Singh on Vande Mataram: देश की राजनीति में राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर जारी सियासी बहस लगातार तेज होती जा रही है। सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेता इस मुद्दे पर अपने-अपने तर्क और प्रतिक्रियाएं सामने रख रहे हैं। इसी बीच केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि ‘वंदे मातरम्’ को लेकर देश में एक नई चर्चा की जरूरत है। उन्होंने दावा किया कि वर्ष 1937 में राजनीतिक परिस्थितियों और जिन्ना के दबाव के चलते इसमें बदलाव किया गया था।
‘वंदे मातरम्’ के सभी छह छंदों की वकालत
गिरिराज सिंह ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देश की विरासत को संरक्षित करने के साथ विकास के एजेंडे को आगे बढ़ा रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘वंदे मातरम्’ को केवल दो छंदों तक सीमित करने के बजाय इसके सभी छह छंदों को सम्मान मिलना चाहिए। केंद्रीय मंत्री ने इसे भारत की पहचान और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ते हुए कहा कि देश की पहचान उसकी सनातन परंपरा से अलग नहीं की जा सकती।
भारत की अस्मिता से जोड़ा राष्ट्रगीत
केंद्रीय मंत्री ने ‘वंदे मातरम्’ को भारत की अस्मिता से जोड़ते हुए कहा कि इसमें देश की सांस्कृतिक चेतना और परंपराओं की झलक दिखाई देती है। उनके मुताबिक, इस राष्ट्रगीत को लेकर होने वाली बहस केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि भारत की विरासत और पहचान से भी जुड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि इस मुद्दे पर लोगों को जागरूक करने की आवश्यकता है।
कांग्रेस पर वोट बैंक की राजनीति का आरोप
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि पार्टी को वोटों के बिखरने की चिंता रहती है। उन्होंने दावा किया कि उत्तर प्रदेश में आगामी चुनावों को देखते हुए राजनीतिक समीकरणों का असर भी इस विवाद पर पड़ रहा है। केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि मुस्लिम वोटों को ध्यान में रखकर कांग्रेस की ओर से ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे का विरोध किया जा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि इस तरह का विरोध कांग्रेस के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकता है।
राहुल गांधी पर भी साधा निशाना
गिरिराज सिंह ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी को भी निशाने पर लिया। उन्होंने राहुल गांधी द्वारा पैलेट गन से जुड़े मामले में एफआईआर दर्ज कराने को लेकर सवाल उठाए। केंद्रीय मंत्री ने आरोप लगाया कि ‘वंदे मातरम्’ के मुद्दे से ध्यान हटाने के लिए राहुल गांधी की ओर से यह कदम उठाया गया। हालांकि, इस मामले में कांग्रेस और राहुल गांधी का पक्ष अलग हो सकता है और राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है।
मराठी भाषा को लेकर भी रखी राय
महाराष्ट्र में ऑटो-रिक्शा चालकों के लिए मराठी भाषा में संवाद की अनिवार्यता को लेकर भी गिरिराज सिंह ने अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि जो व्यक्ति जिस राज्य में रहता है, उसे वहां की स्थानीय भाषा सीखने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने महाराष्ट्र सरकार के इस कदम का समर्थन करते हुए कहा कि स्थानीय भाषा का ज्ञान समाज और लोगों के बीच बेहतर संवाद स्थापित करने में मदद कर सकता है।
भाषा सीखने के लिए समय बढ़ाने की मांग
केंद्रीय मंत्री ने हालांकि यह भी कहा कि दूसरे राज्यों से महाराष्ट्र में काम करने आए लोगों को मराठी सीखने के लिए पर्याप्त समय दिया जाना चाहिए। उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि समय-सीमा कुछ बढ़ाई जाए, ताकि लोगों को भाषा सीखने में परेशानी न हो और उन्हें यह शिकायत करने का अवसर न मिले कि उन्हें पर्याप्त समय नहीं दिया गया। उन्होंने भाषा नीति को लागू करने में व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने की बात कही।
नवी मुंबई कार्यक्रम में बोले केंद्रीय मंत्री
गिरिराज सिंह नवी मुंबई में एक उद्घाटन कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे। इसी दौरान उन्होंने ‘वंदे मातरम्’ विवाद, कांग्रेस, राहुल गांधी और महाराष्ट्र में मराठी भाषा की अनिवार्यता सहित कई राजनीतिक और सामाजिक मुद्दों पर अपनी प्रतिक्रिया दी। उनके बयानों के बाद राष्ट्रगीत को लेकर चल रही राजनीतिक बहस के और तेज होने के आसार हैं।
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