अगर आप घर में ताजी और हरी मटर उगाना चाहते हैं, तो इसके लिए बड़े खेत की जरूरत नहीं है। गमले में भी मटर का पौधा आसानी से तैयार किया जा सकता है। सही बीज, मिट्टी, धूप और पानी का ध्यान रखकर बालकनी या छत पर अपनी किचन गार्डन शुरू कर सकते हैं।
अगर आप घर में ताजी और हरी मटर उगाना चाहते हैं, तो इसके लिए बड़े खेत की जरूरत नहीं है। गमले में भी मटर का पौधा आसानी से तैयार किया जा सकता है। सही बीज, मिट्टी, धूप और पानी का ध्यान रखकर बालकनी या छत पर अपनी किचन गार्डन शुरू कर सकते हैं।

Grow Peas at Home : सर्दियों का मौसम आते ही हरी मटर की मांग बढ़ जाती है। मटर पनीर, पुलाव, पराठे और कई तरह की सब्जियों में इसका स्वाद खाने को और बेहतर बना देता है। बाजार में मिलने वाली मटर की गुणवत्ता और उस पर इस्तेमाल होने वाले कीटनाशकों को लेकर कई लोगों को चिंता रहती है। इसके अलावा सीजन की शुरुआत में ताजी मटर महंगी भी मिलती है। ऐसे में आप घर की छत, बालकनी या छोटी सी खुली जगह में गमले के अंदर ताजी मटर उगा सकते हैं।


हरी मटर उगाने के लिए बड़े खेत या विशाल बगीचे की जरूरत नहीं होती। घर में रखे दो-तीन बड़े गमलों में भी इसकी अच्छी पैदावार ली जा सकती है। खास बात यह है कि अगर आपने पहले कभी घर पर सब्जी नहीं उगाई है, तब भी कुछ आसान बातों का ध्यान रखकर मटर का पौधा तैयार कर सकते हैं। सही गमला, अच्छी मिट्टी, पर्याप्त धूप और संतुलित पानी इसके लिए सबसे जरूरी हैं।

मटर उगाने के लिए सबसे पहले सही गमले का चुनाव करें। कम से कम 10 से 12 इंच गहरा और चौड़ा गमला लेना बेहतर रहेगा। गमले के नीचे पानी की निकासी के लिए पर्याप्त ड्रेनेज होल जरूर होना चाहिए। पानी रुकने की स्थिति में मटर की जड़ों को नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए गमले का चयन करते समय जल निकासी का विशेष ध्यान रखें।
मटर के पौधे की अच्छी वृद्धि के लिए उपजाऊ और भुरभुरी मिट्टी जरूरी है। आप गमले में लगभग 50 प्रतिशत सामान्य बगीचे की मिट्टी, 30 प्रतिशत पुरानी गोबर की खाद और 20 प्रतिशत रेत मिला सकते हैं। इस मिश्रण से मिट्टी में पोषक तत्वों के साथ जल निकासी भी बेहतर रहती है। बीज लगाने से पहले मिट्टी को अच्छी तरह मिलाकर गमले में भर दें।
मटर के लिए अच्छी गुणवत्ता वाले बीज किसी भरोसेमंद नर्सरी या प्रमाणित बीज विक्रेता से लेना बेहतर है। बीजों को बोने से पहले करीब 5 से 6 घंटे तक सामान्य पानी में भिगोकर रखें। इससे अंकुरण में मदद मिल सकती है। इसके बाद बीजों को मिट्टी में करीब 1 से 1.5 इंच गहराई पर बोएं और प्रत्येक बीज के बीच लगभग 3 से 4 इंच की दूरी रखें। बीज डालने के बाद हल्का पानी दें।

मटर का पौधा बढ़ने के साथ बेल का रूप लेता है, इसलिए उसे सहारे की जरूरत पड़ती है। जब पौधा लगभग 5 से 6 इंच ऊंचा हो जाए, तो गमले में बांस की पतली डंडियां या जालीदार रस्सी लगाकर सपोर्ट तैयार कर दें। बेल को सहारे पर चढ़ाने से पौधा व्यवस्थित तरीके से बढ़ेगा। इससे बेल के जमीन से संपर्क में आने और नमी के कारण फंगल समस्या का खतरा भी कम हो सकता है।
मटर के पौधे को अच्छी वृद्धि के लिए रोजाना करीब 5 से 6 घंटे धूप मिलना उपयोगी है। इसलिए गमले को ऐसी बालकनी, छत या खुले स्थान पर रखें जहां पर्याप्त सीधी रोशनी आती हो। पानी देते समय भी सावधानी जरूरी है। मिट्टी में हल्की नमी बनाए रखें, लेकिन गमले में पानी जमा न होने दें। मिट्टी की ऊपरी सतह सूखने पर ही आवश्यकता के अनुसार पानी दें।
पौधे की वृद्धि और फलियों के विकास के लिए समय-समय पर जैविक खाद दी जा सकती है। करीब 15 से 20 दिन के अंतराल पर खाद देने से पौधे को जरूरी पोषक तत्व मिल सकते हैं। खाद डालने से पहले मिट्टी की हल्की गुड़ाई करें। फूल आने के बाद जरूरत के अनुसार जैविक लिक्विड फर्टिलाइजर का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।
मटर के पौधे को कीटों से बचाने के लिए नियमित निगरानी जरूरी है। पत्तियों पर कीड़े या अन्य समस्या दिखाई देने पर जैविक उपाय अपनाए जा सकते हैं। नीम के तेल का उचित मात्रा में घोल बनाकर करीब 10 दिन के अंतराल पर छिड़काव किया जा सकता है। किसी भी जैविक या कीटनाशक उत्पाद का इस्तेमाल करते समय उसके लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करना बेहतर है।
बीज बोने के बाद सामान्य परिस्थितियों में करीब 50 से 65 दिनों में पौधे पर फलियां दिखाई देने लग सकती हैं। जब फलियां अच्छी तरह विकसित हो जाएं और उनके अंदर दाने उभरते हुए नजर आने लगें, तब उन्हें सावधानी से हाथ से तोड़ा जा सकता है। इस तरह थोड़ी सी जगह, सही देखभाल और नियमित निगरानी के साथ आप घर पर ताजी हरी मटर उगा सकते हैं।
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