CG High Court: छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पुलिस थानों में लगाए गए CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग और उसके रखरखाव को लेकर सख्त टिप्पणी की है। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि केवल थानों में CCTV कैमरे लगा देना पर्याप्त नहीं है। कैमरों का लगातार चालू रहना, रिकॉर्डिंग ठीक तरीके से होना और निर्धारित अवधि तक फुटेज सुरक्षित रखना भी पुलिस प्रशासन की जिम्मेदारी है। सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार थानों की CCTV रिकॉर्डिंग कम से कम 18 महीने तक सुरक्षित रखी जानी चाहिए।
गौरेला थाने के NDPS मामले में हुई सुनवाई
चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा और जस्टिस रवींद्र कुमार अग्रवाल की डिवीजन बेंच ने यह टिप्पणी गौरेला थाने से जुड़े एक NDPS मामले की सुनवाई के दौरान की। मामला थाने की CCTV फुटेज उपलब्ध नहीं होने से संबंधित था। हाईकोर्ट ने इस मामले में 21 अगस्त 2026 को अपना फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान पुलिस थानों में CCTV व्यवस्था और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों के संरक्षण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर भी चर्चा हुई।
आरोपियों ने मांगी थी CCTV फुटेज
गौरेला थाने में दर्ज NDPS मामले में आरोपी बनवारी लाल गुप्ता समेत चार आरोपियों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। आरोपियों का कहना था कि कथित घटना से एक दिन पहले पुलिस ने उन्हें थाने में बैठाकर रखा था। अपने दावे को मजबूत करने के लिए उन्होंने 13 से 15 सितंबर 2024 के बीच थाने में लगे CCTV कैमरों की रिकॉर्डिंग उपलब्ध कराने की मांग की थी।
मोबाइल CDR और टावर लोकेशन भी मांगी
आरोपियों ने केवल CCTV फुटेज ही नहीं, बल्कि संबंधित अवधि की मोबाइल कॉल डिटेल रिकॉर्ड यानी CDR और टावर लोकेशन उपलब्ध कराने की भी मांग की थी। उनका तर्क था कि इन इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड से यह पता लगाने में मदद मिल सकती है कि घटना से पहले वे कहां थे और उनके साथ पुलिस की ओर से क्या कार्रवाई की गई थी।
18 महीने बाद फुटेज हो गई ऑटोमेटिक डिलीट
ट्रायल कोर्ट में पुलिस की ओर से बताया गया कि मांगी गई अवधि की CCTV रिकॉर्डिंग अब सिस्टम में उपलब्ध नहीं है। पुलिस के अनुसार CCTV सिस्टम में निर्धारित 18 महीने की स्टोरेज अवधि पूरी होने के बाद पुरानी रिकॉर्डिंग अपने आप डिलीट हो गई। इसके कारण संबंधित तारीखों का फुटेज अदालत के सामने पेश नहीं किया जा सका।
उपलब्ध नहीं रिकॉर्डिंग तो पेश करने का आदेश नहीं
हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े रिकॉर्ड और परिस्थितियों को देखने के बाद कहा कि जब संबंधित CCTV फुटेज अब उपलब्ध ही नहीं है, तो उसे अदालत में प्रस्तुत करने का आदेश नहीं दिया जा सकता। इसी आधार पर कोर्ट ने आरोपियों की याचिका को खारिज कर दिया। हालांकि, मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने CCTV व्यवस्था को लेकर व्यापक चिंता भी जताई।
CCTV सिस्टम हर समय चालू रखना जरूरी
हाईकोर्ट ने कहा कि पुलिस थानों में लगाए गए CCTV कैमरों का हर समय चालू रहना आवश्यक है। इसके लिए पर्याप्त तकनीकी व्यवस्था के साथ उचित स्टोरेज क्षमता और पावर बैकअप भी होना चाहिए। कोर्ट ने संकेत दिया कि तकनीकी खराबी, बिजली की समस्या या प्रशासनिक लापरवाही के कारण महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य नष्ट नहीं होने चाहिए।
CCTV से पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित होगी
कोर्ट ने CCTV व्यवस्था के महत्व को रेखांकित करते हुए कहा कि थानों में कैमरे लगाने का उद्देश्य केवल निगरानी करना नहीं है। इनका एक प्रमुख उद्देश्य पुलिस कार्रवाई में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करना भी है। CCTV रिकॉर्डिंग नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करने और किसी घटना की वास्तविक परिस्थितियों को समझने में महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य साबित हो सकती है।
550 पुलिस थानों में मजबूत होगा CCTV सिस्टम
राज्य सरकार ने सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट को बताया कि प्रदेश के करीब 550 पुलिस थानों में CCTV इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में काम चल रहा है। इसके लिए लगभग 102.10 करोड़ रुपये की परियोजना पर काम किया जा रहा है। इस योजना का उद्देश्य थानों में CCTV कैमरों की कार्यक्षमता, रिकॉर्डिंग और स्टोरेज व्यवस्था को बेहतर बनाना है।
हर महीने CCTV व्यवस्था की होगी जांच
सरकार के अनुसार जिला स्तर पर गठित निगरानी समितियां प्रत्येक महीने पुलिस थानों में CCTV सिस्टम की स्थिति की जांच करेंगी। इसके साथ ही यह भी देखा जाएगा कि रिकॉर्डिंग निर्धारित 18 महीने की अवधि तक सुरक्षित रखी जा रही है या नहीं। बिजली और पावर बैकअप की व्यवस्था की निगरानी भी महत्वपूर्ण हिस्सा होगी।
मुख्य सचिव और DGP को भेजी जाएगी आदेश की कॉपी
हाईकोर्ट ने अपने आदेश की प्रति राज्य के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक यानी DGP को भेजने के निर्देश दिए हैं। कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट की CCTV संबंधी गाइडलाइन का पूरी तरह पालन सुनिश्चित करने को कहा है। इससे राज्य के सभी पुलिस थानों में CCTV व्यवस्था को लेकर जवाबदेही और निगरानी और मजबूत होने की उम्मीद है।
पुलिस थानों में इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य का संरक्षण अहम
हाईकोर्ट के निर्देश के बाद अब CCTV कैमरों की कार्यशीलता, रिकॉर्डिंग स्टोरेज और पावर बैकअप की नियमित निगरानी पर ज्यादा जोर रहेगा। कोर्ट की टिप्पणी से यह स्पष्ट है कि पुलिस कार्रवाई से जुड़े इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्यों को सुरक्षित रखना न्यायिक प्रक्रिया और नागरिक अधिकारों दोनों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
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