CG Tourism: रायपुर में पर्यटन, संस्कृति, धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व मंत्री राजेश अग्रवाल ने राज्य के पर्यटन और संस्कृति क्षेत्र की उपलब्धियों तथा आगामी योजनाओं की जानकारी साझा की। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2028 तक छत्तीसगढ़ को प्राकृतिक, सांस्कृतिक, इको-एथनिक और आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाना है। इसके लिए चित्रकोट को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल बनाने, सिरपुर को विश्व धरोहर की दिशा में आगे बढ़ाने और निजी निवेश को आकर्षित करने की योजना पर काम हो रहा है।
प्राकृतिक और सांस्कृतिक विरासत को मिलेगी नई पहचान
मंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को चित्रकोट और तीरथगढ़ जैसे जलप्रपातों, बस्तर और सरगुजा की जनजातीय संस्कृति, सिरपुर की ऐतिहासिक विरासत तथा मां दंतेश्वरी और मां महामाया जैसे आस्था केंद्रों की समृद्ध विरासत प्राप्त है। सरकार इन सभी धरोहरों को पर्यटन के साथ जोड़कर देश-विदेश के पर्यटकों के सामने नई पहचान के साथ प्रस्तुत करना चाहती है।
पर्यटन में निजी निवेश बढ़ाने की तैयारी
राज्य में पर्यटन क्षेत्र को मजबूत करने के लिए निजी निवेश को बढ़ावा दिया जा रहा है। पिछले ढाई वर्षों में फिल्म सिटी निर्माण के लिए करीब 203 करोड़ 53 लाख रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं। फिल्म पर्यटन और बड़े आयोजनों को प्रोत्साहित करने के लिए फिल्म सिटी और कन्वेंशन सेंटर विकसित करने की योजना है, जिसकी अनुमानित लागत करीब 350 करोड़ रुपये बताई गई है।
अयोध्या-काशी दर्शन से जुड़े हजारों श्रद्धालु
रामलला अयोध्या धाम दर्शन योजना के तहत आईआरसीटीसी के सहयोग से अब तक 61 ट्रेनों का संचालन किया गया है। इनके माध्यम से 50 हजार से अधिक श्रद्धालु अयोध्या और काशी की धार्मिक यात्रा कर चुके हैं। सरकार का उद्देश्य प्रदेशवासियों के लिए धार्मिक और आध्यात्मिक पर्यटन को सुविधाजनक और व्यवस्थित बनाना है।
होमस्टे से स्थानीय अर्थव्यवस्था को मिलेगा लाभ
पर्यटन का सीधा लाभ स्थानीय लोगों तक पहुंचाने के लिए होमस्टे और स्थानीय पर्यटन अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दिया जा रहा है। इससे स्थानीय भोजन, हस्तशिल्प और संस्कृति को बाजार मिलेगा तथा युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ेंगे। राज्य में करीब 390 से अधिक टूर ऑपरेटर एवं ट्रैवल एजेंट और 26 होटल पंजीकृत हैं। कम से कम 500 युवाओं को गाइड, आतिथ्य, फिल्म निर्माण, पर्यटन संचालन और डिजिटल कंटेंट जैसे क्षेत्रों में प्रशिक्षित करने का लक्ष्य है।
चित्रकोट और सिरपुर के विकास पर विशेष जोर
चित्रकोट को केवल जलप्रपात के रूप में नहीं, बल्कि एक विश्वस्तरीय पर्यटन गंतव्य के तौर पर विकसित करने की तैयारी है। सिरपुर के लिए एकीकृत मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। इसके अलावा मैनपाट और जशपुर जैसे प्रमुख पर्यटन क्षेत्रों में भी पर्यटक सुविधाओं को बेहतर बनाने पर काम जारी है।
भोरमदेव कॉरिडोर को मिले 145.99 करोड़
धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार ने भोरमदेव कॉरिडोर के विकास के लिए 145 करोड़ 99 लाख रुपये स्वीकृत किए हैं। रतनपुर के महामाया मंदिर क्षेत्र सहित अन्य प्रमुख धार्मिक स्थलों के विकास के प्रस्ताव भी केंद्र सरकार को भेजे गए हैं।
डिजिटल माध्यम से पर्यटन को मिलेगा विस्तार
पर्यटकों की बदलती जरूरतों को देखते हुए पर्यटन विभाग अपनी वेबसाइट और मोबाइल ऐप के माध्यम से ऑनलाइन बुकिंग, डिजिटल जानकारी और अन्य सुविधाओं को एकीकृत कर रहा है। पिछले दो वर्षों में ऑनलाइन बुकिंग से करीब 6 करोड़ 48 लाख रुपये और पर्यटन इकाइयों से लगभग 31 करोड़ 75 लाख रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ है।
18 पर्यटन संपत्तियों में निजी भागीदारी
छत्तीसगढ़ पर्यटन बोर्ड की 18 संपत्तियों को लीज-सह-विकास मॉडल के तहत निजी क्षेत्र के सहयोग से विकसित करने की योजना है। इससे करीब 500 करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित होने की उम्मीद है। साथ ही प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से 500 से 1,000 रोजगार के अवसर पैदा होने की संभावना है।
अंतरराष्ट्रीय मंच पर होगी छत्तीसगढ़ की ब्रांडिंग
सरकार इको-एथनिक, प्राकृतिक और सांस्कृतिक पर्यटन को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ावा देने की तैयारी कर रही है। अंतरराष्ट्रीय पर्यटन मंचों पर भागीदारी, फिल्म और ओटीटी के जरिए प्रचार, विदेशी मीडिया आउटरीच तथा इंटरनेशनल इंफ्लुएंसर फैम टूर जैसे माध्यमों से राज्य की ब्रांडिंग की जाएगी।
कलाकारों के कल्याण पर सरकार का फोकस
संस्कृति विभाग के जरिए कलाकारों और साहित्यकारों को आर्थिक सहायता दी जा रही है। कलाकार कल्याण कोष चिकित्सा अनुदान योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 70 कलाकारों को करीब 30 लाख 3 हजार रुपये की सहायता मिली है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 20 कलाकारों को 15 लाख 30 हजार रुपये दिए जा चुके हैं।
लोक कलाकारों और साहित्यकारों को प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री लोक कलाकार प्रोत्साहन योजना के तहत नृत्य, संगीत, लोकनाट्य, लोकगाथा, छत्तीसगढ़ी लेखन और विभिन्न लोककलाओं से जुड़े कलाकारों को संरक्षण दिया जा रहा है। पिछले ढाई वर्षों में 87 कलाकारों को लगभग 19 लाख 8 हजार रुपये की सहायता प्रदान की गई है।
407 वरिष्ठ कलाकारों को पेंशन का लाभ
वरिष्ठ कलाकारों और साहित्यकारों के लिए संचालित मासिक वित्तीय सहायता योजना के तहत पिछले ढाई वर्षों में 407 जरूरतमंद वरिष्ठ कलाकारों एवं साहित्यकारों को कुल 82 लाख 12 हजार रुपये की पेंशन दी गई है। मौजूदा वर्ष में अब तक 121 लाभार्थियों को योजना का लाभ मिल चुका है।
89 मेला-मड़ई और उत्सवों से संस्कृति का संरक्षण
राज्य के विभिन्न जिलों में 89 प्रमुख मेला-मड़ई, उत्सव और सांस्कृतिक समारोह आयोजित किए जा रहे हैं। जनजातीय संस्कृति को संरक्षित करने के लिए ‘आदि पर्व’ पंचांग तैयार किया जा रहा है, जिसमें स्थानीय परंपराओं, तीज-त्योहारों, यात्राओं और ऐतिहासिक-धार्मिक स्थलों से जुड़े सांस्कृतिक आयोजनों को शामिल किया जाएगा।
बस्तर पंडुम से जनजातीय परंपराओं को पहचान
बस्तर की लोकपरंपरा को व्यापक मंच देने के लिए पिछले दो वर्षों से ग्रामीण, ब्लॉक और जिला स्तर पर बस्तर पंडुम का आयोजन किया जा रहा है। बस्तर पंडुम-2026 के विजेता कलाकार दलों, मांझी-चालकी प्रतिनिधियों और पद्मश्री विभूतियों समेत 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को राष्ट्रपति भवन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु से मुलाकात और सम्मान का अवसर मिला।
लोककलाओं को नई पीढ़ी से जोड़ने की पहल
पावस प्रसंग, रंगतरंग, रंगपरब और लोकरंग पर्व जैसे आयोजनों के जरिए शास्त्रीय संगीत, नृत्य, लोकवाद्य और लोकनाट्य को मंच दिया जा रहा है। पंडवानी, भरथरी, ददरिया, जसगीत, करमा, पंथी, बांसगीत और देवारगीत जैसी पारंपरिक विधाओं को भी बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि नई पीढ़ी अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जुड़ी रहे।
लोकसंस्कृति का तैयार होगा डिजिटल आर्काइव
प्रदेश की लोककलाओं, लोकगीतों, जनजातीय परंपराओं और ऐतिहासिक धरोहरों को डिजिटल स्वरूप में संरक्षित करने के लिए विस्तृत आर्काइव तैयार किया जा रहा है। इसका उद्देश्य सांस्कृतिक विरासत को भविष्य की पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना और शोधकर्ताओं तथा आम लोगों के लिए इसे सुलभ बनाना है।
सांस्कृतिक संस्थाओं को करोड़ों की आर्थिक सहायता
कला और साहित्य के क्षेत्र में सक्रिय अशासकीय संस्थाओं को भी सरकार आर्थिक सहयोग दे रही है। पिछले ढाई वर्षों में 363 निजी संस्थाओं को 854 सांस्कृतिक कार्यक्रमों के लिए 7 करोड़ 85 लाख 3 हजार रुपये से अधिक की अनुदान राशि स्वीकृत की गई है।
नई फिल्म नीति पर भी चल रहा काम
प्रदेश में फिल्म निर्माण को प्रोत्साहित करने के लिए छत्तीसगढ़ फिल्म नीति-2021 में संशोधन की प्रक्रिया जारी है। नई नीति के जरिए प्रदेश के प्राकृतिक स्थलों पर फिल्मों की शूटिंग को बढ़ावा देने और पात्र फिल्मों को सब्सिडी उपलब्ध कराने की योजना है। इससे फिल्म पर्यटन और स्थानीय रोजगार दोनों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
सिरपुर को यूनेस्को की दिशा में आगे बढ़ाने की तैयारी
पुरातात्विक और ऐतिहासिक दृष्टि से महत्वपूर्ण सिरपुर को विश्व धरोहर के रूप में स्थापित करने की दिशा में काम हो रहा है। यहां बौद्ध, जैन और हिंदू स्थापत्य परंपराओं का अनूठा संगम दिखाई देता है। सिरपुर विशेष क्षेत्र विकास प्राधिकरण द्वारा यूनेस्को के मानकों के अनुरूप नॉमिनेशन डोजियर तैयार कर भारत सरकार को सौंपा गया है।
63 संरक्षित स्मारकों का होगा संरक्षण
प्रदेश के 63 राज्य संरक्षित स्मारकों के संरक्षण और विकास पर काम किया जा रहा है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में 12 स्मारकों में संरक्षण, उन्नयन और पर्यटक सुविधाओं के विकास के लिए फेसलिफ्टिंग योजना तैयार की जा रही है। सरकार का जोर धरोहर संरक्षण के साथ स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार बढ़ाने पर भी है।
रायपुर संग्रहालय में नई गैलरी का प्रस्ताव
महंत घासीदास स्मारक संग्रहालय, रायपुर के उन्नयन के लिए नई रियासत गैलरी स्थापित करने की योजना है। पुरखौती मुक्तांगन में लाइट एंड साउंड शो और शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रम शुरू करने की दिशा में भी तैयारी चल रही है। इनमें शहीद वीर नारायण सिंह, गुंडाधुर जैसे जनजातीय नायकों और छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक विरासत को प्रमुखता दी जाएगी।
12 लाख पृष्ठों का डिजिटल रिकॉर्ड तैयार
छत्तीसगढ़ से जुड़े करीब 12 लाख पृष्ठों का डिजिटलीकरण कर रायपुर लाया गया है। इन अभिलेखों को वेब अभिलेखागार पोर्टल के जरिए आम नागरिकों, विद्यार्थियों और शोधकर्ताओं के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी है। इसके लिए कैटलॉग और मेटाडेटा तैयार किया जा रहा है।
2750 साल पुरानी बसाहट के प्रमाण
पुरातत्व विभाग ने अब तक 11 पुरास्थलों का उत्खनन कराया है। रायपुर जिले के आरंग क्षेत्र में लखौली के पास रीवां के मृत्तिकागढ़ में खुदाई के दौरान लगभग 2750 वर्ष पुरानी मानव बसाहट के प्रमाण मिले हैं। यहां प्रारंभिक ऐतिहासिक काल से कलचुरी काल तक के अवशेष और विभिन्न राजवंशों के सोने, चांदी तथा तांबे के सिक्के भी मिले हैं।
पर्यटन और संस्कृति से रोजगार बढ़ाने का लक्ष्य
मंत्री राजेश अग्रवाल ने कहा कि सरकार के लिए पर्यटन विकास का अर्थ केवल नए पर्यटन स्थल बनाना नहीं है। इसके साथ स्थानीय रोजगार, आर्थिक गतिविधियां, कलाकारों का कल्याण और सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण भी महत्वपूर्ण है। सरकार पर्यटन को स्थानीय समुदायों की भागीदारी से जोड़कर दीर्घकालिक विकास का माध्यम बनाना चाहती है।
2028 तक वैश्विक पहचान दिलाने का लक्ष्य
छत्तीसगढ़ सरकार वर्ष 2028 तक प्रदेश को प्राकृतिक, सांस्कृतिक, इको-एथनिक और आध्यात्मिक पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। चित्रकोट, सिरपुर, भोरमदेव और रतनपुर जैसे प्रमुख स्थलों के विकास के साथ बस्तर की जनजातीय संस्कृति, लोककलाओं और ऐतिहासिक अभिलेखों को भी वैश्विक मंच पर पहुंचाने की योजना है। सरकार की कोशिश है कि पर्यटन विकास के जरिए प्रदेश की सांस्कृतिक पहचान मजबूत होने के साथ स्थानीय लोगों के लिए रोजगार और आय के नए अवसर भी तैयार हों।
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