Hockey World Cup : डिफेंडिंग चैंपियन जर्मनी ने शानदार प्रदर्शन करते हुए FIH मेंस हॉकी वर्ल्ड कप के फाइनल में स्पेन को 1-0 से मात दे दी। इस जीत के साथ जर्मनी ने टूर्नामेंट के इतिहास में अपना चौथा खिताब हासिल कर लिया है। जर्मनी ने पूरे मुकाबले में बेहतरीन अनुशासन और मजबूत डिफेंस का प्रदर्शन किया। खिताब जीतने के साथ ही जर्मनी ने पाकिस्तान के चार वर्ल्ड कप खिताबों के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली और दोनों टीमें अब संयुक्त रूप से सबसे सफल टीम बन गई हैं।
44वें मिनट में मिशेल स्ट्रुथॉफ ने किया निर्णायक गोल
फाइनल मुकाबले का एकमात्र गोल जर्मनी के मिशेल स्ट्रुथॉफ ने 44वें मिनट में दागा। उनके इस गोल ने मैच का रुख बदल दिया और जर्मनी को निर्णायक बढ़त दिला दी। इसके बाद स्पेन ने बराबरी करने के लिए लगातार कोशिश की, लेकिन जर्मनी के डिफेंस ने उसके सभी प्रयासों को नाकाम कर दिया। अंतिम सीटी बजने तक जर्मनी ने अपनी 1-0 की बढ़त कायम रखी।
पहले हाफ में दोनों टीमों के बीच कड़ा मुकाबला
मैच के शुरुआती दो क्वार्टर में दोनों टीमों के बीच जबरदस्त प्रतिस्पर्धा देखने को मिली। जर्मनी ने दूसरे मिनट में ही पेनल्टी कॉर्नर हासिल कर बढ़त लेने का प्रयास किया, लेकिन बेनेडिक्ट श्वार्जहॉप्ट के शॉट को स्पेनिश गोलकीपर ने शानदार तरीके से रोक दिया। इसके बाद स्पेन ने भी जवाबी हमले किए, लेकिन जर्मन डिफेंस के सामने उसे सफलता नहीं मिली। पहले हाफ के अंत तक स्कोर 0-0 रहा।
तीसरे क्वार्टर में स्पेन ने बनाए कई मौके
तीसरे क्वार्टर में स्पेन ने जर्मनी के गोल पर लगातार दबाव बनाया। इस दौरान स्पेन की ओर से जर्मन गोल पर करीब दस हमले किए गए, लेकिन जर्मनी की रक्षापंक्ति ने सभी प्रयासों को रोक दिया। दोनों टीमों को पहले 15 मिनट में एक-एक पेनल्टी कॉर्नर भी मिला, लेकिन कोई भी टीम उसका फायदा नहीं उठा सकी। इसके बावजूद जर्मनी ने अपना संयम बनाए रखा।
जर्मनी ने चौथी बार विश्व कप खिताब जीता
जर्मनी इससे पहले 2002 में कुआलालंपुर, 2006 में मोनचेंग्लादबाख और 2023 में भुवनेश्वर में हॉकी वर्ल्ड कप का खिताब जीत चुका है। चौथी बार ट्रॉफी अपने नाम करने के साथ जर्मनी ने पाकिस्तान के रिकॉर्ड की बराबरी कर ली है। पाकिस्तान ने 1971, 1978, 1982 और 1994 में चार बार विश्व कप खिताब जीता था। अब दोनों टीमें संयुक्त रूप से चार-चार खिताब के साथ शीर्ष पर हैं।
स्पेन का पहला विश्व कप खिताब जीतने का सपना टूटा
स्पेन ने 1998 के बाद पहली बार हॉकी वर्ल्ड कप के फाइनल में जगह बनाई थी। यह कुल मिलाकर उसका तीसरा फाइनल था। टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए खिताबी मुकाबले तक का सफर तय किया, लेकिन जर्मनी के खिलाफ उसे 1-0 से हार का सामना करना पड़ा। इस हार के साथ स्पेन का पहली बार वर्ल्ड कप चैंपियन बनने का इंतजार और लंबा हो गया।
सेमीफाइनल में जर्मनी और स्पेन ने दर्ज की थी जीत
फाइनल तक पहुंचने के लिए स्पेन ने एम्स्टेलवीन में सह-मेजबान नीदरलैंड्स को रोमांचक मुकाबले में 4-3 से हराया था। वहीं जर्मनी ने वावरे में खेले गए दूसरे सेमीफाइनल में अर्जेंटीना को 2-1 से शिकस्त देकर फाइनल में प्रवेश किया। दोनों टीमों के शानदार प्रदर्शन के बाद खिताबी मुकाबला बेहद रोमांचक माना जा रहा था।
अर्जेंटीना ने नीदरलैंड्स को हराकर जीता ब्रॉन्ज मेडल
ब्रॉन्ज मेडल मुकाबले में अर्जेंटीना ने नीदरलैंड्स को 2-1 से हराकर कांस्य पदक अपने नाम किया। अर्जेंटीना के लिए टॉमस डोमेने ने 41वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर को गोल में बदलकर टीम को बढ़त दिलाई। इसके बाद नीदरलैंड्स के मिडफील्डर फ्लोरिस मिडेनडॉर्प ने 49वें मिनट में गोल कर स्कोर बराबर कर दिया।
कप्तान मैथियास रे ने आखिरी मिनट में दिलाई जीत
मैच के अंतिम क्षण बेहद रोमांचक रहे। हूटर बजने से कुछ सेकंड पहले अर्जेंटीना को लगातार तीन पेनल्टी कॉर्नर मिले, लेकिन वह उन्हें गोल में नहीं बदल सका। इसके बाद अर्जेंटीना के कप्तान मैथियास रे ने 59वें मिनट में पेनल्टी कॉर्नर पर गोल दागकर टीम को 2-1 की निर्णायक बढ़त दिला दी। अपना छठा वर्ल्ड कप खेल रहे रे का यह गोल अर्जेंटीना के ब्रॉन्ज मेडल जीतने में निर्णायक साबित हुआ।
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