Rice Crop Pest Alert: धान में पत्ती मोड़क और पीला तना छेदक का खतरा, ऐसे करें फसल की सुरक्षा

छत्तीसगढ़ में धान की फसल इस समय करीब 45 दिन या उससे अधिक की हो चुकी है और मौसम की परिस्थितियां कुछ कीटों के लिए अनुकूल हो सकती हैं। ICAR-NIBSM ने किसानों को पत्ती मोड़क यानी लीफ फोल्डर की नियमित निगरानी की सलाह दी है। आगे पीला तना छेदक भी चुनौती बन सकता है।

Rice Crop Pest Alert: धान की रोपाई के करीब एक से दो महीने बाद फसल की बढ़वार तेजी से शुरू हो जाती है। इसी दौरान खेतों में कई तरह के कीट और रोग फसल को नुकसान पहुंचा सकते हैं। तना छेदक और पत्ता लपेटक धान के प्रमुख कीटों में शामिल हैं। समय रहते इनकी पहचान और नियंत्रण नहीं किया गया तो उत्पादन पर गंभीर असर पड़ सकता है। बिहार कृषि विभाग ने किसानों को फसल की नियमित निगरानी करने और शुरुआती लक्षण दिखते ही जरूरी कदम उठाने की सलाह दी है।

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तना छेदक कीट की ऐसे करें पहचान

तना छेदक कीट धान के पौधे के तने के भीतर प्रवेश कर मुलायम हिस्से को नुकसान पहुंचाता है। शुरुआत में इसका प्रकोप आसानी से नजर नहीं आता, लेकिन बाद में पौधे का गभ्भा सूखने लगता है। फसल में बालियां निकलने के समय प्रभावित पौधों की बालियां सफेद दिखाई दे सकती हैं। ऐसी बालियां आसानी से खींचकर बाहर निकल जाती हैं। खेत में इस तरह के लक्षण दिखने पर किसान तना छेदक के संभावित प्रकोप को लेकर सतर्क हो जाएं।

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फेरोमोन ट्रैप से करें निगरानी

तना छेदक की निगरानी के लिए खेत में प्रति हेक्टेयर 8 से 10 फेरोमोन ट्रैप लगाए जा सकते हैं। इनका इस्तेमाल कीटों की मौजूदगी और संख्या पर नजर रखने में मदद करता है। जरूरत के अनुसार उचित कीटनाशक का प्रयोग भी किया जा सकता है। कृषि विभाग की अनुशंसाओं के मुताबिक कार्बोफ्यूरान 3 जी, फिप्रोनिल 0.3 जी या कार्टैप हाइड्रोक्लोराइड 4 जी का निर्धारित मात्रा में इस्तेमाल किया जा सकता है।

बालियां निकलने पर छिड़काव जरूरी

धान में बालियां निकलने की अवस्था में तना छेदक का प्रकोप दिखाई देने पर कुछ अनुशंसित कीटनाशकों का छिड़काव किया जा सकता है। इनमें ऐसिफेट 75 प्रतिशत एसपी, फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एससी, क्लोरपाइरीफॉस 50 प्रतिशत और साइपरमेथ्रिन 5 प्रतिशत ईसी, लेम्बडा साइहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत ईसी तथा क्विनालफॉस 25 प्रतिशत ईसी शामिल हैं। किसानों को किसी भी दवा का इस्तेमाल स्थानीय कृषि विभाग की सलाह और उत्पाद के लेबल निर्देशों के अनुसार ही करना चाहिए।

पत्ता लपेटक कीट से भी रहें सतर्क

धान की फसल में पत्ता लपेटक भी किसानों के लिए परेशानी का कारण बन सकता है। यह हरे रंग का कीट पत्तियों को दोनों किनारों से रेशमी धागे की मदद से जोड़कर उनके भीतर छिप जाता है। इसके बाद यह पत्ती के हरे हिस्से को खाता है। इससे पत्तियों पर क्षति के निशान दिखाई देते हैं और पौधे की प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया प्रभावित होती है। अधिक प्रकोप होने पर पौधों की वृद्धि और उत्पादन दोनों प्रभावित हो सकते हैं।

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मित्र कीटों का संरक्षण है जरूरी

पत्ता लपेटक के नियंत्रण के लिए कृषि विभाग ने सबसे पहले खेत में मौजूद मित्र कीटों के संरक्षण पर जोर दिया है। आवश्यकता होने पर नीम आधारित एजाडिरेक्टिन 1500 पीपीएम का निर्धारित मात्रा में छिड़काव किया जा सकता है। इसके अलावा विभागीय सलाह के अनुसार क्लोरपाइरीफॉस 20 प्रतिशत ईसी, लेम्बडा साइहेलोथ्रिन 5 प्रतिशत ईसी या क्विनालफॉस 25 प्रतिशत ईसी का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

किसान इन बातों का रखें ध्यान

धान की फसल को कीटों से बचाने के लिए खेत की नियमित निगरानी सबसे जरूरी है। सूखी या सफेद बालियां, मुड़ी हुई पत्तियां और पत्तियों के भीतर छिपे कीट दिखाई दें तो तुरंत फसल की जांच करनी चाहिए। किसान फेरोमोन ट्रैप, प्रकाश फंदे, बर्ड पर्चर और मित्र कीटों के संरक्षण जैसे उपायों को भी प्राथमिकता दे सकते हैं। रासायनिक दवाओं का इस्तेमाल करते समय निर्धारित मात्रा और लेबल पर दिए निर्देशों का पालन करना जरूरी है। समस्या गंभीर होने पर किसान पौधा संरक्षण अधिकारी, जिला कृषि पदाधिकारी या कृषि समन्वयक से विशेषज्ञ सलाह ले सकते हैं।

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Chandan Das

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