Nepal Flood: नेपाल में आई भीषण बाढ़ और मलबे की घटना के बाद कई भारतीय नागरिकों का अब तक पता नहीं चल पाया है। लापता लोगों की पहचान और उनके परिवारों तक सही जानकारी पहुंचाने के लिए अब डीएनए मिलान की प्रक्रिया शुरू की जा रही है। इसी सिलसिले में चीन के बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास ने लापता भारतीय नागरिकों के परिजनों से डीएनए सैंपल उपलब्ध कराने की अपील की है।
चीनी अधिकारी स्वीकार करेंगे DNA सैंपल
भारतीय दूतावास के अनुसार, चीन के संबंधित अधिकारियों ने पुष्टि की है कि वे आपदा के बाद लापता भारतीय नागरिकों की पहचान में मदद के लिए उनके परिजनों के डीएनए सैंपल स्वीकार कर सकते हैं। परिवारों से कहा गया है कि वे डीएनए से संबंधित जरूरी जानकारी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त CODIS फॉर्मेट में भारतीय दूतावास को उपलब्ध कराएं।
बरामद शवों और अवशेषों से होगा DNA मिलान
दूतावास को प्राप्त डीएनए संबंधी जानकारी और प्रोफाइल को चीनी अधिकारियों के साथ साझा किया जाएगा। इसके बाद इन नमूनों का मिलान आपदा के बाद बरामद किए गए शवों या मानव अवशेषों से प्राप्त डीएनए नमूनों के साथ किया जाएगा। यदि किसी लापता भारतीय नागरिक के परिजन के सैंपल से डीएनए मैच होता है, तो इसकी जानकारी संबंधित परिवार को दी जाएगी।
सबसे पहले माता-पिता के सैंपल की प्राथमिकता
दूतावास ने डीएनए सैंपल लेने के लिए रिश्तेदारों की प्राथमिकता भी स्पष्ट की है। सबसे पहले लापता व्यक्ति के माता-पिता के सैंपल लेने की सलाह दी गई है। इसके अलावा पति या पत्नी तथा बच्चों के नमूने भी उपयोगी हो सकते हैं। जहां संभव हो, परिवार से एक से अधिक बच्चों के सैंपल उपलब्ध कराने को भी कहा गया है।
माता-पिता नहीं तो भाई-बहनों से लिया जाएगा DNA
यदि लापता व्यक्ति के माता-पिता या बच्चे उपलब्ध नहीं हैं, तो उनके भाई-बहनों के डीएनए सैंपल लिए जा सकते हैं। दूतावास ने ऐसे मामलों में सभी उपलब्ध भाई-बहनों के सैंपल को प्राथमिकता देने की बात कही है। जरूरत पड़ने पर मातृ या पितृ पक्ष के अन्य रिश्तेदारों, जैसे चचेरे भाई-बहनों के नमूने भी लिए जा सकते हैं। ऐसे मामलों में रिश्ते की जानकारी स्पष्ट रूप से दर्ज करना जरूरी होगा।
DNA प्रोफाइल के लिए जरूरी है STR डेटा
दूतावास ने बताया कि डीएनए सैंपल के साथ संबंधित व्यक्ति का STR डेटा जरूरी होगा। पुरुष रिश्तेदारों के मामले में Y-STR डेटा भी शामिल किया जाना है। पूरी जानकारी CODIS फॉर्मेट में तैयार करके भारतीय दूतावास को भेजनी होगी। सैंपल की पहचान के लिए भी निर्धारित प्रारूप का पालन करना जरूरी है।
सैंपल में कौन-कौन सी जानकारी देनी होगी
निर्धारित फॉर्मेट में लापता व्यक्ति की राष्ट्रीयता, नाम और पासपोर्ट नंबर जैसी जानकारी शामिल करनी होगी। इसके साथ डीएनए सैंपल देने वाले परिवार के सदस्य का नाम, पासपोर्ट नंबर और सैंपल आईडी भी दर्ज करनी होगी। सही और पूरी जानकारी उपलब्ध कराने से डीएनए मिलान की प्रक्रिया को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
शवों की पहचान में DNA बनेगा अहम जरिया
भीषण बाढ़ और मलबे के बाद बरामद हो रहे कई शवों और मानव अवशेषों की सामान्य तरीके से पहचान करना मुश्किल हो सकता है। ऐसी परिस्थितियों में DNA प्रोफाइलिंग किसी व्यक्ति की पहचान सुनिश्चित करने का वैज्ञानिक तरीका है। नेपाल में भी लापता लोगों के परिजनों से डीएनए सैंपल जुटाए जा रहे हैं, ताकि बरामद मानव अवशेषों की पहचान की जा सके।
बाढ़ और मलबे ने मचाई भारी तबाही
इस प्राकृतिक आपदा का असर नेपाल और तिब्बत से लगे सीमावर्ती क्षेत्रों में भी देखने को मिला है। 26 अगस्त को ग्लेशियर या बर्फ-चट्टान से जुड़ी घटना के बाद आई बाढ़ और मलबे ने कई इलाकों में भारी नुकसान पहुंचाया। सड़कें, पुल, मकान और अन्य बुनियादी ढांचे प्रभावित हुए हैं। इस तबाही के बाद बड़ी संख्या में लोगों की तलाश और पहचान का काम चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।
परिवार दूतावास से कर सकते हैं संपर्क
डीएनए सैंपल और पूरी प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी के लिए लापता भारतीयों के परिवार बीजिंग स्थित भारतीय दूतावास से संपर्क कर सकते हैं। दूतावास ने इसके लिए +86 18514284905 फोन नंबर और cons1.beijing@mea.gov.in ईमेल उपलब्ध कराया है। डीएनए मिलान की यह प्रक्रिया उन परिवारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, जो आपदा के बाद से अपने प्रियजनों की सुरक्षित वापसी या उनके बारे में निश्चित जानकारी का इंतजार कर रहे हैं।
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