Sonam Wangchuk : गृह मंत्रालय बैठक के बाद सोनम वांगचुक की चेतावनी, मांगें नहीं मानीं तो आंदोलन तेज होगा

गृह मंत्रालय के साथ अहम बातचीत के बाद सोनम वांगचुक ने लद्दाख की पुरानी मांगों पर रुख साफ किया है। अगर केंद्र से ठोस समाधान नहीं निकलता है, तो आंदोलन का रास्ता फिर खुल सकता है। अब सवाल यह है कि बातचीत के बाद वांगचुक और समर्थकों की अगली रणनीति क्या होगी।

Sonam Wangchuk : लद्दाख के भविष्य और लोकतांत्रिक व्यवस्था को लेकर केंद्र सरकार और क्षेत्र के प्रतिनिधियों के बीच हुई बैठक में कोई ठोस सहमति नहीं बन सकी। गृह मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों और लेह एपेक्स बॉडी (LAB) तथा कारगिल डेमोक्रेटिक अलायंस (KDA) की सब-कमेटी के बीच हुई बातचीत के बाद लद्दाख प्रतिनिधिमंडल ने निराशा जताई। प्रतिनिधियों के अनुसार करीब चार महीने बाद हुई इस बैठक में भी सरकार की ओर से प्रस्तावित लोकतांत्रिक ढांचे का कोई लिखित मसौदा पेश नहीं किया गया।

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चार महीने बाद हुई महत्वपूर्ण बैठक

लद्दाख के सामाजिक कार्यकर्ता और LAB से जुड़े सोनम वांगचुक ने बताया कि इससे पहले केंद्र और प्रतिनिधियों के बीच 22 मई को बैठक हुई थी। उस समय उम्मीद जताई गई थी कि गृह मंत्रालय पिछली बैठकों में हुई चर्चाओं के आधार पर लद्दाख के लिए प्रस्तावित राजनीतिक एवं लोकतांत्रिक व्यवस्था का ठोस ड्राफ्ट सामने रखेगा। हालांकि, वांगचुक के मुताबिक इस बार भी ऐसा कोई लिखित प्रस्ताव नहीं दिया गया।

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सरकार ने प्रतिनिधिमंडल को सवालों की सूची दी

सोनम वांगचुक के अनुसार बैठक के दौरान प्रतिनिधिमंडल को विभिन्न मुद्दों से संबंधित सवालों की एक सूची सौंपी गई। अधिकारियों ने संकेत दिया कि इन सवालों पर अगली बैठक में विस्तार से चर्चा की जाएगी। वांगचुक का कहना है कि विधानसभा, प्रत्यक्ष परिसीमन और चुनाव जैसे मुद्दों पर पहले भी बातचीत हो चुकी है। इसलिए उन्हें बैठक में अपेक्षित नई प्रगति देखने को नहीं मिली।

अक्टूबर में कारगिल में अगली बैठक संभव

बैठक के दौरान अगली बातचीत अक्टूबर के पहले सप्ताह में कारगिल में आयोजित करने पर सहमति बनने की जानकारी सामने आई है। लद्दाख प्रतिनिधिमंडल को उम्मीद है कि अगली बैठक में क्षेत्र के लिए प्रस्तावित लोकतांत्रिक ढांचे को लेकर सरकार अधिक स्पष्टता दिखाएगी। प्रतिनिधियों की कोशिश है कि अगली बातचीत केवल चर्चा तक सीमित न रहे, बल्कि केंद्र की ओर से कोई ठोस प्रस्ताव भी सामने आए।

जल्द विधानसभा गठन की मुख्य मांग

वांगचुक ने बताया कि प्रतिनिधिमंडल की सबसे प्रमुख मांग लद्दाख में जल्द से जल्द लोकतांत्रिक तरीके से चुनी गई विधानसभा स्थापित करना है। उनका कहना है कि इसके लिए प्रस्ताव को संसद के आगामी शीतकालीन सत्र में पेश किया जाना चाहिए। इसके बाद चुनाव और अन्य लोकतांत्रिक संस्थाओं के गठन की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा सकती है।

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हिंसा पीड़ितों के मुआवजे पर सकारात्मक संकेत

बैठक में एक मुद्दे पर सकारात्मक चर्चा होने की बात भी सामने आई है। वांगचुक के अनुसार 24 सितंबर 2025 की घटनाओं में मारे गए और घायल हुए लोगों के लिए मुआवजे पर सरकार ने सहमति जताई है। अधिकारियों ने प्रतिनिधिमंडल को बताया कि मुआवजे को मंजूरी मिल चुकी है और जल्द इसकी घोषणा की जा सकती है। हालांकि, प्रदर्शनकारियों के खिलाफ दर्ज मामलों को लेकर अभी पूरी स्थिति स्पष्ट नहीं है।

सभी मामलों की एकमुश्त वापसी की मांग

लद्दाख प्रतिनिधिमंडल ने आंदोलन से जुड़े लोगों के खिलाफ दर्ज मामलों को चरणबद्ध तरीके से वापस लेने के प्रस्ताव पर असहमति जताई है। वांगचुक के मुताबिक प्रतिनिधिमंडल चाहता है कि सभी संबंधित मामले एक साथ वापस लिए जाएं। सरकार ने इस मांग पर विचार करने की बात कही है, लेकिन अभी इसे पूरी तरह स्वीकार किए जाने की पुष्टि नहीं हुई है।

बड़े प्रशासनिक फैसलों पर रोक की मांग

LAB और KDA ने मांग की है कि जब तक लद्दाख में चुनी हुई लोकतांत्रिक संस्था अस्तित्व में नहीं आती, तब तक क्षेत्र की मौजूदा स्थिति या स्वरूप को बदलने वाला कोई बड़ा फैसला न लिया जाए। प्रतिनिधियों ने भूमि हस्तांतरण, प्रशासनिक ढांचे और क्षेत्र की स्थिति को प्रभावित करने वाले स्थायी फैसलों पर रोक लगाने की मांग सरकार के सामने लिखित रूप में रखी है।

आंदोलन नहीं चाहते, बातचीत को प्राथमिकता

वांगचुक के अनुसार गृह मंत्रालय ने कुछ फैसलों को अपने सीधे अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने केंद्र शासित प्रदेश प्रशासन के मुख्य सचिव के सामने अपनी आपत्तियां दर्ज कराईं। उन्होंने कहा कि यदि लद्दाख की मांगों और चिंताओं को नजरअंदाज किया गया, तो आंदोलन का विकल्प खुला रहेगा। हालांकि, प्रतिनिधिमंडल फिलहाल संघर्ष नहीं चाहता और बातचीत से समाधान की उम्मीद कर रहा है।

एक साल में विधानसभा गठन की उम्मीद

वांगचुक का दावा है कि यदि लोकतांत्रिक व्यवस्था से जुड़ा प्रस्ताव शीतकालीन सत्र में संसद के सामने आता है और इसके बाद चुनाव तथा जिला परिषदों समेत अन्य संस्थाओं के गठन की प्रक्रिया शुरू होती है, तो करीब एक वर्ष में लद्दाख में चुनी हुई विधानसभा स्थापित की जा सकती है। प्रतिनिधिमंडल का कहना है कि स्थानीय लोगों की निर्णय प्रक्रिया में भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए मजबूत लोकतांत्रिक संस्था जरूरी है।

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Chandan Das

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