BRICS Summit 2026 : ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान शुक्रवार को दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए नई दिल्ली पहुंचे। भारत की मेजबानी में आयोजित होने वाले इस महत्वपूर्ण सम्मेलन के लिए राजधानी पहुंचने पर ईरानी राष्ट्रपति का भव्य स्वागत किया गया। उनकी भारत यात्रा को दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से होगी द्विपक्षीय बातचीत
भारत पहुंचने के बाद राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात करेंगे। दोनों नेताओं के बीच होने वाली बैठक में भारत और ईरान के संबंधों से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। बातचीत में आर्थिक सहयोग, व्यापार, निवेश, क्षेत्रीय परिस्थितियों और दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाने के रास्तों पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है।
पेजेशकियान की पहली भारत यात्रा क्यों महत्वपूर्ण
राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की यह पहली भारत यात्रा है। यह दौरा ऐसे समय हो रहा है जब पश्चिम एशिया में तनाव लगातार बना हुआ है और अमेरिका ने ईरान के खिलाफ नए दंडात्मक आर्थिक उपाय लागू किए हैं। ऐसे माहौल में ईरानी राष्ट्रपति का भारत दौरा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद को नई दिशा देने वाला माना जा रहा है। भारत लगातार पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की आवश्यकता पर जोर देता रहा है।
डॉलर पर निर्भरता घटाने पर ईरान का जोर
नई दिल्ली रवाना होने से पहले पेजेशकियान ने ब्रिक्स देशों के बीच आर्थिक सहयोग को मजबूत करने की जरूरत पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सदस्य देशों को अपनी आर्थिक क्षमता और आपसी निवेश बढ़ाने पर ध्यान देना चाहिए। ईरानी राष्ट्रपति ने ब्रिक्स के तहत गठित विशेष बैंक का भी उल्लेख किया और कहा कि इसके जरिए सदस्य देशों के बीच वित्तीय सहयोग को बढ़ावा दिया जा सकता है।
ब्रिक्स में स्थानीय मुद्राओं से लेनदेन की चर्चा
पेजेशकियान ने संकेत दिया कि ब्रिक्स देशों के बीच व्यापार और निवेश को अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता से बाहर निकालने के प्रयासों पर चर्चा हो सकती है। उनका मानना है कि सदस्य देशों के बीच वैकल्पिक वित्तीय व्यवस्था विकसित होने से आपसी लेन-देन को अधिक स्वतंत्र तरीके से आगे बढ़ाया जा सकेगा। इससे अमेरिकी डॉलर के माध्यम से पैदा होने वाले एकतरफावाद को कम करने में भी मदद मिल सकती है।
खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा पर रहेगा सम्मेलन का फोकस
भारत की मेजबानी में शनिवार से शुरू होने वाले दो दिवसीय ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में कई महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। खाद्य सुरक्षा, ऊर्जा, स्वास्थ्य, आपदा जोखिम न्यूनीकरण और महत्वपूर्ण आपूर्ति शृंखलाओं को मजबूत करने जैसे विषय सम्मेलन के प्रमुख एजेंडे में शामिल रह सकते हैं। भारत का प्रयास है कि ब्रिक्स देशों की सामूहिक क्षमता को बढ़ाकर वैश्विक चुनौतियों से निपटने के लिए प्रभावी रणनीति तैयार की जाए।
वैश्विक आर्थिक संकट के बीच हो रहा BRICS Summit
नई दिल्ली में होने वाला यह सम्मेलन ऐसे समय आयोजित किया जा रहा है जब वैश्विक अर्थव्यवस्था कई गंभीर चुनौतियों से प्रभावित है। रूस-यूक्रेन युद्ध, पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ी परिस्थितियों ने ऊर्जा एवं आपूर्ति शृंखलाओं को प्रभावित किया है। इसके अलावा अमेरिका में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व वाली सरकार की व्यापार और शुल्क नीतियों का भी वैश्विक बाजारों पर असर देखने को मिल रहा है।
भारत ब्रिक्स को प्रभावी वैश्विक मंच बनाने में जुटा
मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव के बीच भारत चाहता है कि ब्रिक्स केवल आर्थिक सहयोग तक सीमित न रहे, बल्कि वैश्विक चुनौतियों पर सामूहिक प्रतिक्रिया देने वाला प्रभावी मंच भी बने। पेजेशकियान की मौजूदगी इस सम्मेलन को पश्चिम एशिया और वैश्विक आर्थिक व्यवस्था के संदर्भ में अतिरिक्त महत्व देती है। प्रधानमंत्री मोदी और ईरानी राष्ट्रपति की मुलाकात पर भी अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर रहेगी।
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