Yemen Crisis: यमन में ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने लाल सागर के रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा करने का दावा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक, हूती लड़ाकों ने सऊदी अरब समर्थित यमनी सरकार की सेनाओं को पीछे हटने पर मजबूर किया। मोखा पर नियंत्रण मिलने के बाद हूती अब बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य के बेहद करीब पहुंच गए हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा और वैश्विक समुद्री व्यापार को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं।
बाब अल-मंदेब से सिर्फ 75 किलोमीटर दूर
मोखा बंदरगाह की रणनीतिक स्थिति इसे बेहद महत्वपूर्ण बनाती है। यह शहर बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य से करीब 75 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। बाब अल-मंदेब एशिया और यूरोप को जोड़ने वाले प्रमुख समुद्री व्यापार मार्ग का महत्वपूर्ण प्रवेश द्वार है। लाल सागर के इस रास्ते से तेल, माल और अन्य जरूरी वस्तुओं की अंतरराष्ट्रीय आवाजाही होती है। ऐसे में हूतियों की बढ़ती मौजूदगी का असर वैश्विक आपूर्ति शृंखला पर भी पड़ सकता है।
ईरानी संसद के स्पीकर ने हूतियों का समर्थन किया
मोखा पर कब्जे के बाद ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर ग़ालिबाफ ने यमन के लोगों के समर्थन में बयान दिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर कहा कि बहादुर यमनी लोग निश्चित रूप से जीत हासिल करेंगे। ग़ालिबाफ ने ईरान के दिवंगत सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई के पुराने बयान का भी उल्लेख किया, जिसमें यमन के लोगों के संघर्ष और प्रतिरोध के जारी रहने की बात कही गई थी।
यमनी सरकार ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से मांगी मदद
मोखा बंदरगाह और बाब अल-मंदेब से जुड़े घटनाक्रम पर यमन की सरकार ने गंभीर चिंता जताई है। राष्ट्रपति नेतृत्व परिषद के प्रमुख राशद अल-अलीमी ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से तत्काल कार्रवाई की अपील की। उन्होंने कहा कि मोखा और बाब अल-मंदेब में होने वाली गतिविधियों को केवल यमन का आंतरिक मामला नहीं माना जा सकता, क्योंकि इसका सीधा असर क्षेत्रीय स्थिरता और वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है।
बाब अल-मंदेब को दूसरा होर्मुज बनने से रोकने की चेतावनी
अल-अलीमी ने चेतावनी दी कि बाब अल-मंदेब जलडमरूमध्य को एक और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बनने से रोकना जरूरी है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय शक्तियों से हूतियों के बढ़ते कब्जे को खत्म करने के लिए निर्णायक कदम उठाने की अपील की। उनका कहना है कि इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर अस्थिरता बढ़ने से दुनिया के कई हिस्सों में व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है।
ईरान ने हूतियों को बताया स्वतंत्र संगठन
ईरान के विदेश मंत्रालय ने हूतियों को लेकर अमेरिका के आरोपों को खारिज किया है। प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि यमन का हूती संगठन स्वतंत्र रूप से काम करता है और किसी अन्य देश के आदेश पर नहीं चलता। उन्होंने अमेरिका की सैन्य मौजूदगी और नीतियों की आलोचना करते हुए कहा कि यमन में स्थायी शांति के लिए बाहरी हस्तक्षेप को समाप्त करना जरूरी है।
3 सितंबर से कई मोर्चों पर जारी है संघर्ष
रिपोर्टों के मुताबिक, हूती विद्रोहियों और सऊदी समर्थित यमनी सरकार की सेनाओं के बीच 3 सितंबर से कई इलाकों में संघर्ष तेज है। ताइज, होदेइदा, मारीब, अल-जॉफ, अल-बैदा और ढाले समेत कई प्रांतों में दोनों पक्षों के बीच लड़ाई की खबरें सामने आई हैं। इसी संघर्ष के दौरान 10 सितंबर को मोखा शहर और बंदरगाह पर हूतियों के कब्जे की बात सामने आई।
हानिश और जुकार द्वीप तक बढ़ी हूतियों की पहुंच
मोखा पर नियंत्रण के बाद हूती लड़ाकों के दक्षिण की ओर धुबाब और बाब अल-मंदेब की दिशा में बढ़ने की रिपोर्ट है। इसके अलावा हानिश द्वीपसमूह और जुकार द्वीप तक भी उनकी पहुंच बढ़ने की बात कही जा रही है। यदि यह रणनीतिक स्थिति बनी रहती है, तो बाब अल-मंदेब पर हूतियों का दबाव और मजबूत हो सकता है।
पाकिस्तान के रुख पर भी उठे सवाल
मोखा पर हूतियों के कब्जे के बीच सऊदी अरब के साथ पाकिस्तान के रक्षा समझौते और उसकी भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। क्षेत्रीय तनाव के बीच पाकिस्तान द्वारा सऊदी अरब की संभावित सैन्य मदद से दूरी बनाए रखने की चर्चा ने घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया है। हालांकि, इस मामले में किसी औपचारिक सैन्य निर्णय की पुष्टि संबंधित पक्षों से अलग से देखना जरूरी होगा।
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