CG News : गौधाम खाली, सड़कें भरीं! सरकार ने आवारा मवेशियों पर कसी लगाम, फिर निकला आदेश

छत्तीसगढ़ में सड़कों पर घूमते निराश्रित मवेशियों को गौधामों में विस्थापित करने के निर्देश। 21,400 की क्षमता वाले गौधामों में 11,230 पशु संरक्षित हैं।

CG News : बारिश और खरीफ सीजन के दौरान सड़कों पर निराश्रित एवं घुमंतू गौवंशीय पशुओं के जमावड़े से होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए छत्तीसगढ़ शासन ने स्थानीय निकायों और जिला प्रशासन को व्यापक दिशा-निर्देश जारी किए हैं। पशुधन विकास विभाग ने सभी कलेक्टरों को निर्देशित किया है कि दुर्घटनाजन्य स्थानों को चिन्हांकित कर सड़क पर घूमने वाले पशुओं को समीपस्थ पंजीकृत गौधामों में विस्थापित किया जाए। साथ ही जिले में संचालित गौशालाओं और गौधामों की क्षमता एवं व्यवस्थाओं की नियमित समीक्षा करने को कहा गया है।

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पशुधन विकास विभाग की ओर से 10 सितंबर 2026 को जारी पत्र के अनुसार प्रदेश में वर्तमान में 142 पंजीकृत गौशालाएं संचालित हैं, जिनमें 42,741 गौवंशीय पशु संरक्षित हैं। वहीं 151 प्रशासकीय स्वीकृति प्राप्त गौधामों में से 107 गौधाम पंजीकृत हो चुके हैं और इनमें से 76 गौधाम संचालित हैं। विभाग ने जिला प्रशासन को निर्देश दिए हैं कि पंजीकृत लेकिन अभी तक शुरू नहीं हुए गौधामों की समीक्षा कर उन्हें एक माह के भीतर प्रारंभ कराया जाए।

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गौधामों की क्षमता का पूरा उपयोग करने पर जोर

विभाग के मुताबिक प्रदेश में पंजीकृत 107 गौधामों की कुल क्षमता 21,400 गौवंशीय पशुओं को रखने की है, जबकि वर्तमान में इनमें केवल 11,230 पशु संरक्षित हैं। विभाग ने कहा है कि स्थानीय निकायों द्वारा निराश्रित एवं घुमंतू पशुओं को गौधामों तक नहीं पहुंचाए जाने के कारण इनकी क्षमता का पूरा उपयोग नहीं हो पा रहा है।

कलेक्टरों को नगरीय निकायों और ग्राम पंचायतों के माध्यम से क्षमता के अनुसार पशुओं का शीघ्र विस्थापन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जहां गौधाम की आवश्यकता है, वहां निर्धारित प्रक्रिया के तहत नए गौधाम की स्थापना के प्रस्ताव छत्तीसगढ़ राज्य गौ सेवा आयोग को भेजने को कहा गया है।

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अस्थाई आश्रय स्थल के लिए भी तय किए मानक

खरीफ फसल को मवेशियों से बचाने के लिए गांवों में ग्रामीणों या पंचायत समूहों द्वारा अस्थाई रूप से पशुओं को ऐसे स्थानों पर रखने की जानकारी सामने आने के बाद शासन ने इसके लिए भी स्पष्ट व्यवस्था तय की है। जिला प्रशासन की अनुमति के बाद ही गौठान या अन्य स्थानों पर अस्थाई पशु आश्रय स्थल बनाया जा सकेगा और इसकी जानकारी पशुधन विकास विभाग को देना अनिवार्य होगा।

अस्थाई आश्रय स्थल में स्वच्छ, हवादार और पर्याप्त प्रकाश वाला शेड, पशुओं के घूमने के लिए खुला स्थान, छायादार पेड़, पर्याप्त चारा-दाना और स्वच्छ पेयजल की व्यवस्था जरूरी होगी। बारिश के पानी का भराव नहीं होना चाहिए। बीमार पशुओं को स्वस्थ पशुओं से अलग रखने तथा संक्रामक रोगों की सूचना तत्काल पशु चिकित्सा अधिकारियों को देने के निर्देश भी दिए गए हैं।

क्षमता से अधिक पशु रखने पर रोक

शासन ने स्पष्ट किया है कि किसी भी अस्थाई पशु आश्रय स्थल में निर्धारित क्षमता से अधिक पशु नहीं रखे जाएंगे। आश्रय स्थल के संचालन की उचित वित्तीय एवं प्रबंधन व्यवस्था के साथ पशुओं, चारा और दाना आदि का नियमित लेखा-जोखा भी रखा जाएगा।

इसके अलावा पशु अतिचार अधिनियम 1871 के तहत स्थापित कांजी हाउसों में भी पर्याप्त शेड, खुला क्षेत्र, चारा-दाना और स्वच्छ पेयजल सहित आवश्यक मूलभूत सुविधाएं सुनिश्चित कर उनके सुचारू संचालन के निर्देश दिए गए हैं।

हाईवे से पशुओं को हटाने के लिए समन्वित कार्रवाई

सर्वोच्च न्यायालय के Suo Moto Writ Petition (Civil) No. 05/2025 में पारित अंतरिम आदेश का हवाला देते हुए विभाग ने राज्य राजमार्गों, राष्ट्रीय राजमार्गों और राष्ट्रीय एक्सप्रेसवे से आवारा गौवंशीय एवं अन्य पशुओं को हटाने के निर्देश भी दिए हैं। इसके लिए लोक निर्माण विभाग, स्थानीय निकाय और स्थानीय पुलिस को आपसी समन्वय से समय-सीमा में कार्रवाई करने को कहा गया है।

हेल्पलाइन नंबरों का प्रचार करने के निर्देश

विभाग ने पशु चिकित्सा सेवाओं से संबंधित हेल्पलाइन नंबरों के व्यापक प्रचार-प्रसार के निर्देश भी दिए हैं। प्रत्येक विकासखंड में संचालित मोबाइल पशु चिकित्सा इकाई के लिए 1962 टोल फ्री नंबर पर पशुपालक और आमजन चिकित्सा अथवा परामर्श के लिए संपर्क कर सकते हैं। आवारा पशुओं से संबंधित सूचना के लिए नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग का 1100 निदान तथा राष्ट्रीय राजमार्गों से संबंधित मामलों के लिए 1033 हेल्पलाइन का उपयोग किया जा सकता है।

कलेक्टरों को जिले में स्थापित गौशालाओं और गौधामों का निरीक्षण कराने, उनकी क्षमता के अनुसार पशु संख्या एवं उपलब्ध व्यवस्थाओं की जांच करने तथा छत्तीसगढ़ गौसेवा आयोग नियम 2005 के तहत गठित विकासखंड और जिला स्तरीय समितियों की बैठक नियमित रूप से आयोजित कराने के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही गौशाला एवं गौधामों के संचालन की लगातार समीक्षा करने को कहा गया है।

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