Amit Shah : मुंबई की एशियाटिक सोसाइटी में आयोजित ‘गणेश ज्ञानार्थी’ विशेष पांडुलिपि प्रदर्शनी के उद्घाटन समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भारत की ज्ञान परंपरा, इतिहास और सांस्कृतिक विरासत को लेकर महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि किसी राष्ट्र की वास्तविक ताकत केवल उसकी आर्थिक या सैन्य शक्ति से तय नहीं होती, बल्कि उसकी स्मृति, इतिहास, संस्कृति, भाषा, अभिलेख और परंपराओं से भी होती है। इन विरासतों को सुरक्षित रखना देश की पहचान के लिए बेहद जरूरी है।
अमित शाह ने राष्ट्र की स्मृति को बताया सबसे बड़ी ताकत
अमित शाह ने कहा कि जो राष्ट्र अपनी ऐतिहासिक स्मृतियों, सांस्कृतिक मूल्यों, भाषा, दस्तावेजों और परंपराओं को संरक्षित नहीं करता, वह कितना भी शक्तिशाली क्यों न हो, उसका पतन होने में अधिक समय नहीं लगता। उन्होंने कहा कि इतिहास और सांस्कृतिक चेतना किसी भी समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का काम करती है। इसलिए आने वाली पीढ़ियों तक इन्हें पहुंचाना प्रत्येक समाज की जिम्मेदारी है।
सदियों की गुलामी के बावजूद भारत नहीं हुआ पराजित
गृह मंत्री ने कहा कि भारत ने लंबे समय तक विदेशी शासन और गुलामी का सामना किया, लेकिन इसके बावजूद देश की ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक चेतना समाप्त नहीं हुई। उन्होंने भारत को इसका उदाहरण बताते हुए कहा कि यहां ज्ञान और संस्कृति की ऐसी मजबूत परंपरा विकसित हुई, जिसने समय-समय पर दुनिया को दिशा देने का काम किया। कई चुनौतियों के बावजूद भारत की सांस्कृतिक पहचान लगातार आगे बढ़ती रही।
ज्ञान को नष्ट करना संभव नहीं, जब वह समाज की चेतना बने
अमित शाह ने कहा कि ज्ञान को केवल पुस्तकों, ग्रंथों या संस्थानों में सुरक्षित रखकर ही जीवित नहीं रखा जा सकता। जब ज्ञान किसी समाज की सामूहिक स्मृति, चेतना और मौखिक परंपरा का हिस्सा बन जाता है, तब उसे पूरी तरह समाप्त करना बेहद कठिन हो जाता है। उन्होंने कहा कि भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा पीढ़ी-दर-पीढ़ी इसी तरह आगे बढ़ती रही और यही देश की बौद्धिक शक्ति का आधार बनी।
नालंदा का उदाहरण देकर समझाई ज्ञान की शक्ति
अपने संबोधन में अमित शाह ने नालंदा विश्वविद्यालय के पुस्तकालय का उदाहरण भी दिया। उन्होंने कहा कि नालंदा की लाइब्रेरी को जलाया जा सकता था और आग इतनी भीषण हो सकती थी कि लंबे समय तक उसका धुआं दिखाई देता रहे, लेकिन वहां मौजूद ज्ञान को पूरी तरह नष्ट नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि जो ज्ञान लोगों की सामूहिक चेतना और मौखिक परंपरा में मौजूद हो, उसे किसी आग या विनाश से समाप्त नहीं किया जा सकता।
एशियाटिक सोसाइटी की गतिविधियों का किया निरीक्षण
मुंबई दौरे के दौरान अमित शाह ने एशियाटिक सोसाइटी के पुस्तकालय का दौरा किया और पांडुलिपि संरक्षण प्रयोगशाला में चल रहे कार्यों का निरीक्षण किया। ‘गणेश ज्ञानार्थी’ प्रदर्शनी के माध्यम से प्राचीन पांडुलिपियों और भारतीय ज्ञान परंपरा से जुड़े महत्वपूर्ण दस्तावेजों को प्रदर्शित किया गया। गृह मंत्री ने इस तरह के प्रयासों को देश की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित करने की दिशा में महत्वपूर्ण बताया।
तीन दिवसीय मुंबई दौरे पर हैं केंद्रीय गृह मंत्री
अमित शाह तीन दिवसीय मुंबई दौरे पर हैं और इस दौरान कई महत्वपूर्ण कार्यक्रमों में हिस्सा ले रहे हैं। एशियाटिक सोसाइटी के कार्यक्रम के बाद वह बांद्रा में रत्न एवं आभूषण निर्यात संवर्धन परिषद के पुरस्कार समारोह में शामिल होंगे। इसके बाद नवी मुंबई के वाशी स्थित सिडको प्रदर्शनी केंद्र में आयोजित छठे अखिल भारतीय राजभाषा सम्मेलन में हिस्सा लेंगे।
लालबागचा राजा के दर्शन भी करेंगे अमित शाह
मुंबई प्रवास के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के लालबागचा राजा के दर्शन करने का भी कार्यक्रम है। उनका यह दौरा सांस्कृतिक, प्रशासनिक और राजभाषा से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों से जुड़ा हुआ है। एशियाटिक सोसाइटी में दिए उनके संबोधन में भारतीय इतिहास, संस्कृति और ज्ञान परंपरा के संरक्षण को विशेष महत्व दिया गया, जिसे उन्होंने देश की दीर्घकालिक शक्ति और पहचान से जोड़ा।
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