UPI Charge Controversy : कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने UPI भुगतान पर संभावित शुल्क को लेकर केंद्र की मोदी सरकार पर तीखा हमला बोला है। खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार की कथित ‘लूट’ अब डिजिटल भुगतान व्यवस्था तक पहुंच गई है। उन्होंने कहा कि महंगाई से पहले ही परेशान आम लोगों की जेब खाली हो रही है और राहत देने के बजाय सरकार नए तरीकों से जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही है।
एक्स पोस्ट के जरिए सरकार पर साधा निशाना
मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार, 15 सितंबर 2026 को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा की। इसमें उन्होंने दावा किया कि पहले UPI भुगतान पर ‘नो फीस’ की बात कही जाती थी, लेकिन अब 2,000 रुपये तक के लेनदेन को शुल्क-मुक्त रखने की बात सामने आ रही है। खरगे ने इसी बदलाव को लेकर केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए।
महंगाई का मुद्दा उठाकर सरकार को घेरा
कांग्रेस अध्यक्ष ने अपने बयान में बढ़ती महंगाई का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि आम आदमी पहले से ही महंगाई के कारण आर्थिक दबाव झेल रहा है। खरगे ने थोक महंगाई के करीब 10 प्रतिशत होने का दावा करते हुए कहा कि ऐसी स्थिति में जनता को राहत मिलनी चाहिए, लेकिन इसके बजाय डिजिटल पेमेंट्स पर संभावित शुल्क लगाने की चर्चा चिंता बढ़ा रही है।
नोटबंदी का जिक्र कर याद दिलाया पुराना फैसला
खरगे ने अपने बयान में वर्ष 2016 की नोटबंदी का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि करीब एक दशक पहले नोटबंदी के जरिए देश की अर्थव्यवस्था को बड़ा झटका लगा था। उस समय सरकार की ओर से डिजिटल भुगतान और कैशलेस इकोनॉमी को बढ़ावा देने को भी इसके प्रमुख उद्देश्यों में बताया गया था। कांग्रेस अध्यक्ष ने इसी तर्क को वर्तमान UPI विवाद से जोड़ते हुए सरकार पर निशाना साधा।
डिजिटल पेमेंट्स टैक्स को लेकर जताई चिंता
खरगे ने आरोप लगाया कि सरकार डिजिटल पेमेंट्स पर टैक्स या शुल्क लगाने की दिशा में आगे बढ़ रही है। उनका कहना है कि यदि डिजिटल लेनदेन पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ डाला जाता है, तो इसका असर आम नागरिकों और कारोबारियों दोनों पर पड़ सकता है। उन्होंने सरकार से स्पष्ट करने की मांग की कि UPI भुगतान को लेकर वास्तविक नीति क्या है।
5,000 और 10,000 रुपये के भुगतान पर सवाल
कांग्रेस अध्यक्ष ने संभावित MDR को लेकर भी सरकार से सवाल पूछा। उन्होंने कहा कि वित्त मंत्री संसद में UPI पर किसी टैक्स या शुल्क के नहीं होने की बात कह चुके हैं। इसके बावजूद कुछ रिपोर्टों में 5,000 रुपये के लेनदेन पर 25 रुपये और 10,000 रुपये के भुगतान पर 50 रुपये तक संभावित शुल्क की चर्चा सामने आई है। खरगे ने पूछा कि क्या वास्तव में ऐसा कोई प्रस्ताव है।
MDR का बोझ आखिर किस पर पड़ेगा?
मल्लिकार्जुन खरगे ने Merchant Discount Rate यानी MDR को लेकर भी सरकार पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि भले ही शुल्क सीधे व्यापारी से लिया जाए, लेकिन कारोबारियों पर बढ़ने वाला अतिरिक्त खर्च अंततः वस्तुओं और सेवाओं की कीमतों में शामिल हो सकता है। ऐसी स्थिति में इसका अप्रत्यक्ष असर आम उपभोक्ता की जेब पर पड़ने की आशंका है।
सरकार से स्थिति स्पष्ट करने की मांग
खरगे ने कहा कि महंगाई से परेशान जनता को राहत देने के बजाय यदि भुगतान व्यवस्था पर अतिरिक्त शुल्क का बोझ बढ़ाया जाता है, तो इससे आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से UPI शुल्क को लेकर स्थिति स्पष्ट करने की मांग की है। हालांकि, संभावित MDR और वास्तविक सरकारी शुल्क के बीच अंतर को लेकर अंतिम स्थिति सरकार की आधिकारिक नीति से ही स्पष्ट होगी।
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