Iran War: ईरान के साथ जारी युद्ध में अमेरिका को भारी आर्थिक और सैन्य नुकसान का सामना करना पड़ा है। पेंटागन के महानिरीक्षक की रिपोर्ट के मुताबिक, 30 जून तक युद्ध से जुड़ी अमेरिकी लागत करीब 33.4 अरब डॉलर थी। रिपोर्ट में सैन्य उपकरणों, हथियारों और अन्य अभियानों पर हुए खर्च के साथ अमेरिकी ठिकानों और राजनयिक परिसरों को हुए नुकसान का भी आकलन किया गया है। बाद के एक अलग कांग्रेसनल बजट ऑफिस आकलन में अगस्त तक लागत 38 अरब डॉलर से अधिक बताई गई है।
गोला-बारूद और मिसाइलों पर खर्च हुआ बड़ा हिस्सा
पेंटागन की रिपोर्ट में युद्ध के दौरान उन्नत हथियारों और गोला-बारूद के इस्तेमाल से अमेरिकी सैन्य भंडार पर दबाव का उल्लेख किया गया है। रिपोर्ट ने चेतावनी दी कि संघर्ष के कारण रणनीतिक हथियार भंडार में कमी और उन्नत म्यूनिशन की दोबारा आपूर्ति के लिए औद्योगिक क्षमता में बाधाएं सामने आईं। इससे भविष्य में हथियारों के भंडार को पहले के स्तर तक पहुंचाने में समय लग सकता है।
लड़ाकू विमान और ड्रोन भी हुए क्षतिग्रस्त
ईरानी हमलों और सैन्य अभियानों के दौरान अमेरिका के कई विमान और ड्रोन नष्ट या क्षतिग्रस्त हुए। पेंटागन की रिपोर्ट के मुताबिक, इनमें दर्जनों अमेरिकी एयरक्राफ्ट और ड्रोन शामिल हैं। करीब 30 MQ-9 रीपर ड्रोन के नष्ट होने की जानकारी सामने आई है। इसके अलावा सात KC-135 रिफ्यूलिंग विमानों को भी नुकसान पहुंचा। रिपोर्ट में अन्य सैन्य विमानों को हुए नुकसान का भी उल्लेख किया गया है।
मध्य पूर्व के अमेरिकी ठिकानों पर हमलों का असर
ईरानी हमलों का असर केवल सैन्य विमानों तक सीमित नहीं रहा। रिपोर्ट के अनुसार, कुवैत, बहरीन, कतर, संयुक्त अरब अमीरात, सऊदी अरब, इराक, ओमान और जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों की सैकड़ों इमारतों और संरचनाओं को नुकसान पहुंचा। बहरीन स्थित अमेरिकी नौसैनिक अड्डे को भी निशाना बनाया गया, जिसके बाद अमेरिकी सेना को वैकल्पिक लॉजिस्टिक केंद्रों का इस्तेमाल करना पड़ा।
डिएगो गार्सिया तक पहुंची अमेरिकी सप्लाई लाइन
सैन्य ठिकानों पर हमलों के बाद अमेरिका को अपनी आपूर्ति व्यवस्था में बदलाव करना पड़ा। रिपोर्ट के मुताबिक, डिएगो गार्सिया जैसे दूर स्थित वैकल्पिक केंद्रों का इस्तेमाल बढ़ाया गया। इसके कारण मध्य पूर्व में सैन्य अभियानों के लिए लॉजिस्टिक चक्र 14 से 18 दिनों तक पहुंच गया। इससे सैनिकों और सैन्य संसाधनों की आपूर्ति व्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव पड़ा।
अमेरिकी राजनयिक परिसरों को 184 मिलियन डॉलर का नुकसान
ईरानी हमलों से अमेरिकी राजनयिक प्रतिष्ठान भी प्रभावित हुए। पेंटागन के महानिरीक्षक की रिपोर्ट में इराक, कुवैत, सऊदी अरब और UAE में अमेरिकी राजनयिक परिसरों को करीब 184 मिलियन डॉलर का भौतिक नुकसान बताया गया है। इसके अतिरिक्त अमेरिकी विदेश विभाग ने निकासी और आपातकालीन प्रतिक्रिया अभियानों पर भी खर्च किया। संघर्ष के बाद हजारों अमेरिकी नागरिकों को प्रभावित क्षेत्रों से निकालना पड़ा।
हथियारों के रणनीतिक भंडार में कमी का खुलासा
रिपोर्ट का एक महत्वपूर्ण निष्कर्ष अमेरिकी हथियार भंडार से जुड़ा है। पेंटागन के महानिरीक्षक ने कहा कि युद्ध ने उन्नत हथियारों के रणनीतिक भंडार में कमी और म्यूनिशन उत्पादन में औद्योगिक बाधाओं को उजागर किया। इससे अमेरिकी सैन्य उद्योग के सामने युद्ध के दौरान इस्तेमाल हुए मिसाइलों और अन्य उन्नत हथियारों की भरपाई की चुनौती सामने आई है।
अमेरिकी सैनिकों की मौत और बड़ी संख्या में घायल
युद्ध में अमेरिकी सैनिकों को भी जान गंवानी पड़ी। महानिरीक्षक की रिपोर्ट के अनुसार, 11 अमेरिकी सैन्यकर्मी कार्रवाई के दौरान मारे गए, जबकि कुछ अन्य मौतें गैर-युद्ध घटनाओं में हुईं। रिपोर्ट में अमेरिकी सैनिकों के घायल होने का भी उल्लेख है। बाद में अगस्त तक पेंटागन के आंकड़ों में 750 से अधिक अमेरिकी सैनिकों के घायल होने की जानकारी सामने आई।
ईरान ने रिपोर्ट को अपने दावे के समर्थन में बताया
रिपोर्ट सामने आने के बाद ईरान की ओर से भी प्रतिक्रिया आई। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी नुकसान से जुड़े आंकड़ों को अपने सैन्य दावों के समर्थन में पेश किया। हालांकि, युद्ध के दौरान दोनों पक्षों की ओर से किए गए कई दावों की स्वतंत्र पुष्टि अलग-अलग स्तर पर चुनौतीपूर्ण रही है। अमेरिकी रिपोर्ट मुख्य रूप से अमेरिकी सैन्य और राजनयिक नुकसान का आधिकारिक आकलन प्रस्तुत करती है।
युद्ध की लागत अब 38 अरब डॉलर से ऊपर
पेंटागन महानिरीक्षक की जून तक की रिपोर्ट के बाद कांग्रेसनल बजट ऑफिस ने अगस्त तक युद्ध की लागत 38 अरब डॉलर से अधिक आंकी। CBO ने कहा कि संघर्ष की तीव्रता के आधार पर अमेरिकी रक्षा खर्च हर महीने करीब 3 अरब डॉलर या उससे अधिक बढ़ सकता है। इस तरह ईरान युद्ध ने अमेरिका के सामने सैन्य नुकसान, हथियारों की भरपाई और बढ़ते वित्तीय खर्च—तीनों मोर्चों पर चुनौती खड़ी कर दी है।
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