Yudh Abhyas 2026 : भारत और अमेरिका की सेनाओं के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास ‘युद्ध अभ्यास 2026’ मंगलवार से शुरू हो गया। इस अभ्यास का उद्देश्य दोनों देशों की सेनाओं के बीच आपसी तालमेल और अंतर-संचालन क्षमता को मजबूत करना है। इसके साथ ही बदलती सुरक्षा चुनौतियों से प्रभावी तरीके से निपटने, सैन्य अनुभव साझा करने और द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को आगे बढ़ाने पर भी जोर दिया जा रहा है। यह अभ्यास दोनों देशों के बीच लंबे समय से जारी सैन्य सहयोग का महत्वपूर्ण हिस्सा माना जा रहा है।
उत्तराखंड के औली में हुआ उद्घाटन समारोह
रक्षा मंत्रालय के अनुसार, युद्ध अभ्यास के 22वें संस्करण का उद्घाटन समारोह उत्तराखंड स्थित औली विदेशी प्रशिक्षण केंद्र में आयोजित किया गया। इस बार अभ्यास को एक ही स्थान तक सीमित नहीं रखा गया है। भारतीय और अमेरिकी सैनिक औली के साथ-साथ राजस्थान के महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में भी विभिन्न सैन्य गतिविधियों में हिस्सा ले रहे हैं। दोनों स्थानों पर प्रशिक्षण और अभ्यास का संचालन निर्धारित सैन्य उद्देश्यों के अनुरूप किया जा रहा है।
पर्वतीय क्षेत्रों में संयुक्त क्षमता पर जोर
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि इस अभ्यास का प्रमुख उद्देश्य पर्वतीय और अर्ध-पर्वतीय क्षेत्रों में एकीकृत युद्ध समूहों के प्रभावी इस्तेमाल के लिए दोनों सेनाओं की संयुक्त सैन्य क्षमता बढ़ाना है। अभ्यास के दौरान पैदल सेना आधारित अभियानों पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इसके जरिए सैनिक कठिन भौगोलिक परिस्थितियों में संयुक्त रूप से योजना बनाने और अभियान को अंजाम देने की क्षमताओं को मजबूत करेंगे।
बेहतर तालमेल और परिचालन अनुभव साझा करने का लक्ष्य
मंत्रालय के मुताबिक, युद्ध अभ्यास के माध्यम से दोनों सेनाओं के बीच अंतर-संचालन क्षमता को और मजबूत किया जाएगा। साथ ही दोनों पक्ष अपने-अपने सैन्य अनुभव और सर्वोत्तम परिचालन पद्धतियों को साझा करेंगे। संयुक्त योजना, प्रशिक्षण और वास्तविक परिस्थितियों के अनुरूप अभियान चलाने की प्रक्रिया पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। इससे दोनों देशों के सैनिकों को एक-दूसरे की कार्यप्रणाली और सैन्य प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिलेगा।
600-600 सैनिकों की भागीदारी
अभ्यास में भारत और अमेरिका की सेनाओं के 600-600 जवानों वाले दल हिस्सा ले रहे हैं। उद्घाटन अवसर पर भारतीय सेना की 14वीं इन्फैंट्री डिवीजन के जनरल ऑफिसर कमांडिंग मेजर जनरल अमरेश गुंजन और अमेरिकी सेना की 11वीं एयरबोर्न डिवीजन की पहली इन्फैंट्री ब्रिगेड कॉम्बैट टीम के कमांडर कर्नल बेंजामिन जैकमैन ने दोनों देशों के सैनिकों को संबोधित किया। अधिकारियों ने अभ्यास के उद्देश्यों और प्रशिक्षण की प्राथमिकताओं की जानकारी दी।
आधुनिक तकनीक और ड्रोन का इस्तेमाल
इस बार युद्ध अभ्यास में सैन्य प्रशिक्षण के दौरान आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल पर भी विशेष जोर दिया जा रहा है। अधिकारियों के अनुसार, निगरानी और टोही अभियानों में ड्रोन तथा स्वायत्त प्रणालियों का उपयोग किया जाएगा। इन तकनीकों के माध्यम से सैनिकों को बदलते युद्धक्षेत्र में जानकारी जुटाने, निगरानी करने और अभियान की योजना बनाने से जुड़े व्यावहारिक अनुभव मिलेंगे।
महाजन रेंज में आधुनिक हथियारों का प्रदर्शन
राजस्थान स्थित महाजन फील्ड फायरिंग रेंज में आधुनिक हथियार प्रणालियों का प्रदर्शन भी अभ्यास का हिस्सा होगा। इसके जरिए दोनों देशों के सैनिकों को आधुनिक सैन्य उपकरणों और उनके परिचालन इस्तेमाल से जुड़ी प्रक्रियाओं को समझने का अवसर मिलेगा। प्रशिक्षण गतिविधियों में तकनीकी क्षमता और सैनिकों के बीच बेहतर समन्वय को साथ लेकर चलने पर ध्यान दिया जाएगा।
रक्षा साझेदारी को मिलेगा प्रशिक्षण से आधार
युद्ध अभ्यास भारत और अमेरिका के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करने वाले नियमित सैन्य अभ्यासों में शामिल है। इसके माध्यम से दोनों सेनाएं संयुक्त प्रशिक्षण, परिचालन अनुभव और आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से जुड़ी क्षमताओं को विकसित करती हैं। 2026 का यह 22वां संस्करण विशेष रूप से पर्वतीय और अर्ध-पर्वतीय इलाकों में संयुक्त अभियानों की तैयारी, पैदल सेना की भूमिका तथा तकनीकी संसाधनों के इस्तेमाल पर केंद्रित है। इससे दोनों सेनाओं के बीच संयुक्त प्रशिक्षण और परिचालन तालमेल को और विकसित करने का अवसर मिलेगा।
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