US 100% Tariff: रूस से कच्चा तेल खरीदने वाले देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव डालने के लिए अमेरिका में एक नए प्रतिबंध विधेयक पर प्रक्रिया आगे बढ़ रही है। Lindsey O. Graham Sanctioning Russia and Iran Act of 2026 नाम के इस प्रस्ताव में रूस के प्रमुख तेल खरीदारों पर 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार अमेरिकी राष्ट्रपति को देने का प्रावधान है। भारत और चीन जैसे बड़े रूसी तेल खरीदार इस प्रस्ताव के दायरे में आ सकते हैं।
अमेरिकी सीनेट से 86-11 वोट से पास हुआ विधेयक
अमेरिकी सीनेट ने अगस्त में इस विधेयक को 86-11 के वोट से मंजूरी दी थी। इसके बाद प्रस्ताव को प्रतिनिधि सभा यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में आगे बढ़ाया जा रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, सदन में इस कानून पर प्रक्रिया सितंबर में आगे बढ़ी है और अंतिम मतदान के बाद इसे राष्ट्रपति के पास भेजे जाने की संभावना है।
भारत पर लग सकता है 100 प्रतिशत तक अतिरिक्त टैरिफ
विधेयक का एक महत्वपूर्ण प्रावधान रूस से कच्चा तेल और ऊर्जा उत्पाद खरीदने वाले प्रमुख देशों पर कार्रवाई से जुड़ा है। प्रस्ताव राष्ट्रपति को ऐसे देशों के खिलाफ 100 प्रतिशत तक टैरिफ लगाने का अधिकार देने की बात करता है। भारत और चीन उन प्रमुख देशों में शामिल हैं जिनका नाम इस संभावित कार्रवाई के संदर्भ में लगातार सामने आया है। हालांकि, विधेयक के कानून बनने और उसके बाद किसी देश पर वास्तविक टैरिफ लागू होने के बीच कई प्रक्रियाएं जुड़ी हैं।
भारत ने ऊर्जा जरूरतों पर अपना रुख स्पष्ट किया
भारत सरकार की ओर से कहा गया है कि देश अपनी ऊर्जा जरूरतों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर फैसले करता है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े निर्णय 140 करोड़ भारतीयों के हितों को ध्यान में रखकर करता आया है और आगे भी इसी आधार पर निर्णय लेगा। ऐसे में अमेरिकी विधेयक को लेकर भारत के रुख पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नजर बनी हुई है।
भारत-रूस तेल व्यापार पर क्यों है अमेरिका का ध्यान
अमेरिकी प्रस्ताव का व्यापक उद्देश्य रूस की ऊर्जा आय पर दबाव बढ़ाना और उसके तेल एवं गैस व्यापार से जुड़े राजस्व को प्रभावित करना है। विधेयक में रूस की ऊर्जा इंडस्ट्री और कथित ‘शैडो फ्लीट’ से जुड़े लोगों तथा संस्थाओं पर भी कार्रवाई का प्रावधान बताया गया है। अमेरिकी पक्ष का तर्क है कि रूसी ऊर्जा व्यापार से मिलने वाला राजस्व मॉस्को की सैन्य गतिविधियों को वित्तीय आधार देता है।
बिल में भारत का नाम स्पष्ट करने की मांग
अमेरिकी कांग्रेस में कुछ सांसदों ने प्रस्ताव में बदलाव के सुझाव भी दिए हैं। इनमें रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों के नाम स्पष्ट रूप से शामिल करने की मांग की गई है। रिपोर्टों के अनुसार, एक संशोधन में भारत और चीन सहित प्रमुख व्यापारिक साझेदारों को सीधे नामित करने का प्रस्ताव रखा गया है। वहीं, कुछ सांसदों ने राष्ट्रपति को व्यापक टैरिफ अधिकार देने वाले प्रावधान को हटाने का भी सुझाव दिया है।
किन देशों का नाम प्रस्तावित सूची में शामिल
रिपोर्टों के मुताबिक, रूस से तेल खरीदने वाले प्रमुख देशों की संभावित सूची में भारत, चीन, तुर्किये, अजरबैजान, हंगरी, स्लोवाकिया, संयुक्त अरब अमीरात, सिंगापुर, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान के नाम शामिल किए जाने का सुझाव सामने आया है। हालांकि, संशोधनों पर अंतिम स्थिति और कानून का अंतिम स्वरूप अमेरिकी प्रतिनिधि सभा तथा आगे की विधायी प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।
भारत के लिए आगे क्या मायने रखता है
अगर अमेरिकी कानून अंतिम रूप से पारित होता है और उसके तहत भारत पर टैरिफ लगाया जाता है, तो इसका असर भारत-अमेरिका व्यापार तथा रूस से ऊर्जा आयात से जुड़े आर्थिक समीकरणों पर पड़ सकता है। फिलहाल महत्वपूर्ण बात यह है कि विधेयक अभी अमेरिकी विधायी प्रक्रिया में है और प्रस्तावित प्रावधानों में बदलाव संभव है। इसलिए भारत पर वास्तविक प्रभाव कानून के अंतिम स्वरूप और उसके कार्यान्वयन संबंधी फैसलों पर निर्भर करेगा।
Read More : Hanuman Ansh Box Office: 40वें दिन फिल्म की कमाई में जबरदस्त उछाल, छठे हफ्ते में भी जलवा