UPI Charges Controversy : UPI यानी यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू किए जाने के फैसले को लेकर राजनीतिक विवाद तेज हो गया है। कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने इस फैसले को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साधते हुए इसे अमेरिकी दबाव से जोड़ने का आरोप लगाया है। वहीं, केंद्रीय संचार मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने इन आरोपों को खारिज किया है। सरकार का कहना है कि नई व्यवस्था का उद्देश्य UPI इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाना और इसके इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करना है।
सिंधिया बोले- राहुल गांधी को हर जगह दिखता है अमेरिका
ज्योतिरादित्य सिंधिया ने राहुल गांधी के अमेरिकी दबाव वाले आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि उन्हें हर जगह अमेरिका का भूत नजर आता है। सिंधिया ने आरोप लगाया कि विपक्ष देश के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और प्रगति की चर्चा करने के बजाय भारत की छवि को लेकर नकारात्मक बातें कर रहा है। दूसरी ओर, राहुल गांधी ने दावा किया है कि UPI पर शुल्क लगाने का फैसला अमेरिकी भुगतान कंपनियों के दबाव से प्रभावित है। यह दावा सरकार ने खारिज किया है।
₹2,000 तक के UPI भुगतान पर नहीं लगेगा MDR
नई व्यवस्था के तहत ₹2,000 तक के पात्र मर्चेंट UPI लेनदेन पर MDR नहीं लगेगा। ₹2,000 से अधिक के पात्र Person-to-Merchant यानी P2M लेनदेन पर 0.4 प्रतिशत MDR लागू होगा। इस शुल्क की अधिकतम सीमा ₹300 प्रति लेनदेन रखी गई है। ₹75,000 या उससे अधिक के लेनदेन पर भी MDR ₹300 से ज्यादा नहीं होगा। यह नया ढांचा 15 अक्टूबर 2026 से लागू किया जाना है।
ग्राहक से सीधे शुल्क वसूलने की अनुमति नहीं
सरकार और भुगतान व्यवस्था से जुड़े अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि MDR मर्चेंट पेमेंट इकोसिस्टम के भीतर लागू होगा और इसे सीधे ग्राहक से वसूलने की व्यवस्था नहीं है। Person-to-Person यानी एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को भेजे जाने वाले UPI भुगतान भी शुल्क से बाहर रहेंगे। सरकार का कहना है कि रोजमर्रा के छोटे डिजिटल भुगतानों पर नई व्यवस्था का सीधा असर नहीं पड़ेगा।
छोटे कारोबारियों के लिए भी रखी गई छूट
नई व्यवस्था में छोटे व्यापारियों के लिए भी प्रावधान किए गए हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हर महीने ₹1 लाख तक UPI कारोबार करने वाले छोटे मर्चेंट इस MDR से बाहर रहेंगे। इसके अलावा रेल, टेलीकॉम, बीमा, ईंधन और कुछ अन्य आवश्यक सेवाओं से जुड़े ₹2,000 से अधिक के भुगतानों के लिए अलग फ्लैट MDR व्यवस्था रखी गई है। इन श्रेणियों में शुल्क ₹5 प्रति लेनदेन निर्धारित किया गया है।
सरकार ने UPI इंफ्रास्ट्रक्चर को बताया प्रमुख वजह
सरकार का तर्क है कि UPI के बड़े पैमाने पर विस्तार के साथ इसके इंफ्रास्ट्रक्चर, साइबर सुरक्षा, नेटवर्क और भुगतान व्यवस्था को लगातार मजबूत करने की जरूरत है। नए MDR ढांचे से मिलने वाला राजस्व इस पूरे इकोसिस्टम को आर्थिक रूप से टिकाऊ बनाने में मदद कर सकता है। सरकार ने विदेशी दबाव के आरोपों से इनकार करते हुए कहा है कि डिजिटल भुगतान से जुड़े फैसले भारत में नीति जरूरतों के आधार पर लिए जाते हैं।
UPI शुल्क पर विपक्ष ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने नए MDR ढांचे पर सवाल उठाते हुए कहा है कि यदि व्यापारियों पर शुल्क बढ़ेगा तो उसका अप्रत्यक्ष असर ग्राहकों पर पड़ सकता है। राहुल गांधी ने भी इसी आधार पर सरकार की नीति की आलोचना की है। वहीं, सरकार का कहना है कि MDR सीधे उपभोक्ताओं पर नहीं लगाया जाएगा। इस मुद्दे पर राजनीतिक बहस के साथ-साथ व्यापारिक संगठनों ने भी नए शुल्क के संभावित प्रभाव को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखी हैं।
15 अक्टूबर से बदल जाएगा UPI का शुल्क ढांचा
नई व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होगी। इसका मुख्य बदलाव ₹2,000 से अधिक के पात्र मर्चेंट UPI भुगतान पर 0.4 प्रतिशत MDR है, जिसकी अधिकतम सीमा ₹300 रखी गई है। वहीं, P2P भुगतान और ₹2,000 तक के छोटे मर्चेंट भुगतान मुफ्त रहेंगे। ऐसे में आने वाले समय में इस व्यवस्था का असर व्यापारियों, भुगतान कंपनियों और डिजिटल पेमेंट इकोसिस्टम पर किस तरह पड़ता है, इस पर नजर रहेगी।
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