Trump on Modi : अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भारत में अवैध अफीम पोस्ता की खेती पर रोक लगाने और सप्लाई चेन की सुरक्षा मजबूत करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तथा भारत सरकार के प्रयासों का स्वागत किया है। 15 सितंबर 2026 को अमेरिकी कांग्रेस को भेजे गए राष्ट्रपति के निर्धारण में ट्रंप ने कहा कि वह भारत के साथ मादक पदार्थ नियंत्रण के क्षेत्र में आगे भी सहयोग जारी रखने के इच्छुक हैं।
2027 की ‘मेजर्स लिस्ट’ में भारत का नाम
इसी दस्तावेज में अमेरिका ने वित्तीय वर्ष 2027 के लिए 23 देशों को ‘प्रमुख अवैध मादक पदार्थ उत्पादक या ट्रांजिट देश’ के रूप में चिन्हित किया है। इस सूची में भारत के साथ चीन, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, मैक्सिको, कोलंबिया, वेनेजुएला और कई अन्य देश शामिल हैं। अमेरिकी प्रशासन के अनुसार, सूची तैयार करने में उन देशों को शामिल किया जाता है जहां से अवैध मादक पदार्थ या उनके रासायनिक पूर्ववर्ती पदार्थों का उत्पादन अथवा परिवहन होता है।
सूची में शामिल होना सरकार की विफलता नहीं
अमेरिकी राष्ट्रपति के निर्धारण में स्पष्ट किया गया है कि किसी देश का इस सूची में शामिल होना अपने आप में उसकी सरकार की नशीले पदार्थों के खिलाफ कार्रवाई या अमेरिका के साथ सहयोग के स्तर पर कोई नकारात्मक निष्कर्ष नहीं है। अमेरिका के मुताबिक भौगोलिक, व्यापारिक और आर्थिक परिस्थितियों के कारण भी कोई देश ड्रग ट्रांजिट का मार्ग बन सकता है। इसलिए सूची में शामिल होने और सरकार के प्रयासों को दो अलग-अलग बातों के रूप में देखा जाता है।
भारत के साथ ड्रग नीति पर सहयोग जारी रखने की बात
ट्रंप ने अपने आधिकारिक निर्धारण में प्रधानमंत्री मोदी और भारत सरकार की अवैध अफीम पोस्ता की खेती से निपटने की कोशिशों का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने भारत के साथ ‘United States-India Drug Policy Framework’ के तहत लगातार सहयोग की उम्मीद जताई है। यह ढांचा दोनों देशों के बीच अवैध मादक पदार्थों और उनसे जुड़ी तस्करी की चुनौतियों से निपटने के व्यापक सहयोग पर आधारित है।
भारत पहले से निगरानी वाले देशों में शामिल
अमेरिका लंबे समय से भारत को प्रमुख ड्रग ट्रांजिट या अवैध मादक पदार्थ उत्पादन से जुड़े देशों की श्रेणी में रखता रहा है। इसका एक कारण भारत की भौगोलिक स्थिति और अंतरराष्ट्रीय मादक पदार्थ तस्करी मार्गों से उसका संपर्क भी है। अमेरिकी नियमों के तहत ऐसी सूची तैयार करने के लिए केवल किसी देश में मौजूद अवैध खेती ही नहीं, बल्कि उसके जरिए होने वाले संभावित अंतरराष्ट्रीय परिवहन को भी ध्यान में रखा जाता है।
ट्रंप प्रशासन का ड्रग कार्टेल पर जोर
ट्रंप प्रशासन ने अपनी नशीली दवाओं की नीति में अमेरिकी सीमा से अवैध ड्रग्स के प्रवेश को रोकने और अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क के खिलाफ कार्रवाई को प्रमुखता दी है। व्हाइट हाउस ने कहा है कि प्रशासन सीमा सुरक्षा, ड्रग्स और उनके प्रीकर्सर के प्रवाह को रोकने तथा जांच एजेंसियों की क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रहा है।
23 देशों की सूची में कई बड़े नाम
2027 की सूची में भारत के अलावा चीन, पाकिस्तान, अफगानिस्तान, बहामास, बेलीज, बोलीविया, बर्मा, कोलंबिया, कोस्टा रिका, डोमिनिकन रिपब्लिक, इक्वाडोर, अल सल्वाडोर, ग्वाटेमाला, हैती, होंडुरास, जमैका, लाओस, मैक्सिको, निकारागुआ, पनामा, पेरू और वेनेजुएला शामिल हैं। इनमें से अमेरिका ने चार देशों—अफगानिस्तान, बोलीविया, बर्मा और कोलंबिया—को पिछले 12 महीनों में पर्याप्त मादक पदार्थ विरोधी प्रयास नहीं करने के संदर्भ में अलग से चिन्हित किया है।
भारत-अमेरिका सहयोग पर नजर
भारत का इस सूची में बने रहना और प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों की ट्रंप द्वारा सराहना एक साथ सामने आई है। अमेरिकी दस्तावेज यह संकेत देता है कि वॉशिंगटन भारत को ड्रग नियंत्रण के क्षेत्र में सहयोगी मानते हुए उसके खिलाफ सूचीबद्ध स्थिति को अलग कानूनी और भौगोलिक मानकों के आधार पर देखता है। आगे दोनों देशों के बीच अवैध अफीम खेती, तस्करी और सप्लाई चेन सुरक्षा को लेकर सहयोग महत्वपूर्ण रहेगा।
ड्रग्स के खिलाफ कार्रवाई पर रहेगा फोकस
अमेरिकी प्रशासन ने 2027 की सूची जारी करते हुए संबंधित देशों से मादक पदार्थों की तस्करी और उत्पादन रोकने के लिए कदम उठाने का आह्वान किया है। भारत के मामले में आधिकारिक संदेश दो हिस्सों में सामने आया है—एक ओर उसे प्रमुख ड्रग ट्रांजिट या उत्पादन वाले देशों की सूची में रखा गया है, वहीं दूसरी ओर ट्रंप ने अवैध अफीम पोस्ता की खेती रोकने के भारतीय प्रयासों का स्वागत किया है।
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