Saudi Arabia Houthi Attack : यमन के हूती विद्रोहियों और सऊदी अरब के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच पाकिस्तान ने रियाद के समर्थन में अपना रुख स्पष्ट किया है। पाकिस्तान के रक्षा मंत्री ख्वाजा आसिफ ने कहा है कि अगर यमन का संघर्ष सऊदी अरब तक और फैलता है या हालात गंभीर होते हैं, तो पाकिस्तान व्यावहारिक और कूटनीतिक दोनों स्तरों पर सऊदी अरब के साथ खड़ा रहेगा। उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब क्षेत्र में ड्रोन और मिसाइल हमलों को लेकर तनाव बढ़ा हुआ है।
मक्का के पास ड्रोन गिराए जाने का सऊदी दावा
हालिया घटनाक्रम में सऊदी अधिकारियों ने दावा किया कि उन्होंने मक्का की दिशा में बढ़ रहे एक हूती ड्रोन को रोककर नष्ट कर दिया। इस घटना के बाद सऊदी अरब में पवित्र स्थलों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी। हूती विद्रोहियों ने हालांकि सऊदी पक्ष के इस दावे को खारिज किया है और कहा कि उसने मक्का को निशाना नहीं बनाया। इस वजह से घटना को लेकर दोनों पक्षों के दावे अलग-अलग हैं।
ख्वाजा आसिफ ने बताई पाकिस्तान की रणनीति
जियो न्यूज से बातचीत में ख्वाजा आसिफ ने कहा कि स्थिति बिगड़ने पर पाकिस्तान केवल बयान तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि जरूरत के अनुसार व्यावहारिक और कूटनीतिक कदम उठाएगा। उन्होंने हाल में हुए मक्का संयुक्त रक्षा समझौते का भी उल्लेख किया। आसिफ के अनुसार, इस समझौते के अलावा भी पवित्र स्थलों की सुरक्षा को लेकर पाकिस्तान की अपनी प्रतिबद्धता है।
मक्का डिफेंस अलायंस को लेकर क्या है व्यवस्था
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने अगस्त 2026 में मक्का में एक संयुक्त रक्षा समझौता किया था। इस समझौते का उद्देश्य सदस्य देशों के खिलाफ संभावित बाहरी आक्रमण की स्थिति में सामूहिक प्रतिरोध को मजबूत करना बताया गया है। रिपोर्टों के मुताबिक समझौते की तुलना NATO के सामूहिक रक्षा सिद्धांत से की गई है, हालांकि इसके संचालन की विस्तृत व्यवस्था अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं है।
पवित्र स्थलों की सुरक्षा को लेकर आसिफ का बयान
ख्वाजा आसिफ ने यह भी कहा कि मक्का और मदीना जैसे पवित्र स्थलों की सुरक्षा को वह किसी सामान्य राजनीतिक या सैन्य समझौते से अलग विषय मानते हैं। उनका कहना है कि ऐसी स्थिति में पाकिस्तान अपनी जिम्मेदारी निभाने के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। यह बयान विशेष रूप से तब महत्वपूर्ण हो गया है, जब सऊदी अरब ने मक्का के आसपास ड्रोन खतरे की सूचना दी और यमन में लड़ाई तेज हुई है।
हूती हमलों के बीच सऊदी पर बढ़ा दबाव
हूतियों ने हाल के दिनों में सऊदी अरब के दक्षिणी हिस्सों और ऊर्जा से जुड़े ठिकानों पर ड्रोन और मिसाइल हमलों का दावा किया है। दूसरी ओर सऊदी नेतृत्व वाला पक्ष यमन में हूती ठिकानों पर हवाई कार्रवाई कर रहा है। हालिया संघर्ष ने 2022 के युद्धविराम के बाद अपेक्षाकृत कम हुई सैन्य गतिविधियों को फिर तेज कर दिया है।
सऊदी अरब ने सहयोगियों से मांगी सैन्य मदद
एसोसिएटेड प्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, सऊदी अरब के मिसाइल-रक्षा संसाधनों पर दबाव बढ़ा है और रियाद क्षेत्रीय तथा पश्चिमी सहयोगियों से सैन्य सहायता की मांग कर रहा है। रिपोर्ट में पाकिस्तान और अन्य देशों का भी उल्लेख किया गया है, लेकिन अभी तक किसी देश ने सऊदी अरब के लिए प्रत्यक्ष सैन्य तैनाती की औपचारिक घोषणा नहीं की है।
पाकिस्तान की प्रत्यक्ष भूमिका पर अभी स्थिति अस्पष्ट
पाकिस्तान ने सऊदी अरब को राजनीतिक और कूटनीतिक समर्थन का भरोसा दिया है, लेकिन मौजूदा समय में उसकी प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई की कोई आधिकारिक घोषणा सामने नहीं आई है। इससे यह सवाल बना हुआ है कि यदि हूती हमले आगे बढ़ते हैं, तो मक्का रक्षा समझौते के तहत किस तरह की कार्रवाई की जाएगी। क्षेत्रीय विश्लेषणों में भी समझौते के वास्तविक संचालन और उसकी सीमाओं को लेकर अलग-अलग आकलन सामने आए हैं।
यमन संघर्ष का दायरा लगातार बढ़ रहा
यमन में मौजूदा लड़ाई अब केवल स्थानीय सैन्य संघर्ष तक सीमित नहीं दिख रही है। लाल सागर, बाब-अल-मंदेब और सऊदी ऊर्जा प्रतिष्ठानों से जुड़े घटनाक्रम ने इसे व्यापक क्षेत्रीय सुरक्षा मुद्दा बना दिया है। हाल के दिनों में हूतियों ने रणनीतिक इलाकों में बढ़त का दावा किया है, जबकि सऊदी नेतृत्व वाला पक्ष हवाई शक्ति के जरिए जवाब दे रहा है।
आगे के घटनाक्रम पर रहेगी अंतरराष्ट्रीय नजर
ख्वाजा आसिफ के बयान ने मक्का रक्षा समझौते की भूमिका को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। फिलहाल पाकिस्तान ने सऊदी अरब के साथ खड़े रहने की बात कही है, जबकि प्रत्यक्ष सैन्य भागीदारी को लेकर कोई अंतिम सार्वजनिक निर्णय सामने नहीं आया है। ऐसे में आने वाले दिनों में हूती हमलों की तीव्रता, सऊदी प्रतिक्रिया और तीनों देशों के रक्षा समझौते का वास्तविक इस्तेमाल क्षेत्रीय घटनाक्रम के लिए महत्वपूर्ण रहेगा।
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