Moon Crater : वैज्ञानिकों ने चांद की सतह पर एक विशाल नया इंपैक्ट क्रेटर खोजा है, जिसे हाल के समय में सौरमंडल में मिला सबसे बड़ा नया क्रेटर बताया जा रहा है। इसका व्यास करीब 728 फीट यानी 222 मीटर है, जबकि गहराई लगभग 141 फीट यानी 43 मीटर है। यह आकार प्रसिद्ध रोमन कोलोसियम से भी बड़ा है। वैज्ञानिकों के अनुसार, यह घटना बेहद दुर्लभ थी और लगभग एक सदी में एक बार होने वाली टक्कर के स्तर की थी।
मैकगेटचिन क्रेटर रखा गया नाम
नए क्रेटर का आधिकारिक नाम McGetchin Crater रखा गया है। इसका नाम दिवंगत चंद्र वैज्ञानिक थॉमस मैकगेटचिन के सम्मान में रखा गया, जो ह्यूस्टन स्थित लूनर एंड प्लैनेटरी इंस्टीट्यूट के निदेशक रह चुके थे। वैज्ञानिकों के मुताबिक, इस क्रेटर का निर्माण चांद के पृथ्वी की ओर वाले क्षेत्र के पूर्वी किनारे पर हुआ। शोधकर्ताओं ने इसे एक असाधारण वैज्ञानिक अवसर माना है।
अप्रैल और मई 2024 के बीच हुई थी टक्कर
शोध के अनुसार, यह विशाल क्रेटर 11 अप्रैल से 22 मई 2024 के बीच किसी समय बना था। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि तीन से छह मंजिला इमारत के आकार का कोई क्षुद्रग्रह या धूमकेतु का टुकड़ा चांद की सतह से टकराया। इतनी शक्तिशाली टक्कर ने सतह को गहराई तक प्रभावित किया और बड़ी मात्रा में धूल तथा चट्टानी मलबा आसपास के क्षेत्र में फैला दिया।
टक्कर के समय क्रेटर की पहचान नहीं हो सकी
दिलचस्प बात यह है कि टक्कर के समय वैज्ञानिकों ने इस क्रेटर को तुरंत नहीं पहचाना। NASA के Lunar Reconnaissance Orbiter यानी LRO ने उस क्षेत्र की तस्वीरें ली थीं, लेकिन विशाल मात्रा में उपलब्ध डेटा के कारण नया बदलाव तुरंत नजर नहीं आया। 24 अक्टूबर 2025 को LRO के डेटा की नियमित जांच के दौरान वैज्ञानिक रॉबर्ट वैगनर ने आसपास फैले नए मलबे के पैटर्न को पहचाना। इसके बाद उच्च रिजॉल्यूशन वाली तस्वीरों से खोज की पुष्टि की गई।
मलबा क्रेटर से बहुत दूर तक फैला
वैज्ञानिकों का कहना है कि टक्कर का असर केवल 222 मीटर के क्रेटर तक सीमित नहीं रहा। विस्फोट जैसी ऊर्जा के कारण चांद की सतह से निकली सामग्री काफी दूर तक फैल गई। LRO की विस्तृत तस्वीरों में क्रेटर के आसपास ताजा मलबे और सतह में बदलाव दिखाई दिए। यह अध्ययन वैज्ञानिकों को यह समझने में मदद कर रहा है कि एक बड़ी अंतरिक्षीय टक्कर चंद्रमा की ऊपरी परत को किस तरह बदल सकती है।
सात किलोमीटर क्षेत्र में मिला ठंडा इलाका
दूसरे अध्ययन में शोधकर्ताओं ने क्रेटर के आसपास करीब चार मील यानी लगभग 6.4 किलोमीटर चौड़ा ठंडा क्षेत्र भी पाया। रात के समय यह इलाका आसपास की सतह की तुलना में करीब 16 डिग्री फारेनहाइट ठंडा था। वैज्ञानिकों के अनुसार, टक्कर के कारण वहां का रेगोलिथ यानी चंद्र मिट्टी ढीला और कम घना हो गया, जिससे वह दिन में अवशोषित गर्मी को रात में पहले की तुलना में अलग तरीके से बनाए रखता है।
चांद की मिट्टी लगातार पलटती रहती है
इस खोज ने चंद्र सतह के बदलने की गति को लेकर भी नई जानकारी दी है। वैज्ञानिकों के अनुसार, माइक्रोमेटियोरॉइड और बड़े अंतरिक्षीय पिंडों की टक्करों से चांद की ऊपरी मिट्टी लगातार उलट-पुलट होती रहती है। LRO मिशन ने अब तक कम से कम 1,000 नए इंपैक्ट क्रेटर पहचाने हैं और करीब एक लाख अन्य सतही बदलाव दर्ज किए हैं।
अपोलो अंतरिक्ष यात्रियों के पैरों के निशान हमेशा नहीं रहेंगे
चंद्र सतह के लगातार बदलने की यह प्रक्रिया एक दिलचस्प तथ्य भी सामने लाती है। वैज्ञानिकों के अनुसार, अपोलो मिशनों के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों द्वारा छोड़े गए पैरों के निशान हमेशा के लिए सुरक्षित रहने वाली धारणा सही नहीं है। लंबे समय के दौरान अंतरिक्षीय मलबे और सूक्ष्म टक्करों से ऊपरी सतह बदलती रहती है, जिससे ऐसे निशान धीरे-धीरे मिट सकते हैं।
भविष्य के मून बेस के लिए क्यों अहम है यह खोज
यह खोज उस समय सामने आई है जब NASA चांद पर भविष्य में मानव और रोबोटिक गतिविधियों का विस्तार करने की तैयारी कर रहा है। वैज्ञानिक अब यह समझना चाहते हैं कि बड़ी टक्करों से उछली चट्टानें और मलबा संभावित चंद्र बेस तक कितनी दूर पहुंच सकता है। इस जानकारी से भविष्य के लैंडिंग क्षेत्रों और संरचनाओं को अंतरिक्षीय टक्करों के जोखिम को ध्यान में रखकर डिजाइन करने में मदद मिल सकती है।
LRO मिशन ने फिर साबित की अपनी वैज्ञानिक उपयोगिता
2009 में लॉन्च हुआ NASA का Lunar Reconnaissance Orbiter लगातार चांद की सतह का अध्ययन कर रहा है। इसके कैमरे और अन्य उपकरण सतह की बनावट, तापमान, संरचना और समय के साथ होने वाले बदलावों को रिकॉर्ड करते हैं। McGetchin Crater की खोज ने एक बार फिर दिखाया है कि वर्षों पुराने LRO डेटा की तुलना करके चांद की सतह पर हुई नई घटनाओं को पहचाना जा सकता है और उनसे भविष्य के चंद्र अभियानों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी हासिल की जा सकती है।
Read More : PM Modi Birthday 2026 : अमित शाह ने PM मोदी को जन्मदिन पर दी बधाई, सर्जिकल स्ट्राइक का भी किया जिक्र