West Asia Tension : पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और बढ़ते तनाव के बीच भारत ने संयुक्त राष्ट्र में समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया है। भारत ने स्पष्ट किया कि वाणिज्यिक जहाजों को किसी भी परिस्थिति में संघर्ष का निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए। भारत के मुताबिक, समुद्री रास्तों की सुरक्षा वैश्विक व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला के लिए बेहद महत्वपूर्ण है।
कमर्शियल जहाजों को निशाना नहीं बनाया जाना चाहिए
संयुक्त राष्ट्र में भारत के प्रतिनिधि पी. हरीश ने कहा कि व्यापारिक जहाजों को भू-राजनीतिक तनाव का लक्ष्य नहीं बनना चाहिए। उन्होंने नौवहन अधिकारों को भी किसी तरह के दबाव, धमकी या गैरकानूनी प्रतिबंध से मुक्त रखने की आवश्यकता बताई। भारत ने संघर्ष वाले क्षेत्रों में समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षित निकासी के लिए बेहतर समन्वय व्यवस्था पर भी जोर दिया है।
भारतीय नौसेना ने 449 से ज्यादा व्यापारिक जहाजों को सुरक्षा दी
भारत ने संयुक्त राष्ट्र को बताया कि अदन की खाड़ी और लाल सागर में भारतीय नौसेना के लगातार समुद्री सुरक्षा अभियानों के तहत 14 सितंबर 2026 तक 449 से अधिक व्यापारिक जहाजों को सुरक्षित पारगमन उपलब्ध कराया गया है। इन जहाजों के जरिए करीब 2.03 करोड़ मीट्रिक टन माल और तेल का परिवहन हुआ, जिसकी कीमत 8.4 अरब डॉलर से अधिक बताई गई है।
समुद्री मार्ग बाधित होने से बढ़ सकता है वैश्विक दबाव
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में कहा कि समुद्री असुरक्षा का प्रभाव केवल जहाजों तक सीमित नहीं रहता। किसी महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर व्यवधान आने से वैकल्पिक रास्तों पर दबाव बढ़ सकता है। इसके साथ ही माल ढुलाई और बीमा की लागत बढ़ने, ऊर्जा तथा खाद्य आपूर्ति प्रभावित होने और विकासशील देशों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव पड़ने की आशंका रहती है।
लाल सागर और अदन की खाड़ी की अहम भूमिका
लाल सागर और अदन की खाड़ी एशिया, यूरोप और अन्य बाजारों के बीच समुद्री व्यापार के महत्वपूर्ण रास्ते हैं। इन मार्गों में किसी भी तरह की अस्थिरता से जहाजों को वैकल्पिक समुद्री मार्ग अपनाने पड़ सकते हैं। मौजूदा क्षेत्रीय तनाव के बीच वैश्विक व्यापार से जुड़े देशों के लिए इन समुद्री गलियारों की सुरक्षा एक महत्वपूर्ण चिंता बनी हुई है।
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी बढ़ी चिंता
पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष का असर होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी दिखाई दे रहा है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से गुजरने वाले कमोडिटी जहाजों की संख्या सामान्य औसत की तुलना में काफी कम हुई है। इससे ऊर्जा आपूर्ति और वैश्विक समुद्री व्यापार पर संभावित प्रभाव को लेकर चिंताएं बढ़ी हैं।
भारत पहले भी उठा चुका है नौवहन की स्वतंत्रता का मुद्दा
भारत ने हाल के दिनों में अलग-अलग अंतरराष्ट्रीय मंचों पर समुद्री मार्गों की सुरक्षा को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजिश्कियान के साथ बैठक के दौरान पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता के लिए संवाद एवं कूटनीति पर जोर देते हुए नौवहन और व्यापार की स्वतंत्रता तथा समुद्री कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की आवश्यकता बताई थी।
BRICS बैठक में भी पश्चिम एशिया पर हुई चर्चा
नई दिल्ली में हुए BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान भी पश्चिम एशिया की स्थिति चर्चा का प्रमुख विषय रही। BRICS नेताओं ने क्षेत्र में बढ़ते संघर्ष को लेकर चिंता व्यक्त की और शांति तथा कूटनीतिक प्रयासों पर जोर दिया। सम्मेलन में समुद्री सुरक्षा और वैश्विक व्यापार से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई।
भारत ने बातचीत और कूटनीति को बताया समाधान का रास्ता
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजिश्कियान के साथ बैठक में प्रधानमंत्री मोदी ने भारत की स्थिति दोहराते हुए कहा कि विवादों का समाधान संवाद और कूटनीति के जरिए होना चाहिए। इसके साथ ही उन्होंने पश्चिम एशिया में दीर्घकालिक शांति और स्थिरता के प्रयास जारी रखने की जरूरत बताई। भारत ने समुद्री व्यापार और जहाजों के चालक दल की सुरक्षा को भी इसी संदर्भ में महत्वपूर्ण बताया।
समुद्री सुरक्षा से जुड़ी चिंता लगातार बढ़ रही
मौजूदा हालात में होर्मुज और बाब-अल-मंदेब जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर गतिविधियों में बदलाव ने वैश्विक व्यापार को लेकर चिंता बढ़ाई है। हालिया आंकड़ों में बाब-अल-मंदेब से गुजरने वाले कमोडिटी जहाजों की संख्या भी सामान्य औसत से कुछ कम दर्ज की गई। ऐसे में भारत लगातार सुरक्षित नौवहन, व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को निर्बाध बनाए रखने पर जोर दे रहा है।
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