TMC Nagaon Bypoll : असम में तृणमूल कांग्रेस की प्रदेश इकाई ने आगामी नागांव लोकसभा उपचुनाव नहीं लड़ने का फैसला किया है। पार्टी का यह निर्णय चुनाव आयोग की ओर से तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न के इस्तेमाल पर अंतरिम रोक लगाए जाने के बाद आया है। नागांव सीट पर उपचुनाव 6 अक्टूबर को होना है। पार्टी ने पहले शिक्षाविद् अब्दुल सलाम को अपना उम्मीदवार घोषित किया था।
चुनाव आयोग के फैसले के विरोध में फैसला
असम TMC के प्रदेश संयोजक शर्मन अली अहमद ने कहा कि पार्टी अपनी अध्यक्ष ममता बनर्जी के फैसले का समर्थन करती है। उन्होंने चुनाव आयोग की ओर से पार्टी के नाम और चुनाव चिह्न को उपचुनाव के लिए अस्थायी रूप से फ्रीज किए जाने के फैसले पर आपत्ति जताई। उनके अनुसार, इसी फैसले के विरोध में पार्टी ने नागांव उपचुनाव में अपना उम्मीदवार नहीं उतारने का निर्णय लिया है।
TMC ने आयोग के आदेश पर उठाए सवाल
शर्मन अली अहमद ने आरोप लगाया कि चुनाव आयोग के इस फैसले से लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है। उन्होंने इसे असम की जनता के साथ अन्याय बताया। हालांकि, ये आरोप TMC की ओर से लगाए गए हैं। चुनाव आयोग ने अपने अंतरिम आदेश में दोनों प्रतिद्वंद्वी गुटों को आगामी उपचुनावों में मूल पार्टी नाम और ‘Flowers and Grass’ यानी ‘फूल और घास’ वाले आरक्षित चुनाव चिह्न का इस्तेमाल करने से रोक दिया है।
ममता गुट को मिला नया नाम और चुनाव चिह्न
चुनाव आयोग ने शुक्रवार को ममता बनर्जी के नेतृत्व वाले गुट को ‘Mamata All India Trinamool Congress’ नाम आवंटित किया। इस गुट को ‘Football Player’ यानी फुटबॉल खिलाड़ी का चुनाव चिह्न दिया गया है। यह व्यवस्था फिलहाल आगामी उपचुनावों के लिए लागू की गई है और TMC के संगठनात्मक विवाद पर आयोग के अंतिम निर्णय तक प्रभावी रहेगी।
दूसरे गुट को मिला डेमोक्रेटिक TMC नाम
अरूप रॉय के नेतृत्व वाले दूसरे गुट को ‘Democratic Trinamool Congress’ नाम दिया गया है। इस गुट के लिए चुनाव आयोग ने ‘Envelope’ यानी लिफाफा चुनाव चिह्न आवंटित किया है। दोनों गुट अब आगामी उपचुनावों में इन अस्थायी नामों और चुनाव चिह्नों के तहत चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा ले सकते हैं।
मूल नाम और प्रतीक पर अंतिम फैसला बाकी
चुनाव आयोग का मौजूदा फैसला अंतिम तौर पर यह तय नहीं करता कि तृणमूल कांग्रेस के मूल नाम और पारंपरिक चुनाव चिह्न पर अधिकार किस गुट का होगा। आयोग ने फिलहाल दोनों पक्षों को अलग-अलग पहचान के साथ उपचुनाव में हिस्सा लेने की व्यवस्था की है। पार्टी के संगठनात्मक विवाद और नाम-चिह्न के दावे पर आगे की प्रक्रिया के बाद अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
नागांव सीट पर क्यों हो रहा है उपचुनाव
नागांव लोकसभा सीट पर उपचुनाव पूर्व कांग्रेस सांसद प्रद्युत बोरदोलोई के इस्तीफे के बाद जरूरी हुआ। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, बोरदोलोई ने कांग्रेस छोड़कर बीजेपी का दामन थाम लिया था। इसके बाद उन्होंने असम विधानसभा चुनाव में दिसपुर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा और जीत दर्ज की। इसी घटनाक्रम के कारण नागांव लोकसभा सीट रिक्त हुई और अब यहां उपचुनाव कराया जा रहा है।
अब नागांव में TMC उम्मीदवार नहीं उतरेगा
असम TMC के उम्मीदवार अब्दुल सलाम को नागांव उपचुनाव के लिए पार्टी ने पहले मैदान में उतारा था। लेकिन नाम और चुनाव चिह्न को लेकर बने मौजूदा विवाद के बीच प्रदेश इकाई ने चुनाव से हटने का निर्णय लिया है। इससे नागांव उपचुनाव में पार्टी की चुनावी रणनीति में बदलाव आया है।
उपचुनाव से पहले TMC में बढ़ा विवाद
TMC के नाम और चुनाव चिह्न को लेकर चल रहा विवाद अब असम के नागांव उपचुनाव तक पहुंच गया है। एक तरफ चुनाव आयोग ने दोनों गुटों को अलग-अलग पहचान दी है, वहीं असम इकाई ने इसी फैसले के विरोध में चुनाव नहीं लड़ने की घोषणा की है। आने वाले दिनों में आयोग की आगे की कार्रवाई और दोनों गुटों की राजनीतिक रणनीति पर नजर रहेगी।
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