Dattatreya Hosabale : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने रविवार को भोपाल के लाल परेड ग्राउंड में स्वयंसेवकों को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने सामाजिक समरसता, जातिगत भेदभाव, पर्यावरण संरक्षण, आपदा प्रबंधन और भारत की वैश्विक भूमिका जैसे मुद्दों पर अपनी बात रखी। उन्होंने जातिवाद और छुआछूत को हिंदू समाज के लिए कलंक बताते हुए इसे समाप्त करने के लिए व्यक्तिगत स्तर पर बदलाव की जरूरत पर जोर दिया।
जन्म आधारित भेदभाव को हिंदू संस्कृति का हिस्सा नहीं बताया
दत्तात्रेय होसबाले ने कहा कि किसी व्यक्ति के जन्म के आधार पर उसके साथ भेदभाव करना हिंदू संस्कृति का हिस्सा नहीं है। उनके मुताबिक समाज में जाति, ऊंच-नीच और छुआछूत जैसी प्रवृत्तियां सामाजिक एकता को कमजोर करती हैं। उन्होंने कहा कि इंसानों के बीच किसी भी तरह का भेदभाव नहीं होना चाहिए और समाज को इन विभाजनों से ऊपर उठने की जरूरत है।
शबरी और भगवान राम के प्रसंग का दिया उदाहरण
सामाजिक समानता की बात करते हुए होसबाले ने रामायण के भगवान राम और माता शबरी के प्रसंग का उल्लेख किया। उन्होंने इस उदाहरण के जरिए कहा कि भारतीय धार्मिक परंपराओं में सामाजिक समरसता के संदेश मौजूद हैं। उनके अनुसार जब आदर्श और धार्मिक प्रसंग भेदभाव की शिक्षा नहीं देते, तो समाज में जन्म के आधार पर ऊंच-नीच की भावना के लिए जगह नहीं होनी चाहिए।
कानून के साथ व्यक्तिगत आचरण में बदलाव पर जोर
होसबाले ने कहा कि जातिगत भेदभाव और अस्पृश्यता को केवल कानून, भाषण या उपदेश के जरिए समाप्त नहीं किया जा सकता। उन्होंने बदलाव की शुरुआत व्यक्ति के अपने घर और व्यवहार से करने की बात कही। उनके अनुसार हर व्यक्ति को यह संकल्प लेना चाहिए कि वह जाति के आधार पर किसी के साथ भेदभाव नहीं करेगा और न ही छुआछूत जैसी प्रवृत्तियों को बढ़ावा देगा।
सामाजिक एकता को बताया संगठन की ताकत
RSS सरकार्यवाह ने समाज को एकजुट करने पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जाति, पंथ, भाषा और क्षेत्र के आधार पर समाज का बंटवारा उसकी सामूहिक शक्ति को प्रभावित करता है। उन्होंने एकता को समझाने के लिए उंगलियों का उदाहरण देते हुए कहा कि अलग-अलग उंगलियां कमजोर हो सकती हैं, लेकिन एकजुट होकर वे मुट्ठी की ताकत बन जाती हैं।
भारत की प्रगति मानवता की सेवा के लिए हो
होसबाले ने भारत की सभ्यतागत यात्रा और अंतरराष्ट्रीय भूमिका पर भी विचार रखे। उन्होंने कहा कि भारतीय नागरिकों और वैज्ञानिकों ने विभिन्न क्षेत्रों में देश का नाम वैश्विक स्तर पर रोशन किया है। उनके मुताबिक भारत की प्रगति का उद्देश्य केवल आर्थिक या भौतिक विकास नहीं होना चाहिए, बल्कि देश की बढ़ती क्षमता का उपयोग मानवता की सेवा और कल्याण के लिए होना चाहिए।
PM मोदी के नेतृत्व में बढ़ी भारत की वैश्विक प्रतिष्ठा
अपने संबोधन में होसबाले ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत की अंतरराष्ट्रीय प्रतिष्ठा बढ़ने की बात भी कही। उन्होंने भारत के वैश्विक प्रभाव को आर्थिक, वैज्ञानिक और अन्य क्षेत्रों में हुई प्रगति से जोड़ते हुए कहा कि देश का उत्थान किसी दूसरे राष्ट्र पर प्रभुत्व स्थापित करने के उद्देश्य से नहीं होना चाहिए।
आपदा के समय सामूहिक जिम्मेदारी की बात
होसबाले ने प्राकृतिक आपदाओं के दौरान समाज की सामूहिक जिम्मेदारी का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने हाल की बाढ़ जैसी परिस्थितियों में स्वयंसेवी संगठनों, छात्रों और युवाओं के राहत कार्यों में आगे आने का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि संकट के समय समाज के विभिन्न वर्गों को एकजुट होकर प्रभावित लोगों की सहायता करनी चाहिए।
पर्यावरण संरक्षण को रोजमर्रा की आदत बनाने पर जोर
पर्यावरण संरक्षण पर बोलते हुए उन्होंने कहा कि केवल मंचों से प्रस्ताव पारित करने से प्रकृति की रक्षा नहीं की जा सकती। इसके लिए नदियों की सफाई और संरक्षण जैसे कार्यों को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाना होगा। घर, स्कूल, कार्यस्थल और बाजार स्तर पर पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार व्यवहार अपनाने की आवश्यकता है।
सामाजिक समरसता और सेवा का संदेश
भोपाल में अपने संबोधन के दौरान दत्तात्रेय होसबाले ने सामाजिक भेदभाव समाप्त करने, समाज में एकता मजबूत करने और नागरिक जिम्मेदारियों को व्यवहार में उतारने पर जोर दिया। उनके संबोधन में जातिगत भेदभाव के खिलाफ व्यक्तिगत आचरण में बदलाव, पर्यावरण संरक्षण, आपदा के समय सहयोग और भारत की वैश्विक भूमिका जैसे मुद्दे प्रमुख रहे।
Read More : West Bengal SIR : पश्चिम बंगाल SIR में 37 लाख अपील लंबित, EC ने सुप्रीम कोर्ट से मांगे ज्यादा ट्रिब्यूनल