Jharkhand Rubella Virus : झारखंड में इस सीजन में रूबेला वायरस का पहला रिपोर्टेड मामला सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग सतर्क हो गया है। सिमडेगा जिले के ठेठईटांगर प्रखंड की 10 वर्षीय बच्ची में रूबेला संक्रमण की पुष्टि हुई है। मामले के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने निगरानी, संपर्क में आए लोगों की पहचान और टीकाकरण से जुड़ी गतिविधियों को तेज करने पर जोर दिया है।
रूबेला क्या है और इसे जर्मन खसरा क्यों कहते हैं?
रूबेला एक संक्रामक वायरल इंफेक्शन है, जिसे आम बोलचाल में जर्मन खसरा कहा जाता है। हालांकि, यह सामान्य खसरा पैदा करने वाले वायरस से अलग होता है। बच्चों और वयस्कों में संक्रमण अक्सर हल्का हो सकता है, लेकिन गर्भावस्था के दौरान रूबेला मां और गर्भ में पल रहे बच्चे के लिए गंभीर खतरा बन सकता है।
रूबेला के लक्षण कई बार बेहद हल्के होते हैं
रूबेला से संक्रमित बच्चों या वयस्कों में चेहरे से शुरू होने वाले लाल चकत्ते इसके प्रमुख संकेतों में शामिल हो सकते हैं। इसके अलावा हल्का बुखार, गले में खराश, सिरदर्द, नाक बहना, आंखों में लालिमा और लिम्फ नोड्स में सूजन जैसे लक्षण भी देखे जा सकते हैं। कई संक्रमित लोगों में लक्षण बहुत हल्के होते हैं या दिखाई ही नहीं देते। CDC के अनुसार करीब 25 से 50 प्रतिशत संक्रमित लोगों में लक्षण नजर नहीं आ सकते, फिर भी वे संक्रमण फैला सकते हैं।
गर्भवती महिलाओं के लिए क्यों खतरनाक है रूबेला?
रूबेला का सबसे गंभीर खतरा गर्भावस्था के दौरान हो सकता है। संक्रमित गर्भवती महिला से वायरस गर्भ में पल रहे बच्चे तक पहुंच सकता है। इससे गर्भपात और जन्मजात रूबेला सिंड्रोम का जोखिम बढ़ सकता है। गर्भावस्था के शुरुआती चरण, खासकर पहले 12 सप्ताह के दौरान संक्रमण होने पर भ्रूण में गंभीर जन्मजात समस्याओं का खतरा अधिक हो सकता है।
झारखंड में रूबेला वायरस कैसे फैल सकता है?
रूबेला किसी एक राज्य या क्षेत्र तक सीमित वायरस नहीं है। यह संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या रेस्पिरेटरी सेक्रेशन के संपर्क में आने से फैल सकता है। संक्रमित व्यक्ति दाने निकलने से लगभग एक सप्ताह पहले से संक्रमण फैला सकता है और दाने आने के बाद भी करीब सात दिनों तक संक्रमण फैलाने की क्षमता रह सकती है।
सिर्फ दाने देखकर रूबेला की पुष्टि नहीं की जा सकती
रूबेला में चेहरे से शुरू होकर शरीर के अन्य हिस्सों तक लाल चकत्ते फैल सकते हैं। लेकिन केवल त्वचा पर दाने दिखाई देने के आधार पर रूबेला की पुष्टि नहीं की जा सकती। कई अन्य संक्रमणों में भी इसी तरह के रैश दिखाई दे सकते हैं। संदिग्ध मामले में डॉक्टर की सलाह और जरूरी जांच से ही स्थिति स्पष्ट की जानी चाहिए।
टीकाकरण रूबेला से बचाव का अहम तरीका
रूबेला से बचाव के लिए टीकाकरण सबसे महत्वपूर्ण उपायों में शामिल है। रूबेला वैक्सीन आमतौर पर MMR यानी मीजल्स, मम्प्स और रूबेला वैक्सीन के हिस्से के रूप में दी जाती है। CDC के अनुसार MMR की एक डोज रूबेला से बचाव में करीब 97 प्रतिशत प्रभावी है। बच्चों का टीकाकरण समय पर पूरा कराना जरूरी है।
गर्भधारण से पहले प्रतिरक्षा की जानकारी जरूरी
जो महिलाएं गर्भधारण की योजना बना रही हैं, उनके लिए रूबेला से प्रतिरक्षा की स्थिति जानना महत्वपूर्ण हो सकता है। गर्भावस्था के दौरान रूबेला संक्रमण गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है। इसलिए टीकाकरण की स्थिति स्पष्ट नहीं होने पर डॉक्टर या स्वास्थ्य विभाग से सलाह लेना उचित है।
रूबेला का कोई विशेष एंटीवायरल इलाज नहीं
रूबेला को तुरंत खत्म करने वाली कोई विशेष एंटीवायरल दवा सामान्य तौर पर उपलब्ध नहीं है। अधिकतर मामलों में उपचार लक्षणों को नियंत्रित करने और मरीज को आराम देने पर केंद्रित रहता है। रूबेला जैसे लक्षण दिखाई देने या संक्रमित व्यक्ति के संपर्क में आने की आशंका होने पर डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है।
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